'मोदी पूजा' करने को क्यों मजबूर हुए अभिभावक, फिर करेंगे अपने 'मन की बात'
- सीबीएसई ने कोरोना काल में बढ़ाई छात्रों की परीक्षा फीस
- 1500 रुपये हुई फीस, दो हजार विलंब शुल्क
- प्राइवेट स्कूलों को नियमित करने के लिए स्कूल नियामक आयोग की मांग कर रहे हैं अभिभावक
- मोदी पूजा करके 11 अक्तूबर से जंतर-मंतर पर देंगे बेमियादी धरना
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कोरोना काल में जिस समय करोड़ों लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है, सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के छात्रों की परीक्षा फीस बढ़ा दी है। अभिभावकों की मांग है कि कोरोना काल की उनकी समस्या को देखते हुए परीक्षा फीस को पूरी तरह माफ किया जाए। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों की कथित मनमानी पर लगाम लगाने के लिए अभिभावक शिक्षा नियामक आयोग के गठन की मांग कर रहे हैं। अपनी इन मांगों को मनवाने के लिए अभिभावक 11 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना देंगे। अभिभावक पहले 'मोदी पूजा' कर उनसे इन मुद्दों पर निर्णय लेने की अपील करेंगे। इसके बाद 'मन की बात' कर अपनी आगामी रणनीति की जानकारी देंगे।
15 अक्तूबर आखिरी तारीख
सीबीएसई के 10वीं और 12वीं छात्रों को बढ़ी फीस (1500 रुपये) 15 अक्तूबर तक स्कूलों में जमा करना अनिवार्य है। इसके बाद 2000 रुपये लेट फीस के साथ 31 अक्तूबर तक परीक्षा फीस का भुगतान किया जा सकेगा। भारत अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रताप चंद्र ने अमर उजाला को बताया कि कोरोना के जिस संकट काल में लोगों की नौकरियां जा रही हैं, उनकी आय खत्म हो गई है, या बहुत कम हो गई है, ऐसे समय में सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के छात्रों की फीस बढ़ाने का निर्णय लेकर अमानवीय कार्य किया है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील कर रहे हैं कि वे इस स्थिति पर निर्णय कर फीस वृद्धि का फैसला वापस करवाएं।
इसके साथ ही, अभिभावकों की मांग है कि अगर स्कूल नहीं चल रहे हैं, तो प्राइवेट स्कूलों को फीस लेने से रोका जाए। जब स्कूलों के ट्रांसपोर्ट, बिजली, पानी और अन्य खर्च कम हुए हैं तो इसका लाभ अभिभावकों को दिया जाना चाहिए क्योंकि सबसे ज्यादा संकट में वही वर्ग है।
मोदी पूजा क्यों
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान राम ने पहले समुद्र से प्रार्थना कर रास्ता मांगा था, उसी प्रकार अभिभावक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रार्थना कर उन्हें रास्ता देने की अपील करेंगे। अगर इसके बाद भी उन्हें सही रास्ता नहीं मिलता है तब वे अपने तरीके से मार्ग की तलाश करेंगे।
शिक्षा नियामक आयोग का गठन हो
प्रताप चंद्र ने कहा कि रेरा के गठन से प्राइवेट बिल्डरों की मनमानी रूकी है और फ्लैट खरीदारों को भारी राहत मिली है। ठीक इसी प्रकार प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए शिक्षा नियामक आयोग का गठन किया जाना चाहिए। जो सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए और नियमों के उल्लंघन पर शिक्षा माफियाओं पर कार्रवाई करे।
दिल्ली सरकार ने जारी किया ये ऑर्डर
ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने कहा कि कोरोना काल में इस तरह से फीस वृद्धि करना बेहद अमानवीय फैसला है। वे इसका कड़ा विरोध करते हैं। उन्होंने ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के साथ मिलकर जोरबाग के एक स्कूल के 10वीं और 12वीं के सभी बच्चों की कुल परीक्षा फीस भरने का निर्णय लिया है। इसके लिए समाज से धन जुटाया गया है और कुल लगभग 4.5 लाख रुपयों से स्कूल की फीस दी जाएगी।
अशोक अग्रवाल के मुताबिक दिल्ली सरकार ने इससे संबंधित एक आदेश जारी कर दिया है। अब दिल्ली के किसी भी स्कूल में बच्चों की फीस कोई भी व्यक्ति भर सकेगा। अगर बच्चों ने फीस पहले से ही भर दिया है तो स्कूल इस फीस को बच्चों को वापस लौटाएगा।
मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री को लिखा पत्र
भाजपा नेता अशोक ममगांई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कोरोना काल में लोगों की आय पर संंकट पैदा हुआ है,ऐसे में अभिभावकों को फीस के मामले पर राहत प्रदान की जानी चाहिए।