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क्या लोहा से लोहा काटने की कमलनाथ-दिग्विजय की रणनीति होगी कामयाब?

Sun, 18 Oct 2020 11:51 AM IST
Tanuja Yadav शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 18 Oct 2020 11:51 AM IST
सार

  • कमलनाथ को लेना है ज्योतिरादित्य और शिवराज से बदला।
  • शिवराज के सामने कुर्सी और विरासत बचाने की चुनौती।
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया का सबकुछ दांव पर।

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will Kamalnath and Digvijays strategy be successful in upcoming madhya pradesh by election
कमलनाथ और दिग्विजय - फोटो : Special Arrangement

विस्तार

मुख्यमंत्री की कुर्सी दोबारा पाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह की सलाह पर लोहा से लोहा काटने की रणनीति पर चल रहे हैं। वह भी घूम फिरकर ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि उपचुनाव 28 सीटों पर हो रहा है।

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कांग्रेस जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत भाजपा में गए अपने पूर्व विधायकों को गद्दार, बिकाऊ बता रही है, वहीं पार्टी ने ग्वालियर चंबल संभाग में कभी सिंधिया के बिछाए आठ मोहरों को उतारकर उपचुनाव को दिलचस्प बना दिया है।
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शिवराज सिंह चौहान के सामने कुर्सी और विरासत बचाने की चुनौती
मध्यप्रदेश के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज सिंह चौहान राजनीति के बड़े चतुर खिलाड़ी हैं। बिना धार की छुरी से विरोधी को ऊफ करने का अवसर भी न देने वाले शिवराज के सामने इस समय कुर्सी और विरासत दोनों बचाने की चुनौती है।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया पर कांग्रेस का तीखा हमला बढ़ने के बाद भाजपा को भी शिवराज की जरूरत समझ में आई है। शिवराज भी इस सुनहरे अवसर को हथियाने में कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वह मंच पर घुटने के बल बैठकर जनता का अभिवादन कर रहे हैं तो कांग्रेस के वचन पत्र को कपट पत्र की संज्ञा दे रहे हैं।

हालांकि शिवराज से खतरनाक जहर बुझे तीर छोड़ने में भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का कोई जवाब नहीं है। नरोत्तम का भी क्षेत्र ग्वालियर चंबल संभाग ही है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी क्षेत्र के कद्दावर नेता हैं।

तंज कसने में भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रभात झा का भी जवाब नहीं है। ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों में अधिकांश को जीत लेने के बाद राज्य में शिवराज सिंह चौहान न केवल राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

कांग्रेस को उम्मीद, लोहे को लोहा काटेगा
उपचुनाव की 28 सीटों में से 12 सीटों पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्हें छह-आठ सीटें मिल सकती हैं। ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों में से वह 11-13 सीट जीत लेने का दावा कर रहे हैं। बताते हैं ग्वालियर- चंबल संभाग की 16 सीटों में आठ पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के लेफ्टिनेंट माने जाने वाले बेहद करीबी रहे कांग्रेसियों को प्रत्याशी बनाया गया है।

मुंगावली से कांग्रेस प्रत्याशी कन्हईराम लोधी को ज्योतिरादित्य ने ही जिलाध्यक्ष बनवाया था। अब वह सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर गए बृजेंद्र सिंह यादव के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। अशोक नगर से आशा दोहरे भी सिंधिया की ही विश्वासपात्र थीं और अब वह भाजपा के जजपाल सिंह को चुनौती दे रही हैं।

बमोरी से कन्हैयालाल अग्रवाल भाजपा में गए महेंद्र सिसोदिया को तो मेहगांव से हेमंत कटारे मंत्री ओपीएस भदौरिया को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के लिए सुनील शर्मा और पोहरी में हरिवल्लभ शुक्ला भाजपा के सुरेश राठखेड़ा के सामने हैं। दिमनी और मुरैना का भी यही हाल है।


हालांकि इसके सामानांतर भाजपा के नेताओं को उपचुनाव में 24-25 सीटों को जीत लेने का भरोसा है। भाजपा के नेता यदि अपने अभियान में सफल हो गए तो आगे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की लड़ाई काफी कठिन हो जाएगी। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि कमलनाथ ने अपनी देख-रेख में चुनाव की रणनीति तैयार की है।



दिग्विजय सिंह से सलाह के बाद यह रणनीति तैयार हुई है। उन्होंने प्रत्याशी के चयन से लेकर चुनाव प्रचार अभियान तक में उच्च स्तरीय सतर्कता बरती है। कई प्रोफेशनल्स की सहायता भी ली है।

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