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अस्पताल में मरीज ने तोड़ा दम, इमरजेंसी गेट पर शव रखकर हंगामा

Tue, 21 May 2019 11:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 21 May 2019 11:44 PM IST
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In the hospital, the patient broke, leaving the dead body on the Emergency Gate
रोते परिजन - फोटो : pratapgarh
जिला अस्पताल में आयुष्मान वार्ड में उपचार करा रहे मरीज की मौत हो गई। परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। कुछ देर में इमरजेंसी गेट पर शव रखकर रास्ता बंद कर दिया। इससे अफरा-तफरी मच गई। बवाल की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्यकर्मी संग डॉक्टर इमरजेंसी से भाग निकले। जिससे तीन घंटे तक इमरजेंसी सेवा बाधित रही। मौके पर पहुंची पुलिस ने मशक्कत के बाद परिवार के लोगों को शांत कराया। इस दौरान परिजन सीनियर डॉक्टर से पोस्टमार्टम कराने की बात पर भड़क उठे। 
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कंधई थाना क्षेत्र के फेनहा निवासी विजय कुमार (45) पंजाब में प्राइवेट नौकरी करता था। पेट में तकलीफ के चलते वह घर चला आया था। उसका आयुष्मान जन आरोग्य योजना का कार्ड बना था। एक सप्ताह पहले परिजन उपचार के लिए उसे जिला अस्पताल लाए। आयुष्मान वार्ड में उसे भर्ती कर डाक्टर उपचार कर रहे थे। मंगलवार की सुबह पौने सात बजे उसकी सांसें थम गईं। यह देख परिजन रोने बिलखने लगे।
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मृतक के भाई कन्हैया का आरोप था कि डॉक्टरों ने उसके भाई के इलाज में खूब लापरवाही बरती। रात में कई बार बुलाने के लिए डॉक्टर के पास गया लेकिन कोई नहीं आया। यहां तक कि इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर भी वार्ड में उसके भाई को देखने नहीं पहुंचे। भले ही दावा किया जाता रहा कि मुफ्त में विजय का उपचार होगा लेकिन बाहर से दवाएं मंगाई जाती थी। बाहर से अल्ट्रासाउंड भी कराया गया।
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आक्रोशित परिजन शव स्ट्रेचर पर रखकर इमरजेंसी गेट पहुंच गए। वे ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। बवाल की आशंका को देखते हुए डॉक्टर व स्वास्थयकर्मी इमरजेंसी छोड़कर भाग निकले। अस्पताल में बवाल की खबर सुनकर भुपियामऊ, चिलबिला, जिला अस्पताल और सिविल लाइन पुलिस चौकी के प्रभारी दलबल के साथ पहुंचे। परिजन डीएम-एसडीएम को बुलाने की जिद कर रहे थे।


इस बीच सीनियर डॉक्टर मनोज खत्री पहुंचे और विजय की मौत हार्ट अटैक से होना बताते हुए पोस्टमार्टम कराकर संतुष्ट होने की बात कही। यह सुनते ही परिजन भड़क उठे। हालांकि पुलिसकर्मियों ने माहौल को शांत कराया। दूसरे मरीजों के उपचार में दिक्कत को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने परिवार के लोगों को अर्दब में लिया। जिसके बाद परिवार के लोग शव लेकर घर के लिए रवाना हो गए। तीन घंटे बाद फिर से इमरजेंसी सेवा प्रारंभ हो सकी।

 
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