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राजनीतिक दलों को नहीं महिलाओं पर भरोसा, टिकट देने में करते हैं कंजूसी
चुनाव डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 23 Oct 2018 12:22 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
महिलाओं को समानता का अधिकार देने के लिए अक्सर राजनेता आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन जब बात आती है चुनाव की तो यही राजनेता महिलाओं को उम्मीदवारी देने में कतराते हैं। यूं तो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी भागीदारी दिए जाने की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन आंकड़ों की मानें तो कोई भी राजनीतिक दल 10 फीसदी से ज्यादा महिलाओं को उम्मीदवार के रूप में जनता के सामने पेश नहीं करता।
हम मध्यप्रदेश के आंकड़ों से आपको रू-ब-रू करवाएंगे और बताएंगे कि वहां क्या है आधी आबादी का हाल। प्रदेश में महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच तकरीबन 20 लाख का अंतर है, पर टिकट के हिसाब से ये खाई और भी गहरी हो जाती है।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो 2003 में 199 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी थीं, जिनमें से 18 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी। 2008 में 221 महिला उम्मीदवारों मे से 21 महिलाएं जीती थीं। 2013 में 200 महिलाओं को टिकट मिला, जिनमें से 30 महिलाओं के सिर जीत का सेहरा बंधा।
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विशेषज्ञों की मानें तो राजनीति में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। बात पिछले विधानसभा चुनाव की करें तो 2013 में 200 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। भाजपा ने सर्वाधिक 28 महिलाओं पर भरोसा जताया था।
इनमें से 22 ने जीत हासिल की। वहीं, कांग्रेस ने 23 महिला प्रत्याशी उतारे। इनमें छह ने जीत हासिल की। महिलाओं को टिकट देने में बसपा भी बाकी दलों के साथ कदमताल करती नजर आई। बसपा ने 22 महिलाओं को सियासी मैदान में किस्मत आजमाने का मौका दिया और दो ने जीत दर्ज की।
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हम मध्यप्रदेश के आंकड़ों से आपको रू-ब-रू करवाएंगे और बताएंगे कि वहां क्या है आधी आबादी का हाल। प्रदेश में महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच तकरीबन 20 लाख का अंतर है, पर टिकट के हिसाब से ये खाई और भी गहरी हो जाती है।
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पिछले तीन विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो 2003 में 199 महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी थीं, जिनमें से 18 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी। 2008 में 221 महिला उम्मीदवारों मे से 21 महिलाएं जीती थीं। 2013 में 200 महिलाओं को टिकट मिला, जिनमें से 30 महिलाओं के सिर जीत का सेहरा बंधा।
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विशेषज्ञों की मानें तो राजनीति में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। बात पिछले विधानसभा चुनाव की करें तो 2013 में 200 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। भाजपा ने सर्वाधिक 28 महिलाओं पर भरोसा जताया था।
इनमें से 22 ने जीत हासिल की। वहीं, कांग्रेस ने 23 महिला प्रत्याशी उतारे। इनमें छह ने जीत हासिल की। महिलाओं को टिकट देने में बसपा भी बाकी दलों के साथ कदमताल करती नजर आई। बसपा ने 22 महिलाओं को सियासी मैदान में किस्मत आजमाने का मौका दिया और दो ने जीत दर्ज की।
