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भोपाल गैस त्रासदी: सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाने की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब, 11 अक्टूबर तक का दिया समय
Tue, 20 Sep 2022 10:00 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 20 Sep 2022 10:00 PM IST
सार
भोपाल गैस त्रासदी मामले में केंद्र सरकार की क्यूरेटिव पिटीशन पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा है, पीड़ितों को मुआवजा बढ़ाने पर आपका स्टैंड क्या है?, जिसमें 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (750 करोड़ रुपये) का मुआवजा यूनियन कार्बाइड की तरफ से पहले ही किया जा चुका है।
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भोपाल गैस त्रासदी
- फोटो : Social Media
विस्तार
भोपाल गैस त्रासदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा, पीड़ितों को मुआवजा बढ़ाने को लेकर दाखिल सुधारात्मक (क्यूरेटिव) याचिका पर उसका यानी कि केंद्र सरकार का क्या पक्ष है?
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मामले में जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने साल 2010 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर वर्तमान सरकार को 11 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
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बता दें कि सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने कहा, यह आकस्मिक या दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हैं। हमें यह परीक्षण करना होगा कि क्या इसे खत्म करने की आवश्यकता है। पीड़ितों की ओर से पेश वकील करुणा नंदी ने कहा, यूनियन कार्बाइड कंपनी को मध्यप्रदेश अदालत के समक्ष अपराधी घोषित किया गया है। पीड़ितों को बिना मुआवजा दिए केस को बंद किया गया था।
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वहीं, केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार से निर्देश लेने की जरूरत है। दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि अमेरिका की यूनियन कार्बाइड कंपनी, जो अब डॉव केमिकल्स के स्वामित्व में है, को 7 हजार 413 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश दिए जाएं।
याचिका में शीर्ष अदालत के 14 फरवरी, 1989 के फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की गई है, जिसमें 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (750 करोड़ रुपये) का मुआवजा तय किया गया था। केंद्र सरकार के अनुसार, पहले का समझौता मृत्यु, चोटों और नुकसान की संख्या की गलत धारणाओं पर आधारित था। उसमें बाद के पर्यावरणीय नुकसान को ध्यान में नहीं रखा गया।
भोपाल गैस कांड कब हुआ...
मध्यप्रदेश के भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 को दर्दनाक हादसा हुआ था। इतिहास में जिसे भोपाल गैस कांड यानी भोपाल गैस त्रासदी का नाम दिया गया है। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ, जिससे लगभग 15 हजार से अधिक लोगों की जान गई थी और कई लोग अनेक तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए थे, जो आज भी त्रासदी की मार झेल रहे हैं।
भोपाल गैस कांड में मिथाइल आइसो साइनाइट (मिक) नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के लिए किया जाता है। मरने वालों के अनुमान पर विभिन्न स्त्रोतों की अपनी-अपनी राय होने से इसमें भिन्नता मिलती है, फिर भी पहले अधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 2 हजार 259 बताई गई थी।
मध्यप्रदेश की तत्कालीन सरकार ने 3 हजार 787 लोगों के मरने की पुष्टि की थी, जबकि अन्य अनुमान बताते हैं कि 8 हजार से ज्यादा लोगों की मौत तो दो सप्ताह के अंदर ही हो गई थी। लगभग अन्य 8 हजार लोग रिसी हुई गैस से फैली बीमारियों के कारण मारे गये थे। उस भयावह घटनाक्रम को फिर से याद करने पर भुक्तभोगियों की आंखें आज भी डबडबा जाती हैं।
ऐसा था मंजर...
कड़ाके की सर्द रात थी, लोग चैन की नींद सो रहे थे। 2 दिसंबर, 1984 को भोपाल की छोला रोड स्थित यूनियन कार्बाइड कारखाने में भी रोज की तरह अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर प्लांट एरिया में अपना काम संभाले हुए थे। लेकिन किसी को क्या पता था कि आज की रात हजारों लोग मौत की नींद सो जाएंगे। 2 दिसंबर, 1984 की रात प्लांट से गैस का रिसाव हुआ और त्रासदी की दास्तां बन गई।
