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यूनिवर्सिटी हॉल नहीं, जो जींस में आएं

Mon, 26 Aug 2013 10:57 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 26 Aug 2013 10:57 AM IST
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vc of urdu farsi university in lucknow club

मैंने यूनिवर्सिटी में कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया है। मैंने सिर्फ बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक सलाह दी है। क्योंकि यूनिवर्सिटी कोई बाजार या सिनेमाघर नहीं है, जहां कैजुअल कपड़े पहनकर आ जाओ।

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ये बच्चों के भविष्य का सवाल है। फॉर्मल से तरबियत सुधरने के साथ ही व्यक्तित्व में गंभीरता आती है। जब आप कहीं इंटरव्यू के लिए जाते हैं तो ये बाते सामने वाले के लिए काफी मायने रखती हैं।
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मैंने ड्रेस को लेकर स्टूडेंट्स के सामने कई विकल्प रखे हैं। जिसे भविष्य की चिंता हो वह माने जिसे नहीं, वह नहीं माने।

स्पेशल कोर्स शुरू होंगे

जल्द ही अंतर भाषाई साहित्य के तहत अलग-अलग भाषाओं के तुलनात्मक अध्ययन, इंटररिलीजियस स्टडी जैसे कोर्स शुरू किए जाएंगे। डिजीटल लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी।

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जहां संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी की पांडुलिपियां नेट पर उपलब्ध होंगी। इसके अलावा सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए यूनिवर्सिटी में कोचिंग सेंटर बनाया जाएगा। इसमें पिछले दस साल की परीक्षाओं के आधार पर सिलेबस तैयार किया जाएगा। इस कोचिंग सेंटर के लिए सरकार के पास 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।

इसके अलावा शार्टटर्म कोर्स भी शुरू किए जाएंगे, ताकि 12वीं पास बच्चे एक या दो साल के कोर्स करके नौकरी पा सकें। इंडस्ट्री के विशेषज्ञ लोगों से बात करके ये जानेंगे कि उन्हें क्या चाहिए। उसके मुताबिक ही सिलेबस तैयार किया जाएगा। यूनानी व आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज खोलने का भी विचार है।


फील्ड में
उर्दू-अरबी-फारसी की डिमांड कम

मार्केट में उर्दू-अरबी-फारसी की डिमांड कम है। इसलिए मैं इस यूनिवर्सिटी के कोर्सेज को मार्केट से जोड़कर तैयार करा रहा हूं। जो आज और आने वाले समय की जरूरत हैं ताकि यहां से पढ़कर निकले छात्रों को जॉब के लिए परेशान न होना पड़े।

फिलहाल 27 कोर्स चुने गए हैं। इसमें बीबीए, पत्रकारिता, कामर्स, शिक्षा, विज्ञापन लेखन, इकोनॉमिक्स, फिजिकल एजूकेशन प्रमुख हैं। छात्रों को अंग्रेजी की भी शिक्षा दी जाएगी। हालांकि हर कोर्स के लिए उर्दू अनिवार्य होगी।

इसके लिए छह माह का उर्दू का फाउंडेशन कोर्स रखा है। जैसे बीबीए में छह सेमेस्टर में पहला सेमेस्टर उर्दू का होगा। इसके बाद बाकी पांच सेमेस्टर में जो अहम चैप्टर होंगे सिर्फ वही उर्दू में पढ़ाए जाएंगे। जो बच्चे अंग्रेजी में कमजोर होंगे उनके लिए अलग से क्लास लगेंगी।


जमीन और फंड की जरूरत

यूनिवर्सिटी 1050 करोड़ का प्रोजेक्ट है। इसके पास फिलहाल फंड और जमीन दोनों की ही कमी है। अभी तक यूनिवर्सिटी को करीब 190 करोड़ ही मिले हैं। इनमें से निर्माण कार्य ही पूरा नहीं हुआ है। एडमिनिस्ट्रेटिव व एकेडमिक बिल्डिंग समेत दूसरे काम अधूरे पड़े हैं।

अभी विवि के पास 28 एकड़ जमीन है। 30 एकड़ जमीन खरीदने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा 120 एकड़ जमीन खरीदने का एक प्रस्ताव पिछली सरकार के दौरान भी भेजा गया था। अगर इन्हें मंजूरी मिल जाए तो काफी बेहतर होगा।

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