कन्हैया ने बताया लाल सलाम का असल मतलब
कन्हैया ने कहा कि वह भाषण देने नहीं बल्कि अपना अनुभव बांटने आया है। उसने पुलिस रिमांड व जेल में रहने का अनुभव बताते हुए कहा कि उसे एक सिपाही मिला। जिसने उससे लाल सलाम के बारे में पूछा। उसको बताया कि लाल मतलब क्रांति और सलाम मतलब लाल सलाम। क्रांति को सलाम।
सिपाही ने पूछा कि आपको जेएनयू में सब कुछ सस्ता मिलता है। मैंने सिपाही से पूछा कि आपको पता है कि आपके साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ। मैंने पूछा कि अठारह घंटे ड्यूटी करने के बाद क्या ओवर टाइम मिलता है। सिपाही ने कहा नहीं।
तो फिर कहां से करते हो। सिपाही ने कहा कि वहीं से मिलता है जिसे आप करप्शन कहते हैं। उसने कहा कि वर्दी के लिए 110 रुपये मिलता है। इतने में तो अंडर गारमेंट भी नहीं आता। मैंने कहा, इसी भ्रष्टाचार और बेकारी से हम आजादी चाहते हैं। इसी दौरान हरियाणा में आरक्षण को लेकर फसाद हो गया। सिपाही ने मुझसे कहा कि यह जातिवाद काफी खराब है। मैंने कहा कि इसी जातिवाद से हम आजादी चाहते हैं।
जेल में कटोरी का रंग था लाल और नीला
कन्हैया ने बताया कि उसे जेल में उसे दो कटोरी मिली। जिसमें एक का रंग लाल और दूसरे का रंग नीला था। उसने कहा कि लाल रंग क्रांति का है और नीला रंग उसमें मिल जाए तो सहीं में आजादी मिल जाएगी।
छात्रसंघ अध्यक्ष ने अपने भाषण के दौरान आजादी मांगने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह कहते हैं कि जवान सीमा पर मर रहे हैं और जेएनयू में आजादी मांगी जा रही है। ऐसे लोगों को कहना चाहते हैं कि वह इस देश में आत्महत्या करने वाले किसानों पर क्यों नहीं बात करते।
सेना में भी हमारे भाई जाते हैं और खेत में काम करने वाले भी हमारे भाई ही हैं। कन्हैया ने चार महीने जेएनयू को बंद करने के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि मैं उनसे तार्किक बहस करने के लिए तैयार हूं। वह मुझे समझाने में कामयाब हो गए तो मैं उन्हें मान जाऊंगा।
कन्हैया ने बताया कि मैंने सिपाही से पूछा कि सिस्टम में सबसे ज्यादा पावर किसको हैं। सिपाही ने कहा कि हमारे डंडे को। क्या डंडा अपनी मर्जी से चला सकते हो तो उसने कहा नहीं। तो फिर पावर किसके पास गया। उसके पास जो फर्जी ट्वीट करता है। फर्जी ट्वीट करने वाले संघी से आजादी चाहिए। अब लगता है हम तुम एक साथ खड़े हैं।