{"_id":"ed89de2594614014e1089886f9bdf7cf","slug":"success-story-of-saloni-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"'मां ने दूसरों के घर मजदूरी कर पढ़ाया'","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
'मां ने दूसरों के घर मजदूरी कर पढ़ाया'
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 24 May 2015 11:18 AM IST
विज्ञापन
मेरी मां ने दूसरों के घर मजदूरी करके मुझे और मेरे भाई-बहनों को पढ़ाया। जब मैं छह वर्ष की थी तो सिर से पिता का साया उठ गया। यह कहानी है शिमला जिले के शैट्टी (शिवान) कुमारसैन की रहने वाली सलोनी वर्मा की। सलोनी कहती है कि घर की सारी जिम्मेदारी मेरी मां के कंधों पर आ गई। बेहद गरीब परिवार से होने के बावजूद मां ने हमें कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।
विज्ञापन
उन्होंने लोगों के घर मजदूरी कर मेरी पढ़ाई में रुकावट नहीं आने दी। पिता स्व. प्रेम राज वर्मा का करीब 9 साल पहले देहांत हो गया है। वह इलैस्ट्रिशियन का काम करते थे। उनकी मौत के बाद मेरी मां ने हमें पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मेरी मां पपी वर्मा के पास हमारी परवरिश का एक ही जरिया था। वह था सेब की फसल, लेकिन यह भी मौसम पर निर्भर करती है। करीब तीन साल बाद बड़ी बहन का विवाह हो गया। मेरा छोटा भाई छठी कक्षा में पढ़ता है।
विज्ञापन
इसके बाद आर्थिक तंगी के चलते मुझे लगता था कि मेरी आगे की पढ़ाई नहीं हो पाएगी। मां के पास सेब फसल के लिए कीटनाशक लाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। इसके बाद मां ने कर्ज लेकर मेरी पढ़ाई जारी रखी। इस बात का मुझे बहुत दुख होता था। मुझे शुरू से पढ़ने का बहुत शौक रहा है।
विज्ञापन
दसवीं कक्षा में मैंने 68 प्रतिशत अंक लिए हैं, लेकिन मुझे इसका दुख हुआ कि मैं छात्रवृत्ति हासिल नहीं कर पाई। अगर मेरे 72 प्रतिशत नंबर आते तो मैं छात्रवृत्ति की हकदार हो जाती। बावजूद इसके मैंने हिम्मत नहीं हारी। अब मैं जमा दो कक्षा में पढ़ रही हूं। मुझे राजनीतिक शास्त्र पढ़ने का शौक है। मैं भी मां का सपना पूरा करने को जी-जान से मेहनत कर रही हूं और बड़ी होकर राजनीतिज्ञ बनूंगी।
उन गरीबों के सपने पूरा करने में मदद करूंगी, जो आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं। मुझे मेरी मां पर फख्र है। गरीबी की हालत में भी उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया। वह जानती हैं कि एक बेटी के लिए शिक्षा का क्या महत्व है।