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Bihar Elections: टिकट बंटवारे में दिखा अनोखा मंजर, मुस्लिमों को न एनडीए ने पूछा न महागठबंधन ने ली खबर

Sat, 25 Oct 2025 08:20 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Sat, 25 Oct 2025 08:20 AM IST
सार

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए हुए टिकट बंटवारे में इस बार हैरान करने वाला मंजर सामने आया है। दरअसल, मुस्लिम प्रत्याशियों को न तो सत्ताधारी खेमे- एनडीए ने पूछा, न विपक्षी खेमे- महागठबंधन ने इनकी खबर ली। पद और टिकट दोनों मामलों में हाशिये पर रहा है। इस साल इन्हें सिर्फ 35 टिकट मिले हैं। पांच साल पहले 53 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी।

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Bihar Elections 2025 Ticket distribution Muslim candidates not consulted neither by NDA nor by mahagathbandhan
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा-मोदी हराओ के नाम पर एकजुट होने वाले बिहार के मुसलमान इस चुनाव में हाशिये पर हैं। एनडीए ने इस बिरादरी पर भरोसा करने में झिझक तो दिखाई ही, विपक्षी महागठबंधन ने भी टिकट देने में कंजूसी दिखाई। नतीजा यह हुआ कि इस चुनाव में दोनों गठबंधनों की ओर से इस बिरादरी के उतारे गए उम्मीदवारों की संख्या 35 ही है, जो बीते चुनाव की तुलना में 18 कम है।

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बीते चुनाव में विपक्षी महागठबंधन ने 33 उम्मीदवार उतारे थे। इस बार यह संख्या 30 (राजद 18, कांग्रेस 10 और सीपीआई माले 2) है। पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस ने दो और माले ने एक उम्मीदवार कम उतारा है। तब एनडीए ने 20 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इस बार यह संख्या महज पांच है। जदयू ने चार और लोजपा (आर) ने एक उम्मीदवार उतारे हैं। तब एनडीए में रही वीआईपी ने दो मुस्लिमों को टिकट दिया था। इस बार महागठबंधन में शामिल है, लेकिन इस बार पार्टी में बिरादरी का प्रतिनिधित्व भाजपा, माकपा, भाकपा की तरह शून्य है।
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एकतरफा ध्रुवीकरण बना कारण
एनडीए ने इस बिरादरी का विपक्ष के प्रति एकतरफा ध्रुवीकरण के कारण दूरी बनाई। बीते चुनाव में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दा बनने के कारण एनडीए का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया। इस बार मुस्लिम आबादी एसआईआर और वक्फ अधिनियम में संशोधन के कारण नाराज है। लोजपा, जदयू को आशंका थी कि इसके कारण इस बिरादरी के उनके उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सकेंगे, इसलिए दोनों दलों ने प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व ही दिया।
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लगातार घटा प्रतिनिधित्व
राज्य की सत्ता से राजद की विदाई के साथ ही विधानसभा में मुसलमानों के प्रतिनिधित्व में कमी आई। 2005 में इस बिरादरी के 24 विधायक थे। अक्तूबर-नवंबर में इसी साल हुए चुनाव में यह संख्या घट कर 16 रह गई। साल 2010 में 19 मुसलमान विधायक थे। 2015 के चुनाव में जदयू-राजद के साथ आने से स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और यह संख्या 24 पर पहुंची, मगर बीते चुनाव में फिर लुढ़ककर 19 पर आ गई।

महागठबंधन को सता रहा ओवैसी का डर
बीते चुनाव में विपक्षी महागठबंधन खास कर राजद को मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने बड़ा झटका देते हुए 5 सीटें जीत ली थी। इस बार ओवैसी ने 23 मुस्लिम उम्मीदवार खड़े किए हैं। इसके अलावा चूंकि मुस्लिम आबादी के भाजपा के विरोध में गोलबंद होने का सीधा लाभ विपक्ष को मिलता है, ऐसे में विपक्षी महागठबंधन ने भी टिकट में कटौती की।


दलित-मुस्लिम डिप्टी सीएम पर विचार
महागठबंधन ने राज्य की आबादी में 14 फीसदी हिस्सेदारी वाली बिरादरी के तेजस्वी यादव को सीएम, 22 उपजातियों को मिला कर 10 फीसदी हिस्सेदारी वाले मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का उम्मीदवार बनाया, मगर 17.78 फीसदी की हिस्सेदारी वाली मुस्लिम आबादी से डिप्टी सीएम के नाम पर चर्चा तक नहीं हुई। जब एआईएमआईएम इसे मुद्दा बनाने में जुट गई है तो महागठबंधन ने चुनाव बाद दलित-मुसलमान को डिप्टी सीएम बनाने के प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

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