सुदर्शन-सोनी ने संघ कार्यकर्ता को दिलाई थी नौकरी
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व्यापम घोटाले की जांच में लगी सीबीआई ने गुरुवार को वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारियों द्वारा एक कार्यकर्ता को नौकरी दिलवाने के मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले में पूर्व सर संघचालक केएस सुदर्शन और वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी पर आरोप लगे थे।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार आरएसएस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे मिहिर कुमार चौधरी को साल 2012 में व्यापम के अंतर्गत भार और मापन विभाग में नियुक्ति मिली थी।
25 साल के बिहार निवासी मिहिर चौधरी को बाद में व्यापम मामले में आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया गया था। उसे मामले की जांच कर रही एसटीएफ ने उस समय गिरफ्तार किया था जब उसे पता चला कि परीक्षा के दौरान उसकी ओएमआर सीट को व्यापम के भोपाल स्थित मुख्यालय में भरा गया था।
सुदर्शन और सोनी ने की थी नौकरी की सिफारिश
हालांकि साल 2013 में उन्हें बेल मिल गई थी। बताया जाता है कि उसे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के सेवानिवृत्ति के बाद भोपाल के सुव्यवस्थित घर में छोटे मोटे काम करने के लिए रखा गया था, जिसमें केएस सुदर्शन रहते थे।
वहीं गिरफ्तार होने के बाद मिहिर चौधरी ने एसटीएफ को बताया था कि उसे नौकरी सुदर्शन और सुरेश सोनी की सिफारिश पर मिली थी। उसका बयान साल 2013 में दर्ज किया गया था, जिसे कोर्ट में पेश भी कियाा गया।
लेकिन उसके सात महीने बाद यह सामने आया। जबकि सुदर्शन की मौत मामले पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही सितंबर 2012 में हो चुकी थी। वहीं सोनी ने बाद में लीक दस्तावेज के पीछे किसी साजिश की बात कहकर चुप्पी साध ली थी।
एसटीएफ ने दे दी थी दोनों को क्लीनचिट
वहीं इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए एसटीएफ ने 28 जून 2014 को मामले में सुदर्शन और सोनी दोनों को क्लीन चिट दे दी थी। वहीं व्यापम की जांच कर रही सीबीआई ने अभी तक 38 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
जिनमें व्यापम के परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी और सिस्टम एनालिस्ट नितिन मोहिंद्रा का नाम भी शामिल है। इसके अलावा सीबीआई ने मामले में रामेन्द्र सिंह भदौरिया और दीपक जैन की मौत के मामले में भी प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।
