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मध्यप्रदेश: मुरैना जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई रुकी, तीन मरीजों ने गंवाई जान
Tue, 27 Apr 2021 02:16 PM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Tue, 27 Apr 2021 02:16 PM IST
सार
मरीजों की मौत ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने कारण हुई, जिसके बाद अस्पताल में चीख पुकार मच गई। मरीज और अटेंडर इधर-उधर दौड़ने लगे। उस समय जिम्मेदार अधिकारी नदारद थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
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विस्तार
देशभर में कोरोना महामारी के चलते डॉक्टरों, चिकित्सकीय संसाधन व मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। मध्यप्रदेश के मुरैना में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। यहां के जिला अस्पताल में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के चलते कोरोना से ग्रसित तीन मरीजों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मरीजों की मौत ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने कारण हुई, जिसके बाद अस्पताल में चीख पुकार मच गई। मरीज और अटेंडर इधर-उधर दौड़ने लगे। उस समय जिम्मेदार अधिकारी नदारद थे।
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कुछ ही देर में सिविल सर्जन, एसडीएम व नगर निगम आयुक्त अस्पताल पहुंचे और आईसीयू व चिल्ड्रेन वार्ड से सिलेंडर मंगवाकर ऑक्सीजन की व्यवस्था सुचारू कराई। इधर, तीन लोगों की मौत के बाद भी कलेक्टर के जिला अस्पताल में न पहुंचने पर लोगों में नाराजगी दिखी। जानकारी के लिए बता दें कि मुरैना के जिला अस्पताल में कोविड आइसीयू में 14 पलंग हैं, जहां ऑक्सीजन की सप्लाई का सेंट्रलाइज सिस्टम है। सोमवार (26 अप्रैल) की सुबह 11 बजे के करीब सिलेंडरों में ऑक्सीजन खत्म होने से सप्लाई रुक गई, जिस कारण कोविड वार्ड में भर्ती वीरेन्द्र कुमार जैन, महेंद्र कुलश्रेष्ठ और धर्मेंद्र भदौरिया की सांसे थम गईं।
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चंबल संभाग के आयुक्त का बयान
मौतों का मामला सामने आते ही कलेक्टर ने आपात बैठक बुलाई। हालांकि, लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन स्थिति की वास्तविकता से कोसों दूर है। न नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और न ही डॉक्टर हैं। ऑक्सीजन सप्लाई पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। केवल बैठकें ही की जा रही हैं। इस संबंध में जब चंबल संभाग के आयुक्त आशीष सक्सेना से बात की तो उन्होंने कहा कि समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर कोरोना संक्रमण के थोड़े भी लक्षण दिखें तो अपने घर में आइसोलेट हो जाएं।
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परिजनों का आरोप
इधर, मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अंबाह के रहने वाले बॉबी जैन ने कहा सोमवार की सुबह मैंने पिताजी वीरेंद्र कुमार जैन को चाय पिलाई, बिस्किट खिलाए। 10 बजे के करीब मैं काम से चला आया था, लेकिन पड़ोसी को नंबर दे आया था। एक घंटे बाद फोन आया कि आपके पिताजी शांत हो गए। वहां पहुंचा तो पता चला कि ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित होने से उनकी मौत हो गई।
वहीं, महेंद्र कुलश्रेष्ठ की बेटी शिल्पी कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सिलेंडर का टाइम आधे घंटे तक सेट कर दिया गया था। इसके बाद ऑक्सीजन बंद हो गई। मैं नर्सिंग स्टाफ को तलाशने गई तो आधे घंटे तक कोई नहीं मिला, लौटी तो मेरे पिता की मौत हो गई। शिल्पी ने आगे कहा, 'रविवार (25 अप्रैल) की रात को भी ऐसा ही हुआ था, ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गई थी। बाद में वार्ड बॉय को तलाश कर लाई तो ऑक्सीजन सप्लाई शुरू हुई। वहीं, इस संबंध में जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर अशोक गुप्ता से बात करने की कोशिश की गई तो उनका कहना था कि मैं कलेक्टर की मीटिंग में हूं।'
इसके अलावा एक मरीज के भाई राहुल तोमर ने कहा कि कोविड आईसीयू में मेरे बड़े भाई भर्ती हैं। सुबह करीब 20 मिनट के लिए ऑक्सीजन खत्म हो गई थी, सिलेंडर बदलने वाला कोई नहीं था। एक वार्ड बॉय रहता है। सिलेंडर खत्म होने पर अटेंडर को चिल्लाना पड़ता है, तब सिलेंडर बदलता है। कई बार मैं स्वयं सिलेंडर उठाकर लाया हूं।