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अर्श से फर्श पर आए राम रहीम, साध्वी रेप केस ने कुछ यूं खत्म किया बाबा का पावर गेम
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Aug 2017 09:29 AM IST
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Highcourt on Ram rahim
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15 साल से चल रहे साध्वी रेप केस ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का पावर गेम एक झटके में खत्म कर दिया और बाबा अर्श से फर्श पर आ गए। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के नेताओं को अपने रसूख के आगे परिक्रमा करवाने वाले डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम का खेल खत्म हो गया है। सजा सुनाए जाने के बाद सत्ता का केंद्र बिंदु रहे डेरामुखी की जेल यात्रा शुरू हो चुकी है।
साध्वी यौन शोषण मामले ने जहां उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, वहीं साधुओं को नपुंसक बनाने, रंजीत सिंह व रामचंद्र छत्रपति हत्या के आरोप में वह अभी ट्रायल और सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। इनमें सबसे गंभीर मामला चार सौ साधुओं को नपुंसक बनाने का है। 25 अगस्त को यौन शोषण मामले में दोषी ठहराने के बाद हुई हिंसा के बाद से गुरमीत राम रहीम को चारों ओर शर्मनाक कृत्यों के लिए फटकार लगाई जा रही है।
सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक यही चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई असलियत सामने आने के बाद डेरामुखी को जमकर कोस रहा है। गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा सिरसा की गद्दी शाह सतनाम से संभालने के बाद दिनों दिन पावरफुल ही होते चले गए। गद्दी पर बैठने के बाद सबसे पहले उन्होंने डेरा समर्थकों और अनुयायियों को अपने प्रभाव में लिया।
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उसके बाद डेरे की शाखाओं का देश के साथ ही विदेश में विस्तार किया। इससे अनुयायी तो बढ़े ही डेरे की संपत्तियों में भी इजाफा होता गया। 90 के दशक से गुरमीत राम रहीम ने डेरे को सत्ता का केंद्र बनाना शुरू कर दिया था। अनुयायियों और समर्थकों की तादाद पंजाब के मालवा और हरियाणा के कई जिलों में बढ़ने पर वह बेहद ताकतवर हो गए।
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साध्वी यौन शोषण मामले ने जहां उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, वहीं साधुओं को नपुंसक बनाने, रंजीत सिंह व रामचंद्र छत्रपति हत्या के आरोप में वह अभी ट्रायल और सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं। इनमें सबसे गंभीर मामला चार सौ साधुओं को नपुंसक बनाने का है। 25 अगस्त को यौन शोषण मामले में दोषी ठहराने के बाद हुई हिंसा के बाद से गुरमीत राम रहीम को चारों ओर शर्मनाक कृत्यों के लिए फटकार लगाई जा रही है।
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सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक यही चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई असलियत सामने आने के बाद डेरामुखी को जमकर कोस रहा है। गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा सिरसा की गद्दी शाह सतनाम से संभालने के बाद दिनों दिन पावरफुल ही होते चले गए। गद्दी पर बैठने के बाद सबसे पहले उन्होंने डेरा समर्थकों और अनुयायियों को अपने प्रभाव में लिया।
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उसके बाद डेरे की शाखाओं का देश के साथ ही विदेश में विस्तार किया। इससे अनुयायी तो बढ़े ही डेरे की संपत्तियों में भी इजाफा होता गया। 90 के दशक से गुरमीत राम रहीम ने डेरे को सत्ता का केंद्र बनाना शुरू कर दिया था। अनुयायियों और समर्थकों की तादाद पंजाब के मालवा और हरियाणा के कई जिलों में बढ़ने पर वह बेहद ताकतवर हो गए।
सत्ता के बदले की सौगातों की बौछार
राम रहीम
- फोटो : SELF
हरियाणा में 2015 के विधानसभा चुनाव में डेरे ने भाजपा की किस्मत ही बदल दी और समर्थन करते हुए पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में ला दिया। डेरे का प्रभाव भाजपा के आला नेता बखूबी समझते थे, इसलिए हरियाणा केनेताओं के साथ ही दिल्ली दरबार के नेताओं ने चुनाव में समर्थन करने के लिए खूब हाजिरी भरी। नतीजन, डेरे का समर्थन भाजपा को मिला और पार्टी ने सत्ता में आने के बाद डेरामुखी के लिए सौगातों की बौछार कर दी।
उन्हें जहां स्वच्छता का ब्रांड अंबेसडर बनाया गया, वहीं रामबिलास शर्मा, अनिल विज और मनीष ग्रोवर सरीखे मंत्रियों ने अपने कोष से आर्थिक सहायता भी दी। पंजाब चुनाव में भी डेरे का डंका खूब बोला और कांग्रेस, अकाली, आप नेताओं ने जीत के लिए जमकर हाजिरी भरी। इसे देखते हुए अकाल तख्त ने डेरे में पहुंचे नेताओं को तलब भी किया।
दंभ चकनाचूर होते ही नेताओं ने मारी पलटी
डेरे में सिर झुकाने वाले नेता गुरमीत राम रहीम के सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद से चुप्पी साधे हुए हैं, कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। चूंकि, अब डेरामुखी कानून के शिकंजे में हैं और उसकादबदबा तहस-नहस हो चुका है।
उन्हें जहां स्वच्छता का ब्रांड अंबेसडर बनाया गया, वहीं रामबिलास शर्मा, अनिल विज और मनीष ग्रोवर सरीखे मंत्रियों ने अपने कोष से आर्थिक सहायता भी दी। पंजाब चुनाव में भी डेरे का डंका खूब बोला और कांग्रेस, अकाली, आप नेताओं ने जीत के लिए जमकर हाजिरी भरी। इसे देखते हुए अकाल तख्त ने डेरे में पहुंचे नेताओं को तलब भी किया।
दंभ चकनाचूर होते ही नेताओं ने मारी पलटी
डेरे में सिर झुकाने वाले नेता गुरमीत राम रहीम के सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद से चुप्पी साधे हुए हैं, कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। चूंकि, अब डेरामुखी कानून के शिकंजे में हैं और उसकादबदबा तहस-नहस हो चुका है।