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देवरिया मामला: आश्रय गृह के ब्लैकलिस्ट में आने के बाद भी पुलिस लड़कियों को भेजती रही

Wed, 08 Aug 2018 09:45 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला
क्राइम डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 08 Aug 2018 09:45 AM IST
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Girls repeatedly sent to shelter home by police despite state government blacklisting it in deoria

राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2017 में देवरिया के मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह को ब्लैकलिस्ट में डालने के बावजूद भी पुलिस कई जगहों से बचाव कर लाई गई महिलाओं और लड़कियों को यहां लाती रही। मामले पर देवरिया के एसपी रोहप पी केनेय ने कहा कि इसी साल अप्रैल में कार्यभार संभालने के बाद से उन्हें जिला मजिस्ट्रेट की ओर से दो पत्र मिले। जिसमें पुलिस से कहा गया कि वह बचाई गई लड़कियों को आश्रय गृह में न भेजें।

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एसपी ने कहा कि उन्होंने इसके बाद सभी पुलिस स्टेशनों को आदेश भी दिए थे लेकिन चौरी बाजार और बरहाज पुलिस स्टेशन की पुलिस ने इन आदेशों को नहीं माना। उन्होंने 26 और 27 जुलाई को किडनैपिंग के बाद बचाई गई दो लड़कियों को यहां भेजा। एसपी के सभी पुलिस स्टेशनों को दिए आदेशों से परेशान हो बालिका गृह की प्रबंधक गिरिजा त्रिपाठी ने एक हफ्ते बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। प्रबंधक ने पुलिस के आदोशों को उत्पीड़न बताया था। साथ ही गिरिजा ने दावा किया है कि आश्रय गृह के ब्लैकलिस्ट में आने के बाद भी वहां 450 लड़कियों को भेजा जा चुका है।
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जिले की बाल कल्याण समिति की सदस्य रंजना तिवारी ने कहा कि वैसे तो लड़कों के लिए जिले में एक ही चाइल्ड केयर होम है लेकिन विभिन्न जगहों से बचाई गई लड़कियों को बलिया, गोरखपुर के नारी निकेतन या फिर बनारस के केयर होम में भेजना चाहिए था। लेकिन डीएम, एसपी, बाल कल्याण बोर्ड और स्थानीय पुलिस 8 पत्र मिलने के बाद भी लगातार बचाई गई लड़कियों को गिरिजा के आश्रय गृह में भेजते रहे।   

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