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राम रहीम को सजा मिलते ही रेप पीड़िता बोली- न तब डरी, न अब डरती हूं

Wed, 30 Aug 2017 09:08 AM IST
amarujala.com, Presented by: देव कश्यप
amarujala.com, Presented by: देव कश्यप Updated Wed, 30 Aug 2017 09:08 AM IST
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victim who unmasked Ram Rahim says Was not scared then, not scared now

साल 2002 के रेप केस में गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सजा होते ही पहली बार पीड़िता का बयान सामने आया, वे बोलीं-मैं तब भी नहीं डरी थी, मैं अब भी नहीं डर रही हूं।

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गौरतलब है कि सीबीआई ने डेरा प्रमुख के खिलाफ 18 लड़कियों को साक्ष्य देने के लिए तैयार किया था, लेकिन उनमें से सिर्फ दो लड़कियों ने कोर्ट में राम रहीम के खिलाफ बोला और अपने बयान पर कायम रही।
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अंग्रेजी वेबसाइट, द हिंदू को दिए विशेष इंटरव्यू में डेरा प्रमुख को सजा दिलाने वाली महिलाओं में से एक, जिसके स्टेटमेंट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को सजा दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई, ने बताया, 2009 में जब मैंने राम रहीम के खिलाफ गवाही दी थी उस वक्त वह अदालत में मौजूद था। मैं तब भी उससे नहीं डरी थी और न आज डरती हूं।
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महिला ने सोमवार को अपने रिश्‍तेदार के फोन से ‘द हिंदू’ से बात कर बताया कि 2002 से लगातार वह पुलिस के संरक्षण में है, जब से पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अज्ञात पत्र पर संज्ञान लेकर सीबीआई को बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया।

'आज मुझे न्‍याय मिला है'

victim who unmasked Ram Rahim says Was not scared then, not scared now

सीबीआई ने 18 महिलाओं को डेरा प्रमुख के खिलाफ गवाही देने के लिए मनाया लेकिन अदालत में दो ने ही उसके खिलाफ गवाही दी, जिससे उसे सजा मिली। महिला ने कहा, 'आज मुझे न्‍याय मिला है।'  पुलिस ने डेरा प्रमुख के खिलाफ सुनवाई से एक दिन पहले यानी 24 अगस्‍त से ही उस महिला की सुरक्षा बढ़ा दी है। 

महिला के एक नजदीकी रिश्‍तेदार ने बताया कि जब वह लड़की सिरसा मुख्‍यालय के डेरा सच्‍चा सौदा की ओर से संचालित कॉलेज में पढ़ रही थी तभी उसका यौन शोषण किया गया था। अब महिला विवाहित है और दो बच्‍चों की मां है। महिला का बड़ा भाई भी डेरा प्रमुख का समर्थक था, जिसका 2002 में राम रहीम सिंह ने मर्डर करवा दिया। 

राम रहीम को शक था कि उसके भाई ने ही अज्ञात पत्र लिखा है, जिससे उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की गयी। बहन के साथ हो रहे अत्‍याचार के बारे में उसका भाई जानता था। सीबीआई की ओर से मर्डर केस की भी जांच की जा रही है और इसकी अंतिम सुनवाई 16 सितंबर को शुरू होगी।

'डेरा प्रमुख के गार्ड कोर्ट में हथियारों के साथ आते थे'

victim who unmasked Ram Rahim says Was not scared then, not scared now

रिश्तेदार ने बताया कि, महिला के पिता का निधन पिछले वर्ष हो गया, जो वर्ष 2009 में जज के सामने बयान रिकार्ड कराते वक्‍त महिला के साथ थे। ‘2009 में ही बयान रिकार्ड कराने के लिए एक बार ही महिला कोर्ट गयी थी। उसके बाद की सभी सुनवाई में उसके पिता मौजूद रहे। डेरा प्रमुख के गार्ड कोर्ट में हथियारों के साथ आते थे। केस को आगे नहीं बढ़ाने को लेकर हमें धमकी दी गयी दबाव बनाया गया। डेरा प्रबंधन ने कहा कि इसके लिए हम जो भी रकम चाहेंगे वे इसका भुगतान करने को तैयार हैं।'

उन्होंने बताया कि महिला न्‍याय पाने को बेचैन थी और फैसले के दिन सुबह से ही टीवी से चिपकी थी। रिश्तेदार ने बताया कि, सिरसा के डेरा मुख्‍यालय से लौटने के तुरंत बाद एक किसान से उसकी शादी हो गयी। हमें वकीलों से पता चला कि जब 20 साल की सश्रम कारावास की सजा राम रहीम को दी गयी तो वह कोर्ट से रहम की भीख मांगते हुए फूट फूट कर रो रहा था। रोते हुए वह कोर्ट से बाहर जाने से इंकार कर रहा था। तब कमांडोज ने उसे खींचकर बाहर किया।

रिश्तेदार ने कहा, यह सब उसने अकेले नहीं किया, एक अन्य शिकायतकर्ता जो एक साध्वी थी, जिन्होंने गुमनाम पत्र लिखा था, उसका मामला कोर्ट के सामने नहीं आया। उस साध्वी ने उस राम रहीम द्वारा किए गए अत्याचारों को अदालत से बताने के लिए उसे प्रेरित किया था। 'जिसने उसे साहस दिया। उसने इतिहास बना दिया है, उन्हें सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जाना चाहिए।'

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