व्यापम: सीबीआई की नई एफआईआर से एमपी की सियासत में हलचल
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व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने हाल में एक नई एफआईआर दर्ज कर मध्य प्रदेश के सियासी तबके में हलचल पैदा कर दी है।
देश के सबसे चर्चित घोटाले और इससे जुड़ी मौतों के मामले में सीबीआई अब तक 15 एफआईआर और सात पीई (प्राथमिक जांच) दर्ज कर चुकी है, लेकिन सर्वाधिक चर्चा में परिवहन आरक्षकों की भर्ती परीक्षा के बारे में दर्ज की गई एफआईआर है।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई परिवहन आरक्षकों के मामले में कुछ ऐसे सवालों के जवाब तलाशेगी, जो राज्य सरकार के लिए दिक्कत का कारण बन सकते हैं। जैसे कि प्रारंभिक अधिसूचना के तहत 198 खाली पदों पर भर्ती होनी थी, लेकिन 332 उम्मीदवारों का चयन कैसे हो गया।
फिजिकल टेस्ट में छूट क्यों दी गई और मध्य प्रदेश के बाहर के उम्मीदवारों का चयन किस आधार पर कर लिया गया। बता दें कि परिवहन आरक्षकों की भर्ती 2012 में हुई थी और जुलाई 2013 में व्यापम घोटाले की जांच शुरू करने के बाद एसटीएफ ने अक्तूबर 2014 में एफआईआर दर्ज की थी।
इस मामले में एसटीएफ पर दबाव में काम करने का आरोप लगता रहा है। इसी के चलते एफआईआर दर्ज करने में विलंब हुआ और जांच में भी सुस्ती बरती गई।
परिवहन आरक्षक परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगा था और कांग्रेस ने महाराष्ट्र के गोंदिया का नाम लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरने की कोशिश की थी। गोंदिया दरअसल शिवराज की ससुराल है।
सीबीआई को खत लिखा, सुप्रीम कोर्ट भी भेजा
इधर इस मामले में सीबीआई के एफआईआर दर्ज करते ही कांग्रेस ने एक पत्र लिखकर एसटीएफ की भूमिका पर कुछ सवाल उठाए हैं और एक दर्जन बिंदुओं पर सीबीआई का ध्यानाकर्षित किया है।
इस पत्र की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भी भेजी गई है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने बताया कि परिवहन आरक्षक के पद पर चुने जाने के बावजूद जिन 17 लोगों ने सर्विस ज्वाइन नहीं की, उनसे एसटीएफ ने पूछताछ नहीं की। इस तरह के और भी सवाल हैं, जो सीबीआई के संज्ञान में लाए गए हैं।
