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दिव्या के हौसले को सलाम
जागृति/ अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 27 Apr 2014 06:57 PM IST
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आठवीं में स्कूल छोड़ने के बावजूद आज दिव्या इंग्लिश में एमए कर रही है। महज तीन साल की उम्र में ग्लूकोमा से पीड़ित दिव्या की आंखों की रोशनी जाने लगी थी लेकिन कठिन परिश्रम और कुछ कर गुजरने की चाह ने आज दिव्या को युवाओं के लिए मिसाल बना दिया है।
नंगल में रहने वाली 21 वर्षीय दिव्या ने सूचना एवं प्राद्योगिकी के प्रयोग से अपनी अधूरी पढ़ाई अच्छे ग्रेड से पूरी की और अभी भी पढ़ाई कर रही है। दिव्या अपनी आंखों से न्यूजपेपर और किताबें नहीं पढ़ सकती है, पर प्रौद्योगिकी के प्रयोग में उसने इतनी महारत हासिल कर ली है कि वह टाकिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से कई उपन्यास पढ़ चुकी है।
आंखों की रोशनी चले जाने के कारण आठवीं कक्षा के बाद दिव्या को स्कूल से निकाल दिया गया था, पर उसने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से पढ़ाई पूरी की।
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उमंग फाउंडेशन की ओर से दृष्टिहीनों के लिए आयोजित कार्यशाला में भाग लेने शिमला आई दिव्या ने शनिवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में अक्षम और दृष्टिहीनों को सहानुभूति और हीनभावना से देखा जाता है, जो की सरासर गलत है।
दिव्या का सपना है कि वो सभी दृष्टि बाधित लोगों की प्रौद्योगिकी के सही प्रयोग से मदद करे ताकि वे भी अन्य लोगों की तरह सामान्य जीवन जी सके। हाल ही में दिव्या ने कुल्लू में स्काई डाईविंग और पैराग्लाइडिंग में भाग लिया है। अपनी उपलब्धियों का श्रेय वह अपने माता-पिता, भाई-बहन और चाचा को देती है।
दिव्या चलाती है रेडियो उड़ान
दिव्या आनलाइन रेडियो स्टेशन चलाती है। इंटरनेट के जरिये चलने वाले रेडियो स्टेशन ‘रेडियो उडान’ में वह अपने शो देती है। दृष्टि बाधितों द्वारा चलाए जाने वाले इस रेडियो स्टेशन के 50 देशों से भी अधिक श्रोता जुड़ चुके है।
ऑनलाइन ट्यूशन भी पढ़ाती है दिव्या
अपने खाली समय में दिव्या दृष्टिहीन लोगाें को इंटरनेट के जरिये आनलाइन ट्यूशन पढ़ाती है। वह कहती है कि हाल ही में इंदौर से एक नई स्टूडेंट उनसे जुड़ी है।
संगीत का भी खूब है शौक
पढ़ाई लिखाई के अलावा दिव्या को संगीत का भी खूब शौक है । वह गिटार, तबला, हारमोनियम और सितार बजाने के अलावा गायकी में रुचि रखती है। अपने खाली समय में वह कविताएं और लेख लिखती है। वह 50 से ज्यादा लेख लिख चुकी है।
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नंगल में रहने वाली 21 वर्षीय दिव्या ने सूचना एवं प्राद्योगिकी के प्रयोग से अपनी अधूरी पढ़ाई अच्छे ग्रेड से पूरी की और अभी भी पढ़ाई कर रही है। दिव्या अपनी आंखों से न्यूजपेपर और किताबें नहीं पढ़ सकती है, पर प्रौद्योगिकी के प्रयोग में उसने इतनी महारत हासिल कर ली है कि वह टाकिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से कई उपन्यास पढ़ चुकी है।
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आंखों की रोशनी चले जाने के कारण आठवीं कक्षा के बाद दिव्या को स्कूल से निकाल दिया गया था, पर उसने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से पढ़ाई पूरी की।
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उमंग फाउंडेशन की ओर से दृष्टिहीनों के लिए आयोजित कार्यशाला में भाग लेने शिमला आई दिव्या ने शनिवार को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में अक्षम और दृष्टिहीनों को सहानुभूति और हीनभावना से देखा जाता है, जो की सरासर गलत है।
दिव्या का सपना है कि वो सभी दृष्टि बाधित लोगों की प्रौद्योगिकी के सही प्रयोग से मदद करे ताकि वे भी अन्य लोगों की तरह सामान्य जीवन जी सके। हाल ही में दिव्या ने कुल्लू में स्काई डाईविंग और पैराग्लाइडिंग में भाग लिया है। अपनी उपलब्धियों का श्रेय वह अपने माता-पिता, भाई-बहन और चाचा को देती है।
दिव्या चलाती है रेडियो उड़ान
दिव्या आनलाइन रेडियो स्टेशन चलाती है। इंटरनेट के जरिये चलने वाले रेडियो स्टेशन ‘रेडियो उडान’ में वह अपने शो देती है। दृष्टि बाधितों द्वारा चलाए जाने वाले इस रेडियो स्टेशन के 50 देशों से भी अधिक श्रोता जुड़ चुके है।
ऑनलाइन ट्यूशन भी पढ़ाती है दिव्या
अपने खाली समय में दिव्या दृष्टिहीन लोगाें को इंटरनेट के जरिये आनलाइन ट्यूशन पढ़ाती है। वह कहती है कि हाल ही में इंदौर से एक नई स्टूडेंट उनसे जुड़ी है।
संगीत का भी खूब है शौक
पढ़ाई लिखाई के अलावा दिव्या को संगीत का भी खूब शौक है । वह गिटार, तबला, हारमोनियम और सितार बजाने के अलावा गायकी में रुचि रखती है। अपने खाली समय में वह कविताएं और लेख लिखती है। वह 50 से ज्यादा लेख लिख चुकी है।