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जंगली जानवरों को सरकार देगी बिजली का झटका
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 02 Mar 2017 08:16 PM IST
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सरिस्का टाईगर रिर्जव
- फोटो : demo pic
सरिस्का टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों में रहने वाले किसानों की फसल को मौसम की मार के अतिरिक्त जंगली जानवरों से भी बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। इसी के चलते वन विभाग ने ग्रामीणों की मदद से पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर एक योजना का शुभारंभ किया है।
इसके तहत रिजर्व से लगते पांच गांवों की खेती वाली जमीन पर तारबंदी की गई है। जिसमें रात्रि को करंट प्रवाहित किया जाएगा। लेकिन वन विभाग के अनुसार यह करंट जंगली जानवरों को केवल झटका देगा इससे उन्हें जान की हानि नहीं होगी। इस पायलट प्रोजक्ट में जिन गांवों को सम्मलित किया गया है उनमें पृथ्वीपुरा,सबलपुरा,कल्याणपुरा, काला लाका और रामपुरा सम्मलित है।
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इसके तहत रिजर्व से लगते पांच गांवों की खेती वाली जमीन पर तारबंदी की गई है। जिसमें रात्रि को करंट प्रवाहित किया जाएगा। लेकिन वन विभाग के अनुसार यह करंट जंगली जानवरों को केवल झटका देगा इससे उन्हें जान की हानि नहीं होगी। इस पायलट प्रोजक्ट में जिन गांवों को सम्मलित किया गया है उनमें पृथ्वीपुरा,सबलपुरा,कल्याणपुरा, काला लाका और रामपुरा सम्मलित है।
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चैन से सो सकेगा किसान
सरिस्का टाईगर रिर्जव
- फोटो : demo pic
वन विभाग के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर करीब दस लाख रुपए की लागत आयी है। जिसमें से 60 प्रतिशत खर्च केन्द्र सरकार व बाकी राज्य सरकार वहन कर रही है। जबकि जिस 43 एकड़ खेती भूमि पर फेंसिंग की गई है। उसके स्वामी किसान पर केवल सीमेंट के खंभे लगाने का भार आया है। जबकि तार, बैटरी व अन्य उपकरण वन विभाग ने उपलब्ध कराए है।
ब इसका रखरखाव गांवों में बनी इको डवलपमेंट कमेटी को करना है। कमेटी लाभप्रद किसानों से 400 रुपए प्रतिहैक्टयर और प्रतिवर्ष के हिसाब से लेगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उददेश्य किसानों व जंगली जानवरों के बीच तालमेल बैठाना है। साथ ही इस योजना के बाद किसान भी चैन की नींद सो सकेगा।
ब इसका रखरखाव गांवों में बनी इको डवलपमेंट कमेटी को करना है। कमेटी लाभप्रद किसानों से 400 रुपए प्रतिहैक्टयर और प्रतिवर्ष के हिसाब से लेगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उददेश्य किसानों व जंगली जानवरों के बीच तालमेल बैठाना है। साथ ही इस योजना के बाद किसान भी चैन की नींद सो सकेगा।