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राजपूत शान की खातिर चाचा ने बहू को उतारा मौत के घाट
क्राइम डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 19 Mar 2018 02:46 PM IST
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ऊषा देवी
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राजस्थान के अलवर जिले में रहने वाली एक महिला को सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसका काम करना राजपूत शान के खिलाफ था। इस घटना को अंजाम महिला के ससुर (पति के चाचा) ने दिया। मृतका की पहचान 33 साल की ऊषा देवी के तौर पर हुई है। महिला प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करके परिवार की कमाई में आधे से ज्यादा का योगदान देती थी। महिला के जेठ मोहन चौहान जो दिहाड़ी मजदूरी करते हैं उन्होंने कहा- देवी प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करके परिवार की आधे से ज्यादा कमाई दिया करती थी। परिवार ने अपना कमाने वाला खो दिया।
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15 मार्च को सभी लोगों के सामने अलवर के एनएच-8 पर दो बच्चों की मां देवी को उसके 62 साल के चाचा ससुर ममराज सिंह ने जान से मार दिया। पुलिस के अनुसार सिंह ने देवी को इसलिए मार दिया क्योंकि उनका मानना था कि महिलाओं का काम करना राजपूत शान के खिलाफ है। महिला के घर में मौजूद रिश्तेदार और पड़ोसियों का कहना है कि क्योंकि देवी खुद कभी स्कूल नहीं गई थी इसलिए वह अपने बच्चे 10 साल की तनुजा और 11 साल के धीरज की अच्छी पढ़ाई और भविष्य के लिए सबकुछ करना चाहती थी। उन्होंने बताया कि इस सपने को पूरा करने लिए उसने ऐसी दिनचर्या शुरू की जो सुबह होने से पहले ही शुरू हो जाती थी।
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देवी की बड़ी बहन बीना ने कहा- वह सुबह के पांच बजे से पहले उठकर लकड़ियां चुनने जाया करती थी ताकि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए खाना बना सके। लगभग 8 बजे उसे प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करने के लिए जाना पड़ता था और वह शाम को 6 बजे वापस आती थी। महिला के परिवार के अनुसार देवी करीब 7000 रुपए प्रतिमाह कमाती थी। कई बार उसकी कमाई अपने पति से ज्यादा होती थी।
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देवी के पति मुकेश ने बताया- लगभग 4-5 महीने पहले मेरे चाचा ने ऊषा को काम पर जाने से रोकने की कोशिश की थी और उसने उन्हें सैंडल से पीटा था। मैंने भी उन्हें डांटा था लेकिन हमने कभी यह नहीं सोचा था कि वह उसे जान से मार देंगे। एक बार जब मैंने चाचा को पत्नी का पीछा करते हुए देखा था तो उसे चेतावनी दी थी। पुलिस ने आरोपी चाचा को गिरफ्तार कर लिया है और वह इस समय न्यायिक हिरासत में है। पुलिस का कहना है कि सिंह को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। उसका कहना है कि महिलाओं का काम करना राजपूत शान के खिलाफ है।