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फूड फोर्टिफिकेशन को लेकर देशभर में साइकिल रैली निकालेगा एफएसएसएआई, बंद हो सकती है खुले तेल की बिक्री

Tue, 18 Sep 2018 09:46 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 18 Sep 2018 09:46 PM IST
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FSSAI will draw cycle rally across the country for food fortification
भोजन में जरूरी पोषक तत्व मिलाने को लेकर (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) एफएसएसएआई जल्द ही पूरे देश में मुहिम शुरू करने वाला है। एफएसएसएआई का कहना है कि फूड फोर्टिफिकेशन को लेकर जनता को जागरूक करने के लिए पूरे देश में साइकिल यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा अक्टूबर से शुरू हो कर अगले साल जनवरी तक चलेगी। वहीं एफएसएसएआई जल्द ही खाद्य तेल में फोर्टिफिकेशन को अनिवार्य बनाने जा रहा है।
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अक्टूबर से जनवरी 2019 तक रैली

तेल में सुक्ष्म पोषक तत्व विटामिन ए और डी मिलाने को लेकर आयोजित राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम में बोलते हुए एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि जनता में फूड फोर्टिफिकेशन को लेकर जागरूकता नहीं है। पिछले कुछ समय से इस बात पर विचार हो रहा है कि कैसे आमजन में इसे लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए। उन्होंने बताया कि इसके लिए पहली बार पूरे देशभऱ में छह साइकिल रैलियां निकाली जाएंगी, जो दो हजार स्थानों पर छोटे-छोटे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरुक करने का काम करेंगी। अग्रवाल ने बताया कि अक्टूबर के मध्य से यह कार्यक्रम शुरू होगा, जो 26 जनवरी को दिल्ली में खत्म होगा।
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पीएमओ से मिली अनुमति

अग्रवाल ने बताया कि इस साइकिल रैली को गांधी जी की 150वीं जयंती पर आयोजित लौह यात्रा से जोड़ दिया गया है। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से सहमति मिल चुकी है। यह आधिकारिक कार्यक्रम होगा। उन्होंने बताया कि देश से एनिमिया खत्म करने को लेकर लौह यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने देशभर के सभी खाद्य तेल निमार्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने इलाके में फोर्टिफाइड तेल का वितरण और रिटेल शुरू कर दें, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े। अग्रवाल ने कहा कि जब भी उनके इलाके में रैली होगी, तो इस बारे में आमजन को जागरूक करने में मदद करें।
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प्री-मिक्स सप्लायर्स ने खत्म की सब्सिडी

वहीं इस कार्यक्रम में देशभर से आए खाद्य तेल निर्माताओं ने एक लहजे में शिकायत की कि जब उन्होंने तेल में सुक्ष्म पोषक तत्व मिलाने शुरू किए तो प्री मिक्स सप्लायर्स गेन ने उनसे 100 प्रतिशत सब्सिडी देने का वायदा किया था, लेकिन पहले उस घटा कर 50 से 25 प्रतिशत किया गया और अब तो इेसे बिल्कुल ही खत्म कर दिया गया है। वहीं, एक निर्माता की शिकायत थी कि अचानक ही प्री-मिक्स सप्लायर्स ने रेट में बढ़ोतरी कर दी। टाटा ट्र्स्ट सीनियर एडवाइजर विवेक अरोड़ा ने बताया कि फैक्ट्रियों में आग लगने की वजह से यह हुआ है। वहीं एफएसएसएआई का कहना था कि 30 मार्च 2017 को प्री-मिक्स सप्लायर्स के साथ हुई बैठक में फैसला हुआ था कि कंपनियां अपने रेट फिक्स रखेंगी।  

बंद हो खुले तेल की बिक्री


निर्माताओं का कहना था कि उन्हें तेल में विटामिन ए और डी मिलाने की लागत अभी 15 पैसे प्रति लीटर पड़ रही है। लेकिन बाजार में अभी भी खुले में तेल खुलेआम बिक रहा है। जिससे उनकी बिक्री पर असर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि इस पर तत्काल रोक लगाई जाए और ऑयल फोर्टिफिकेशन को सभी के लिए अनिवार्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार जिस कुपोषित वर्ग के लिए खाद्य तेल या भोजन में सुक्ष्म पोषक तत्व जरूरी करने की बात कह रही है, वह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि खुले में तेल का ज्यादातर खरीददार वही वर्ग है। मध्यम वर्ग या उच्च वर्ग तो बोतल पैक तेल खरीद सकता है, लेकिन निचला वर्ग अभी भी अपनी जरूरत के मुताबिक दस रुपए, बीस रुपए का तेल खरीदता है। उन्होंने सुझाव दिया कि दूध वेंडिंग मशीन की तरह खाद्य तेल के लिए वेंडिंग मशीन लगाई जाए। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि बाजार में 50 ग्राम, 100 ग्राम के छोटे-छोटे पैके उतारे जाएं।

एक तिहाई आबादी को कुपोषण

टाटा ट्रस्ट के सीनियर एडवाइजर विवेक अरोड़ा ने कहा कि देश की एक तिहाई आबादी पोषक तत्वों की कमी से जूझ रही है। 6 साल से कम आयु वाले 57 फीसदी बच्चों को विटामिन ए की कमी से होने वाले रतौंधी यानी नाइट ब्लाइंडनेस की समस्या है, वहीं 69 प्रतिशत बच्चे और महिलाएं प्रजनन की अवस्था में एनिमिया से परेशान हैं। जबकि देश की 70 फीसदी आबादी में विटामिन डी की कमी है।

गौतलब है कि कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर फूड फोर्टिफिकेशन पर रोक लगाने की मांग की थी। मंच का कहना था कि फोर्टिफिकेशन में मिलाए जाने वाले जरूरी पोषक तत्व पशुओं से तैयार किए जाएंगे, जो धार्मिक मान्यताओं और शाकाहारियों के खिलाफ है। जागरण मंच का कहना है कि फोर्टिफिकेशन को लेकर टाटा ट्रस्ट, ग्लोबल अलायंस फॉर इंप्रूव्ड न्यूट्रिशियन (गेन), बिल एंड मिंलिडा गेट्स फाउंडेशन, क्लिंटन हेल्थ इनिशिएटिव, फूड फोर्टिफिकेशन इनिशिएटिव एंड न्यूट्रिशनल इंटरनेशनल और इंटरनेशनल लाइफ सांइसेज इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों और कंपनियों के अपने निजी हित शामिल हैं।
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