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निजता को मौलिक अधिकार बताने के बाद अधर में ‘आधार’
amarujala.com-presented by: राजीव सिन्हा
Updated Fri, 25 Aug 2017 10:58 AM IST
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निजता को मौलिक अधिकार करार दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले केबाद आधार, ‘अधर’ में लटक सकता है। इस फैसले के बाद आधार की संवैधानिक वैधता का परीक्षण कर रही पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष केंद्र सरकार का पक्ष कमजोर पड़ सकता है।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया कि निजता का अधिकार ‘प्रबुद्ध मनोभाव’ है। आधार को लेकर सरकार की दलील रही है कि आधार केजरिए सरकार की लाभकारी योजनाओं को गरीब लोगों तक पहुंचाया जा रहा है और यह आम लोगों के लिए फायदेमंद है।
केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करने वाले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि विकासशील देशों में लाखों लोगों को जीवन की मूलभूत जरूरत की चीजें उपलब्ध नहीं है।
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लोगों केपास रहने की जगह नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है, पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं, ऐसे में निजता को अधिकार को मौलिक अधिकार बताने का दावा बेमानी है। लेकिन न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन ने अपने लिखे फैसले में सरकार केइन तमाम दलीलों को दरकिनार कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार में किसी तरह विरोधभास नहीं है।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया कि निजता का अधिकार ‘प्रबुद्ध मनोभाव’ है। आधार को लेकर सरकार की दलील रही है कि आधार केजरिए सरकार की लाभकारी योजनाओं को गरीब लोगों तक पहुंचाया जा रहा है और यह आम लोगों के लिए फायदेमंद है।
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केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करने वाले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि विकासशील देशों में लाखों लोगों को जीवन की मूलभूत जरूरत की चीजें उपलब्ध नहीं है।
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लोगों केपास रहने की जगह नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है, पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं, ऐसे में निजता को अधिकार को मौलिक अधिकार बताने का दावा बेमानी है। लेकिन न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरीमन ने अपने लिखे फैसले में सरकार केइन तमाम दलीलों को दरकिनार कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार में किसी तरह विरोधभास नहीं है।
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ये दोनों ही अधिकार स्वाभाविक है और सभी मनुष्य के लिए यह अविभाजित अधिकार है। ऐसे में सभी व्यक्ति केव्यक्तित्व को हरसंभव विकास करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जीने का अधिकार और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार साथ-साथ चलता है। दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार वास्तव में जीने केअधिकार का ही विस्तार है।
उन्होंने अपने आदेश में यह भी कहा कि वेणुगोपाल जिन लाखों-करोड़ों गरीब लोगों की बात कर रहे हैं वे आज केदिन पूरी तरह से अलग हैं। बदलते समय के साथ-साथ उनकेपास मोबाइल फोन है और वे अपने निजता केअधिकार केलिए आगे आ सकते हैं। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया है कि आखिर सरकार इस मामले में गरीब और अमीर को अलग-अलग कैसे देख रही है।
चूंकि सरकार की ओर से ये सारी दलीलों आधार को ध्यान में रखते हुए दी गई थी और नौ सदस्यीय पीठ ने इन दलीलों को नकार दिया है ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि आधार की संवैधानिक वैधता का परीक्षण कर रही पीठ सरकार की इन दलीलों को कितना तव्वजो देती है। सरकार के लिए पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष अपना पुख्ता पक्ष रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
उन्होंने अपने आदेश में यह भी कहा कि वेणुगोपाल जिन लाखों-करोड़ों गरीब लोगों की बात कर रहे हैं वे आज केदिन पूरी तरह से अलग हैं। बदलते समय के साथ-साथ उनकेपास मोबाइल फोन है और वे अपने निजता केअधिकार केलिए आगे आ सकते हैं। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया है कि आखिर सरकार इस मामले में गरीब और अमीर को अलग-अलग कैसे देख रही है।
चूंकि सरकार की ओर से ये सारी दलीलों आधार को ध्यान में रखते हुए दी गई थी और नौ सदस्यीय पीठ ने इन दलीलों को नकार दिया है ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि आधार की संवैधानिक वैधता का परीक्षण कर रही पीठ सरकार की इन दलीलों को कितना तव्वजो देती है। सरकार के लिए पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष अपना पुख्ता पक्ष रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।