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MP News: 11 कॉलेजों से वसूले 90 लाख, पैरा मेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट
Wed, 26 Apr 2023 09:11 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 26 Apr 2023 09:11 PM IST
सार
मप्र हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को सरकार की तरफ से एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश कर दी। इसमें बताया गया कि 11 कॉलेजों से 90 लाख रुपये की वसूली की गई है। इंदौर के 7 कॉलेजों के खाते सीज फ्रीज किये गये है तथा जबलपुर के 8 कॉलेजों को सील किया गया है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मप्र में हुए पैरा मेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले के संबंध में सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की गई। इसमें बताया गया कि घोटाले से संबंधित 11 कॉलेजों से 90 लाख रुपये वसूल किए गए हैं। इंदौर के 7 कॉलेजों के खाते सीज फ्रीज किए गए हैं तथा जबलपुर के 8 कॉलेजों को सील किया गया है।
बता दें कि पैरा मेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले की राशि कॉलेज संचालकों से नहीं वसूले जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को सरकार की तरफ से बताया गया कि 11 कॉलेजों से 90 लाख रुपये की वसूली की गई है। इंदौर के 7 कॉलेजों के खाते सीज फ्रीज किये गये है तथा जबलपुर के 8 कॉलेजों को सील किया गया है। सरकार के आग्रह पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने शेष वसूली के लिए दस दिनों का समय प्रदान किया है।
गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में बताया गया कि साल 2009 से 2015 के बीच हुए प्रदेश के सैकड़ों पैरा मेडिकल कॉलेज ने छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया था। पैरा मेडिकल कॉलेज संचालकों ने फर्जी छात्रों को प्रवेश दर्शाकर सरकार से करोड़ों रुपये की राशि छात्रवृत्ति के रूप में प्राप्त की थी। घोटाले के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जांच में घोटाले के आरोप सही मिले थे। जिसके बाद सरकार की तरफ से उक्त कॉलेज से राशि वसूलने का निर्णय लिया गया था।
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याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन द्वारा छात्रवृत्ति घोटाले करने वाले कॉलेज से राशि वसूलने के लिए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया था कि कई अवसर प्रदान करने के बावजूद भी सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम समय प्रदान किया था।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि 24 करोड़ रुपये में से 4 करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई है। इंदौर खंडपीठ ने 5 करोड़ रुपये की राशि वसूली करने पर रोक लगा रखी है। शेष राशि वसूली के लिए कॉलेज के खिलाफ आरआरसी जारी की गई है। युगलपीठ ने राशि वसूली में सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित याचिकाएं सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे।
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि दो संस्थाओं से 4 लाख 76 हजार रुपये की वसूली की गई है। इसके अलावा दो संस्थाओं के बैंक एकाउंट सीज कर दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि सरकार एक तरफ कर्ज ले रही है और दूसरी तरफ अपनी राशि वसूलने में सालों लगा रही है। युगलपीठ ने सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए राशि की वसूली के लिए 24 घंटो में कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के आदेश जारी किए थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की पेश एक्शन टेकन रिपोर्ट में उक्त जानकारी दी गई। सरकार की तरफ से शेष राशि वसूलने के लिए दस दिन का समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 10 मई को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक वागरेजा ने पैरवी की।
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बता दें कि पैरा मेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले की राशि कॉलेज संचालकों से नहीं वसूले जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को सरकार की तरफ से बताया गया कि 11 कॉलेजों से 90 लाख रुपये की वसूली की गई है। इंदौर के 7 कॉलेजों के खाते सीज फ्रीज किये गये है तथा जबलपुर के 8 कॉलेजों को सील किया गया है। सरकार के आग्रह पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने शेष वसूली के लिए दस दिनों का समय प्रदान किया है।
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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में बताया गया कि साल 2009 से 2015 के बीच हुए प्रदेश के सैकड़ों पैरा मेडिकल कॉलेज ने छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया था। पैरा मेडिकल कॉलेज संचालकों ने फर्जी छात्रों को प्रवेश दर्शाकर सरकार से करोड़ों रुपये की राशि छात्रवृत्ति के रूप में प्राप्त की थी। घोटाले के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा जांच के आदेश दिए गए थे। जांच में घोटाले के आरोप सही मिले थे। जिसके बाद सरकार की तरफ से उक्त कॉलेज से राशि वसूलने का निर्णय लिया गया था।
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याचिका में कहा गया था कि राज्य शासन द्वारा छात्रवृत्ति घोटाले करने वाले कॉलेज से राशि वसूलने के लिए किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया था कि कई अवसर प्रदान करने के बावजूद भी सरकार की तरफ से जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने 25 हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए सरकार को जवाब पेश करने के लिए अंतिम समय प्रदान किया था।
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि 24 करोड़ रुपये में से 4 करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई है। इंदौर खंडपीठ ने 5 करोड़ रुपये की राशि वसूली करने पर रोक लगा रखी है। शेष राशि वसूली के लिए कॉलेज के खिलाफ आरआरसी जारी की गई है। युगलपीठ ने राशि वसूली में सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित याचिकाएं सुनवाई के लिए मुख्यपीठ में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे।
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि दो संस्थाओं से 4 लाख 76 हजार रुपये की वसूली की गई है। इसके अलावा दो संस्थाओं के बैंक एकाउंट सीज कर दिए हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि सरकार एक तरफ कर्ज ले रही है और दूसरी तरफ अपनी राशि वसूलने में सालों लगा रही है। युगलपीठ ने सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए राशि की वसूली के लिए 24 घंटो में कॉलेजों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के आदेश जारी किए थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की पेश एक्शन टेकन रिपोर्ट में उक्त जानकारी दी गई। सरकार की तरफ से शेष राशि वसूलने के लिए दस दिन का समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। जिसे स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 10 मई को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक वागरेजा ने पैरवी की।