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पीड़िता का दर्द, बोली- जुल्मी शौहर से तो उसका तलाक देना अच्छा

Wed, 12 Oct 2016 11:29 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरेली Updated Wed, 12 Oct 2016 11:29 AM IST
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victim says divorce is better than daily fights with husband in UP's bareilly

शौहर होने के गुरूर में बार-बार जुल्म करना उसकी आदत बन गई थी। 22 साल में इंतहा हो गई तो शबनम का कलेजा भी मजबूत हो गया। शबनम का कहना है कि इस निकाह को बचाने के लिए न तो कोर्ट जाना चाहती है और न मौलानाओं के सामने ही गिड़गिड़ाएगी। 

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मामला उत्तर प्रदेश के बरेली में हाफिजगंज कस्बे का है, जहां पीड़िता ने कहा कि वह बाकी जिंदगी अपने बच्चों के साथ अकेले ही गुजार लेगी। शरियत के हुक्म की पाबंद है इसलिए तलाक मंजूर है। तमाम चुनौतियां भले ही हों पर उनसे निपटने के लिए उसने मन बना लिया है।
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शबनम को उसके पति आजाद शाह ने केवल इसलिए तलाक दे दिया था कि उसने उसको गलत रास्ते पर जाने से रोका था। बीवी का फर्ज निभाते हुए वह अपने पति को नेक बनाना चाहती थी। चोरी और नशा करने से जब जब उसने पति को रोका, बदले में लात घूंसे और गालियां ही मिलीं। एक बार तो जालिम ने उसको छत से नीचे फेंक दिया। वह आज भी ठीक से चल नहीं पाती। पति ने उसी शरियत का अस्त्र बनाकर शबनम की जिंदगी तबाह कर दी। शबनम का कहना है कि उसको तलाक मंजूर है। अब किसी फतवे की भी जरूरत नहीं।

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जो भी चुनौतियां होंगी हम देख लेंगे

victim says divorce is better than daily fights with husband in UP's bareilly

शबनम के बेटे मुश्ताक ने कड़ी मेहनत से एक कमरा हाफिजगंज में बनाया। इसमें ही उसका पूरा परिवार रहता है। घर का खर्च बेटा मुश्ताक और बेटी आफरीन कढ़ाई करके उठाते हैं। वह चाहती है कि यह मकान उसको ही मिले। इसे बेचकर वह अपने बच्चों के साथ दूसरी जगह रहना चाहती है।

लड़कियों की शादी करने और रहने की समस्या अब उसके सामने खड़ी है। शरियत के हुक्म से वह एक मां का फर्ज आखिरी सांस तक निभाएगी। शबनम के दोनों भाई अकबर अली व अफसर अली की भी स्थिति इतनी बेहतर नहीं कि वह उसके परिवार को अपने घर में रख सकें। शबनम का कहना है कि परिस्थितियां चाहें जो भी रहें वह अपने बच्चों को लिए पति के सामने कभी गिड़गिड़ाएगी नहीं।

शौहर सिर्फ तीन तलाक कह कर पा लेता है मुक्ति

victim says divorce is better than daily fights with husband in UP's bareilly

शबनम की कहानी पढ़ कर कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जाहिर की है। सवाल उठाए हैं कि इन हालात में तलाक देने वालों की सजा और उन्हें रोकने के लिए भी उलमा शरियत के हवाले से कोई कायदे सामने रखें। कई संगठन उसकी मदद को आगे आने के लिए तैयार हैं बशर्तें वह अपनी इच्छा जाहिर करे कि वह क्या चाहती है।

आम औरत सेवा समिति (आस) की अध्यक्ष समयुन खान शबनम के पति आजाद की हरकत को बिल्कुल गलत बताती हैं। उन्होंने कहा कि यह भी अकसर देखने में आया है कि कोई मर्द किसी दूसरी लड़की से शादी करने के लिए पहली बीवी को सिर्फ तीन बार तलाक कह कर मुक्ति पा जाता है। इसे रोकने के लिए सख्त नियम होना चाहिए। इस तरह अपने स्वार्थ की खातिर कोई कैसे बीवी को छोड़ सकता है। फिर वह कहां जाएगी। इसके पीछे अगर कोई वजह हो तो उलमा साफ करें या इस व्यवस्था को बदल दें।

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