'रमन राघव': बहन का रेप करने वाले सनकी सीरियल किलर की कहानी
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एक सनकी व्यक्ति की हिंसा और अपराध पर बनी अनुराग कश्यप पर की फिल्म रमन राघव2.0, जून में रिलीज हो रही है। इसमें रमन राघव की कहानी फिल्मी अंदाज में पूरे मिर्च मसाले के साथ दिखाई जाएगी ऐसा संभव है। लेकिन असली रमन राघव का चरित्र इतना वीभत्स है जिसे दिखाना किसी के लिए संभव नहीं होगा।
रमन राघव न तो कोई अंडरवर्ल्ड डॉन था और न ही किसी गैंग का सरगना या डकैत। वह एक मनोरोगी था जिसके सिर पर खून सवार था। 1929 के आसपास पुणे के बाहरी इलाके में पैदा हुआ रमन राघव खूनी मनोरोगी कैसे बना? किन परिस्थितियों ने उसे सीरियल किलर बनाया इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। लेकिन उसके अपराधों के बारे में तमाम ऐसी जानकारियां मौजूद हैं जो किसी को भी हैरान कर सकती हैं।
रमन राघव को जानने वालों ने बताया बचपन से उसे कोई खास बीमारी नहीं रही लेकिन वह चोरी बहुत करता था। अपनी इसी आदत के कारण वह पढ़ाई भी नहीं कर पाया। आगे पढ़ें, रमन राघव के अपराधों की पूरी जन्मकुंडली।
हत्या कर महिला शवों से करता था रेप
60 के दशक में बाहरी मुंबई के इलाकों एक बाद एक हत्याएं करने वाला रमन राघव 40 से ज्यादा हत्याएं की। रमन राघव ज्यादातर हत्याएं रात के वक्त करता था।
वह ज्यादातर हत्याएं उन लोगों की करता था जो झोपड़ियों रहते थे या फुटपाथ में जीवन व्यतीत करते। वह मुगदर जैसे बिना धार वाले हथियार से सो रहे लोगों पर लगातार प्रहार करके जान से मार देता था। इतना ही नहीं वह महिला शवों से रेप भी करता था।
लोगों की हत्या करने की इसी सिरीज में 1965-66 में एक मामला ऐसा मामला आया जिसमें एक बार में 19 लोगों पर जान लेवा हमला हुआ। इस हमले में 9 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी घटना के बाद रात में लोगों की हत्या करने वाले के बारे में पता चला।
घायलों में एक कृतिका नाम की महिला ने पुलिस को एक शख्स के बारे में बताया जिसकी पहचान रमन राघव के रूप में हुई। रमन राघव एक डकैती में पांच साल जेल की सजा काट चुका था। इसके अलावा उसने अपनी बहन का भी रेप किया जिसका रिकॉर्ड पुलिस के पास था।
कितनी हत्याएं की याद नहीं थी संख्या
मिली जानकारी के अनुसार कई हत्याओं में पकड़े जाने से पहले रमन राघव ने अपनी बहन का भी रेप किया था। उस पर हमला कर गंभीर रूप से घायल भी कर दिया था।
रमन राघव कई हत्याओं के बाद भी कई बार कानून के चंगुल से कई बार सिर्फ इसलिए बच निकला था कि जितने लोगों पर उसने हमला किया था उनमें जीवित बचा कोई भी व्यक्ति उसे देख नहीं पाया था।
लेकिन 1968 में एक भी फिर कई लोगों की हत्याएं हुई तो मुंबई पुलिस सीआईडी के डिप्टी कमिश्नर रमाकांत कुलकर्णी ने बड़ी संख्या में लोगों की धरपकड़ शुरू की और घेराबंदी की तो रमन राघव पकड़ में आया। पुलिस ने रमन राघव से 23 हत्याओं का जुर्म कुबूल करवाने में कामयाब हुई। कहते हैं कि वह कई हत्याएं कर चुका था लेकिन उसे ठीक यह याद नहीं था कि वह अबतक कितनी हत्याएं कर चुका है।
पुलिस की गिरफ्तारी के बाद हत्याओं के जब मामले चले तो रमन राघव का मनोरोगी होन का भी दावा किया गया। हालांकि पुलिस ने डॉक्टरों के तर्क को मानने से इनकार कर दिया।
चिकन खाने के बाद दिए सवालों के जवाब
मौजूद जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आरोपी जब अदालत में पेश किया तो उसे ने जज को किसी भी सवाल का जवाब देने से मना कर दिया। इतना ही नहीं ऐसा उसने कई बार किया। लेकिन जब पुलिस ने उसकी चिकन खाने की इच्छा पूरी कर दी तब उसने जज के सवालों के जवाब दिए।
उसने अदालत में बताया कि हथियार के तौर पर किसी चीज का इस्तेमाल करता था और कब हत्याओं को अंजाम देता था। लेकिन कुछ तरीखों के बाद रमन राघव के पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह दिमागी अक्षमता के कारण हत्याओं को अंजाम दिया है। उसे इंसान और इंसानियत के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
लेकिन पुलिस की ओर से इन तर्कों को नकार दिया गया है। इसके बाद कुछ समय बाद मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम ने रमन राघव का जेल में ही इंटरव्यू लिया और इसके आधार पर बताया कि उसे वह एक गंभीर मानसिक बीमारी पैरानॉयड सीजोफेरिया से पीड़ित है। ऐसे शख्स के खिलाफ किसी तरह की सख्त कानूनी कार्रवाई करना कानून का उल्लंघन होगा।