उद्धव ठाकरे को एमएलसी बनाने के लिए विवादों में घसीटे गए राज्यपाल
- राज्य में समानांतर सत्ता संचालन के मुद्दे पर बोले फडणवीस
- बोले, राज्यपाल को है अधिकारियों के साथ बैठक का अधिकार
- संजय राउत ने लगाए थे राज्यपाल पर समानांतर सत्ता चलाने के आरोप
विस्तार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को राज्यपाल द्वारा विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत किए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। सोमवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर समानांतर सत्ता संचालन के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि संभवतया उद्धव को एमएलसी मनोनीत करने का दबाव बनाने के लिए उनपर यह आरोप लगाया गया।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कांफ्रेंसिंग में बातचीत के दौरान आरोप लगाया था कि राज्यपाल कोश्यारी राज्य में मुख्यमंत्री के समानांतर सत्ता चला रहे हैं। उसके बाद एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने भी राउत के सुर में सुर मिलाया था।
इसके बाद इसको लेकर सूबे की राजनीति में चर्चा का बाजार गर्म हो गया था। सोमवार को एक न्यूज चैनल से बातचीत में फडणवीस ने कहा कि जिस दिन कैबिनेट में यह फैसला हुआ कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने के लिए राज्यपाल के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा।
उसके दूसरे दिन ही राज्यपाल पर समानांतर सत्ता चलाने का आरोप लगाया गया। इससे यह जाहिर होता है कि कदाचित उद्धव को एमएलसी मनोनीत करने के लिए राज्यपाल पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह आरोप लगाया गया। लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी।
राज्यपाल राज्य का मुखिया, अधिकारियों के साथ बैठक का है अधिकार
फडणवीस ने कहा कि राज्यपाल प्रदेश का मुखिया होता है। इस हैसियत से उन्हें अधिकारियों के साथ बैठक का अधिकार है।
कोरोना वायरस के संकट की घड़ी में राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने न सिर्फ महाराष्ट्र के अधिकारियों से बात की बल्कि अन्य राज्य के राज्यपालों से भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में कहा कि उन्हें भी अधिकारियों से चर्चा कर राज्य की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
फडणवीस ने कहा कि राज्यपाल की अधिकारियों से बातचीत में कुछ भी गलत नहीं है।
राज्यपाल के विवेक पर निर्भर है उद्धव का मनोनयन
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह राज्यपाल तय करेंगे कि उद्धव को एमएलसी मनोनीत करना है या नहीं। इस मामले में राज्यपाल कानूनविदों से राय लेकर अपने विवेक से निर्णय लेंगे। लेकिन यदि उद्धव एमएलसी बनते हैं तो उन्हें मेरी शुभकामना है।
बता दें कि आगामी 27 मई को उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बने 6 महीने हो जाएंगे। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उद्धव को 28 मई से पहले विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। अन्यथा उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर फिर से शपथ ग्रहण करना होगा।
उद्धव का एमएलसी बनना उतना आसान नही हैं
समझा जा रहा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आसानी से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत कर लिए जाएंगे। लेकिन उतना आसान नहीं लगता। फडणवीस ने कहा कि इससे पहले राज्य सरकार ने एनसीपी के दो नेताओं को एमएलसी मनोनीत करने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा था।
लेकिन उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव लौटा दिया था कि दोनो सदस्यों के रिक्त पद का कार्यकाल समाप्त होने की अवधि एक साल से कम है। इसलिए नियुक्ति नहीं की जा सकती। यह कहकर फडणवीस ने उद्धव की राह में अड़चन का भी संकेत दिया है।
नियम का हवाला देकर गुमराह कर रही है भाजपा
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि भाजपा का काम गुमराह करना है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने में राज्यपाल को कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए।
चूंकि विधान परिषद सदस्य के दोनों पद का कार्यकाल 6 जून 2020 तक है, तो इतने समय तक उद्धव ठाकरे एमएलसी हो सकते हैं। उसके बाद दूसरे विकल्प पर विचार किया जाएगा। सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा नियमों का हवाला देकर बेवजह मामले में टांग अड़ा रही है, जबकि उद्धव के एमएलसी बनने में कोई दिक्कत नहीं है।