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अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस: ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान, झाड़ फूंक नहीं डॉक्टर को दिखाएं
Tue, 13 Feb 2024 10:23 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Tue, 13 Feb 2024 10:23 AM IST
सार
चिकित्सीय विज्ञान में मिर्गी को न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर भी कहा जाता है। मिर्गी को लेकर लोगों में तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। डॉक्टरों की मानें तो 30 फीसदी मरीज दवा नहीं कराते हैं और भ्रांतियों के कारण ये बीमारी विकराल बन जाती है।
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मिर्गी आने के कारण और इलाज
- फोटो : istock
विस्तार
मिर्गी की बीमारी है तो झाड़ फूंक में समय न बिताएं। इससे मर्ज और विकराल होगी। विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज लेने पर 70 फीसदी मरीज ठीक हो रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की न्यूरोलॉजी की ओपीडी में आने वाले मिर्गी के 60 फीसदी मरीज झाड़ फूंक कराने के बाद इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
आगरा के एसएन के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि मिर्गी क्रोनिक न्यूरोलोजिकल डिसऑर्डर है। इसमें दिमाग असामान्य व्यवहार करता है। दौरे आना मुख्य लक्षण है। एसएन की न्यूरोलॉजी की ओपीडी में 20-25 फीसदी मरीज मिर्गी के आते हैं। इनमें से मर्ज में आराम मिलने पर 30 फीसदी बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं। मरीजों में 15 से 30 साल की उम्र के सबसे ज्यादा 65 फीसदी मरीज हैं। इलाज शुरू होने पर 70-75 फीसदी मरीज ठीक हो रहे हैं। यह बीमारी भ्रांतियों के कारण भी विकराल बन रही है। इसके लिए जागरूक भी कर रहे हैं।
ये हैं लक्षण :
शरीर में थकान होना, बेहोशी होना।
मांसपेशियों में ऐंठन, संकुचित होना।
भूलने की बीमारी, दौरे पड़ना।
असामान्य व्यवहार, चेतना खोना।
इन बातों का रखें ध्यान :
- मरीज को जूता-मोजा, प्याज नहीं सुंघाएं।
- दौरा आने पर मुंह में चम्मच न डालें।
- मरीज को घेरकर न खड़े हों, हवा आने दें।
- मिर्गी के मरीज वाहन चलाने से बचें।
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आगरा के एसएन के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि मिर्गी क्रोनिक न्यूरोलोजिकल डिसऑर्डर है। इसमें दिमाग असामान्य व्यवहार करता है। दौरे आना मुख्य लक्षण है। एसएन की न्यूरोलॉजी की ओपीडी में 20-25 फीसदी मरीज मिर्गी के आते हैं। इनमें से मर्ज में आराम मिलने पर 30 फीसदी बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं। मरीजों में 15 से 30 साल की उम्र के सबसे ज्यादा 65 फीसदी मरीज हैं। इलाज शुरू होने पर 70-75 फीसदी मरीज ठीक हो रहे हैं। यह बीमारी भ्रांतियों के कारण भी विकराल बन रही है। इसके लिए जागरूक भी कर रहे हैं।
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ये हैं लक्षण :
शरीर में थकान होना, बेहोशी होना।
मांसपेशियों में ऐंठन, संकुचित होना।
भूलने की बीमारी, दौरे पड़ना।
असामान्य व्यवहार, चेतना खोना।
इन बातों का रखें ध्यान :
- मरीज को जूता-मोजा, प्याज नहीं सुंघाएं।
- दौरा आने पर मुंह में चम्मच न डालें।
- मरीज को घेरकर न खड़े हों, हवा आने दें।
- मिर्गी के मरीज वाहन चलाने से बचें।