इनके संघर्ष की दास्तां पढ़कर फूट-फूटकर रो पढ़ेंगे आप
पैदा हुई तो पिता ने मां को हर रोज मारना पीटना शुरू कर दिया। मां को घर से निकाल दिया। तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली। पढ़िए दिल दहलाने वाली इनका संघर्ष। मेरा जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां बेटी के रूप में पैदा होना शायद बहुत बड़ा अपराध माना जाता था।
मुझे से बड़ी मेरी बहन थी जब मेरा जन्म हुआ तो घरवालों को यही लगा था कि बेटा होगा लेकिन मैं अभाग्नि आ गई। मेरे पैदा होते ही घरवालों ने मेरी मां को हर रोज मारना पीटना शुरू कर दिया। मां को घर से बाहर निकाल दिया गया। पिताजी ने मां को तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली। हम पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
लोगों के घर में बर्तन साफ करने का काम करने लगी मां
संघर्ष की ये दास्तां है हिमाचल के कांगड़ा जिले की रहने वाली मीनाक्षी की। मां ने कांगड़ा में एक वकील के घर में बर्तन साफ करने का काम पकड़ लिया। मरे नाना नानी ने भी हम दोनों बहनों को पालने का बीड़ा उठा लिया। वकील अंकल के पूछने पर मां ने उनको सारी बात बताई और कोर्ट में केस कर दिया। 12 साल बाद फैसला मां के हक में आया और हमारे पिताजी को हमें घर लाना पड़ा।
लेकिन यह कहकर मना कर दिया कि मैं सरकारी नौकरी नहीं करता। घर में रहने के लिए ऐसा कमरा दिया जहां पर बिजली तक नहीं थी। घर में खाने के लिए भी कुछ नहीं था। मेरी मां ने एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी की नौकरी करनी शुरू कर दी। किसी तरह बड़ी मुश्किलों से मेरी मां ने मुझे ग्रेजुएशन करवाई।
इस तरह जुटाई पढ़ाई करने की फीस
मुझे बचपन से ही संगीत का बहुत शौक था। कॉलेज में भी म्यूजिक विषय के साथ डिग्री हासिल की थी। इस दौरान मैंने कई प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया। बीए सेंकेड ईयर के दौरान ऑल इंडिया रेडियो से लोकगीत में बी ग्रेड हासिल किया। ग्रेजुएशन के बाद मेरी मां ने मजबूरी के हालात में मुझे आगे पढ़ाने से मना कर दिया।
मैं संगीत में पीजी डिग्री करना चाहती थी और यह डिग्री रेग्युलर ही की जा सकती है। इसके लिए मुझे हिमाचल प्रदेश्ा विवि में एडमिशन लेनी पड़ती लेकिन मां के पास इतने पैसे नहीं थे। मैं बहुत उदास हुई क्योंकि मेरा पूरा एक साल बर्बाद हो रहा था। मैंने जागरण करने शुरू किए।
पंजाब यूनिवर्सिटी में मिली एडमिशन
लोक संपर्क विभाग की ओर से भी कैजुअल आर्टिस्ट के तौर पर गाना शुरू किया। इस दौरान मैंने पहाड़ी कैसेट के लिए भी अपनी प्रस्तुति दी। इनमें चंगरे दी नार, शिव दा रूप जोगी, भोले बाबा और जय भोले नाथ आदि प्रमुख हैं। पहाड़ी फिल्म लाजो के लिए भी प्लेबैक सिंगर के तौर पर काम किया।
मिंजर मेला, मंडी शिवरात्रि और कुल्लू दशहरा में सोलो प्रस्तुति दी। एक साल के भीतर मैंने अपनी शिक्षा के लिए 60 हजार रूपए इकट्ठे कर लिए। अगले साल मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के लिए पीजी का एंट्रेस एग्जाम दिया। टॉप 15 में मैंने 6वां स्थान हासिल किया और मुझे एडमिशन मिल गई।
..और फिर इस मुकाम पर पहुंच गई मीनाक्षी
2006-08 तक यहां से एमए म्यूजिक की पढ़ाई की। इस बीच मैंने जागरण में गाने का सिलसिला जारी रखा। इससे मेरी पढ़ाई का खर्च चलता रहा। अप्रैल 2008 मैं फर्स्ट डिवीजन में पीजी डिग्री हासिल की। मई 2008 में मैंने केंद्रीय विद्यालय संगठन के तहत म्यूजिक टीचर के लिए चंडीगढ़ में ही लिखित परीक्षा दी और घर आ गई। अब मुझे एमफिल करनी थी लेकिन अक्तूबर में मेरा इंटरव्यू लेटर आ गया।
कुछ देर के लिए तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा लेकिन साथ में ये भी सोचा कि पूरे भारत में सिर्फ 27 सीटें तो मेरा नंबर कहां आएगा। लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मैंने दिल्ली जाकर इंटरव्यू दिया। इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ। एक महीने बाद मुझे ज्वानिंग लेटर मिला। शायद आपके भाग्य का लेखा जोखा उसके पास बिल्कुल बराबर रहता है। वो शक्ति आपकी परीक्षा लेती है आपकी सहनशीलता को देखती है।
मैंने दिसंबर 2008 में केंद्रीय विद्यालय लद्दाख में ज्वाइन किया। नौकरी करने लगी तो मैंने अपनी बहन को बीएड करवाई क्योंकि उसका भी पढ़ाई का बहुत शौक था। मां का एक सपना अब भी अधूरा था वो था हमारा अपना घर। फिर मैंने नया घर बनवाया। अपनी बड़ी बहन की शादी की और छह माह पहले मैंने भी शादी करके अपना परिवार बसा लिया। अब मैं अपने परिवार के साथ खुशी से रह रही हूं। मीनाक्षी, म्यूजिक टीचर, केंद्रीय विद्यालय, अल्हीलाल (कांगड़ा) हिमाचल प्रदेश।