एमपीः झाबुआ में आखिर नाक की लड़ाई में क्यों हारी भाजपा
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बिहार में जहां पूरे जोर लगाने के बाद भी भाजपा विधानसभा चुनावों में अपनी लाज नहीं बचा सकी वहीं कुछ ऐसी ही स्थिति मध्यप्रदेश की रतलाम झाबुआ लोकसभा सीट पर भी हुई। जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के जीत के लिए एडी चोटी का जोर लगाने के बावजूद भी भाजपा वहां मौजूदा सीट नहीं बचा सकी।
कांग्रेस के हाथों करारी हार के बाद जहां भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी होती दिख रही हैं वहीं राज्य में दम तोड़ती कांग्रेस पार्टी को दोबारा संजीवनी मिलने की उम्मीद की जा रही है।
भाजपा की हार के बाद यह सवाल भी खड़ा हो जाता है कि जिन उप चुनावों को पूरी तरह सत्ता पक्ष का माना जाता है और वो राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी की दशा और दिशा तय करते हैं ऐसे अहम मुकाबले में भी आखिर भाजपा कैसे इतनी आसानी से पिट गई।
रतलाम-झाबुआ की यह हार पहले से ही व्यापमं के दंश से जूझ रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए कोढ़ में खाज सरीखी हो गई है।
मोदी लहर में जीते थे भाजपा उम्मीदवार
बता दें कि रतलाम की लोकसभा सीट पर आमतौर पर कांग्रेस के क्रांतिलाल भूरिया का ही वर्चस्व रहा है। लेकिन बीते लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बूते भाजपा के दिलीप सिंह भूरिया ने क्रांतिलाल भूरिया को शिकस्त दे दी थी।
इसी बीच अचानक दिलीप सिंह भूरिया के आकस्मिक निधन के बाद यह सीट खाली हो गई। जिस पर उप चुनाव के लिए भाजपा ने दिलीप सिंह की बेटी निर्मला को टिकट देकर क्रांतिलाल भूरिया के सामने खड़ा कर दिया।
भाजपा को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की लोकप्रियता और दिलीप सिंह भूरिया की मौत से उपजी सहानभूति की लहर पर भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज कर लेगी। मुख्यमंत्री ने भी इस सीट को नाक का प्रश्न बनाते हुए यहां प्रचार के लिए एडी चोटी का जोर लगा दिया।
शिवराज सिंह ने खुद के लिए मांगे थे वोट
बताया जाता है इस सीट की आठों विधानसभाओं में घूम घूमकर मुख्यमंत्री ने छोटी बड़ी कुल 26 सभाएं की। इस दौरान उन्होंने हर जगह यह कहकर ही वोट मांगे कि इस सीट पर मैं खड़ा हूं और मुझे वोट दीजिए, लेकिन 21 तारीख को हुए मतदान में वोटरों ने उन्हें एक सिरे से खारिज कर दिया।
यहां भाजपा की क्या स्थिति रही इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 24 तारीख को हुई मतगणनना के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार क्रांतिलाल भूरिया ने भाजपा उम्मीदवार को एकतरफा मुकाबले में 88 हजार वोटों से मात दे दी।
रतलाम सीट पर जीत के बाद जहां कांग्रेस में जश्न का माहौल है वहीं भाजपा उम्मीदवारों के चेहरे उतरे हुए हैं। वहीं भाजपा की इस हार के पीछे व्यापमं घोटाले में घिरे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की गिरती साख और भाजपा कार्यकर्ताओं में आपसी खींचतान को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
