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Hindi News ›   City & states ›   The biggest challenge before PM Modi, CM Yogi Adityanath and BJP President JP Nadda is to regain the power after the 2022 Uttar Pradesh assembly elections

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेर पाएगा विपक्ष?

Fri, 30 Jul 2021 07:49 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 30 Jul 2021 07:49 PM IST
सार

बसपा सुप्रीमो मायावती के सचिवालय के वरिष्ठ सूत्र का भी दावा है कि भाजपा 100 सीटों से कम पर सिमट जाएगी। इस बार उत्तर प्रदेश में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चलेगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को भी उत्तर प्रदेश में भाजपा को कड़ी चुनौती मिलने का भरोसा है...

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The biggest challenge before PM Modi, CM Yogi Adityanath and BJP President JP Nadda is to regain the power after the 2022 Uttar Pradesh assembly elections
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के बाद सत्ता में वापसी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रणनीतिकार इसे लेकर आश्वस्त हैं। हालांकि योगी सरकार में केंद्रीय उत्तर प्रदेश क्षेत्र के एक मंत्री का कहना है कि कुछ सीटें भले कम हो जाएं, लेकिन सरकार भाजपा ही बनाएगी। यही भाषा भाजपा के पूर्वांचल के एक सांसद भी बोल रहे हैं। जबकि समाजवादी पार्टी के नेता संजय लाठर का कहना है कि चुनाव की तारीख नजदीक आने दीजिए। इस बार कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खुद पता चल जाएगा कि योगी सरकार की विदाई हो रही है।

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बसपा सुप्रीमो मायावती के सचिवालय के वरिष्ठ सूत्र का भी दावा है कि भाजपा 100 सीटों से कम पर सिमट जाएगी। इस बार उत्तर प्रदेश में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चलेगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को भी उत्तर प्रदेश में भाजपा को कड़ी चुनौती मिलने का भरोसा है। जबकि जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में बाजी मारने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर सबकुछ ठीक हो जाने का आत्म विश्वास फिर दिखाई देने लगा है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी उत्तर प्रदेश की तैयारी के लिए विशेष रणनीति बनानी शुरू की है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या इन सबके बाद भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बड़ा झटका लगने वाला है?

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ट्विटर से कितनी लड़ाई लड़ पाएंगी मायावती, प्रियंका और अखिलेश?

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी पिछले दो महीने से ट्विटर वार छेड़ दिया है। हर रोज सुबह उनके सचिवालय से मायावती द्वारा जारी दो से तीन ट्विटर संदेश आ जाते हैं। मायावती ने ट्वीट्स के जरिए विरोधियों को घेरने की मुहिम तेज कर दी है। हालांकि उनके मूल वोटर का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया से दूर रहता है। सवाल केवल मायावती का ही नहीं है। सोशल मीडिया के इस प्लैटफार्म से कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी राजनीति का गोला दाग देते हैं। राहुल गांधी के निशाने पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहते हैं। जबकि मायावती, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी के निशाने पर ज्यादातर उत्तर प्रदेश सरकार रहती है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री तथा 2017 के चुनाव में भाजपा के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर भी लगातार भाजपा पर हमला बोल रहे हैं। उनके निशाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार रहती है।

असल का दांव तो फ्लोटिंग वोट पर है

नाम न छापने की शर्त पर भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में जो चाहे जितना जोर लगा ले, लेकिन सरकार फ्लोटिंग वोटर ही बनवाएगा। वह कहते हैं कि अगड़ी, पिछड़ी और अनुसूचित जाति, जनजाति का फ्लोटिंग वोट फिलहाल भाजपा के ही साथ है। सूत्र का कहना है कि जाटव, यादव और अल्पसंख्यक वोटों के बूते किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बनने वाली है। इसलिए समाजवादी पार्टी, बसपा, कांग्रेस को सरकार बनाने का सपना देखना छोड़ देना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के संजय लाठर कहते हैं कि यह जिला पंचायत का चुनाव नहीं है, जहां भाजपा 2022 में सत्ता की धमक के बल पर सीटें जीत लेगी। भाजपा को याद रखना चाहिए कि 2017 में नाई, कुर्मी, कांछी, कोहार, लोहार, पासी, राजभर, कोईरी, पटेल, नोनिया, धोनिया समेत तमाम जातियां उसका साथ छोड़ चुकी हैं। ब्राह्मण भी योगी आदित्यनाथ की सरकार से तंग है। इसलिए जिनके बल पर भाजपा ने 2017 में बहुमत का स्वाद चखा था, इस बार वह सपना पूरा नहीं होगा।

क्या होगा नवंबर के बाद?

किसान आंदोलन में अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर शामिल हुए शामली के मनोज कुमार कहते हैं कि दो-तीन महीने में केंद्र की मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को सब पता चल जाएगा। किसान अपने क्षेत्र में भाजपा नेताओं को घुसने नहीं देंगे। इसके बाद लोगों को जमीनी हकीकत बदलती दिखाई देगी। इसी तरह का भरोसा यूपी बार्डर पर डटे ननौता के अरविंद कुमार को भी है। डा. सुधीर तोमर कनॉट प्लेस में होमियोपैथी की डिस्पेंसरी चलाते हैं। डा. तोमर बागपत में सूप गांव से हैं। वह बताते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और खासकर बागपत क्षेत्र में भाजपा को बड़ी निराशा हाथ लगेगी। डा. तोमर भी इसका कारण किसानों का आंदोलन ही बता रहे हैं। सहारनपुर के संजय अग्रवाल भी कहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को करारा झटका लग सकता है। वह कहते हैं कि किसानों को कड़ाके की ठंड, ओला पड़ते मौसम, जून की तपती गरमी और इस समय बारिश के मौसम में लगातार नजरअंदाज करके केन्द्र सरकार भारी गलती कर रही है।

यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों और प्रोफेशनल्स की राय है, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर लोगों में इतनी नाराजगी नहीं है। किसानों को वहां केवल दो मुद्दे ज्यादा परेशान कर रहे हैं। पहली छुट्टा गाय, बछड़ों की समस्या। जो किसानों के खेत की फसल खराब कर दे रहे हैं। दूसरा मुद्दा सरकार की परफारमेंस है। सुल्तानपुर के वकील प्रदीप कुमार कहते हैं कि पिछले सात साल में उत्तर प्रदेश के गांवों का बोझ कई गुना बढ़ा है। इसे छुट्टा-गाय बछड़ों, बेरोजगारी, मंहगाई और कोरोना की दूसरी लहर के बाद बड़े-बड़े शहरों से भागकर आए लोगों ने बढ़ाया है। किसान, गांव दोनों बहुत तनाव में हैं। प्रदीप कुमार कहते हैं संघ और भाजपा के कार्यकर्ता अपने तरीके से इसे मैनेज करने में जुटे हैं।

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चुनाव तो जाति और धर्म पर होगा, जिसका पलड़ा भारी जीत जाएगा

ज्ञानेश्वर संघ के प्रचारक हैं। पूर्वांचल में 16 जिलों में भाजपा के जनसंपर्क अभियान से जुड़े रहे हैं। काशी प्रांत में खुद संगठन में स्थान मिलने का इंतजार कर रहे हैं। साफ कहते हैं कि योगी सरकार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ रही है। करोना की दूसरी लहर के बाद संशय था, लेकिन अब सब ठीक हो चुका है। योगी के पीछे संघ और भाजपा के कार्यकर्ता हैं, चुनाव जीतेंगे। भाजपा के ही एक और नेता हैं। वह कहते हैं काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर सज-धजकर तैयार हो रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण हो रहा है। पूरे प्रदेश में हिंदू गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इसे आप क्या समझते हैं। सूत्र का कहना है कि वैसे भी उत्तर प्रदेश में चुनाव जाति, धर्म के मुद्दे पर होता आया है। महंगाई, बेरोजगारी समेत तमाम मुद्दे हमेशा गौण रहे हैं। अगर विकास की भी बात होगी तो योगी सरकार ने विकास किया है। इसलिए सत्ता में लौटना तय है।

इसके समानांतर सिरकोनी विधानसभा सीट के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट की जोर आजमाइश कर रहे सुशील दुबे कहते हैं कि पिछले तीन-चार विधानसभा चुनाव से सत्ता में रहने वाला दल हमेशा भ्रम में रहा। पहले बसपा थी, बाद में सपा भी हुई और अब भाजपा है। यह भ्रम 2022 के बाद टूट जाएगा।

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