{"_id":"65aa669f7ca66592f70a0eab","slug":"ram-mandir-footprints-of-lord-ram-are-present-at-shri-ram-charan-teerth-dham-in-vidisha-2024-01-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Ram Mandir: विदिशा के श्रीराम चरण तीर्थ धाम पर प्रभु राम के पद चिन्ह हैं मौजूद, जानिए क्या है मंदिर की मान्यता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ram Mandir: विदिशा के श्रीराम चरण तीर्थ धाम पर प्रभु राम के पद चिन्ह हैं मौजूद, जानिए क्या है मंदिर की मान्यता
Fri, 19 Jan 2024 05:40 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, विदिशा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, विदिशा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 19 Jan 2024 05:40 PM IST
सार
विदिशा में चरण तीर्थ एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। खास बात यह है कि यहां भगवान राम के स्वरूप की पूजा नहीं होती है बल्कि उनके चरणों की पूजा की जाती है।
विज्ञापन
विदिशा में स्थित श्रीराम चरण तीर्थ धाम
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में भी राम गमन के निशान होने की मान्यता है। वनवास के दौरान भगवान श्री राम मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों से गुजरे थे, माना जाता है कि इस दौरान वे विदिशा से भी होकर दक्षिण दिशा में गए थे। यहां भगवान के पदचिह्न हैं, जो आज चरणतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर च्वयन ॠषि का अस्थाई आश्रम था और यहीं ॠषि तपस्या करते थे।
विदिशा में चरण तीर्थ एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। चरण तीर्थ बेतवा नदी के बीच में स्थित एक टापू है। इस टापू में शंकर जी का प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर दो मंदिर बने हुए हैं। दोनों ही मंदिर बहुत सुंदर है। खास बात यह है कि यहां भगवान राम के स्वरूप की पूजा नहीं होती है बल्कि उनके चरणों की पूजा की जाती है। मंदिर के पुजारी संजय पुरोहित महाराज बताते हैं इस जगह के बारे में कहा जाता है कि यहां पर श्री राम जी के चरण पड़े थे, इसलिए चरण तीर्थ के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और इसका आकार शंकर जी की पिंडी के आकार के समान है। यहां आपको श्री राम जी की चरण पादुका स्वरूप की पूजा होती है।
विज्ञापन
विदिशा में चरण तीर्थ एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। चरण तीर्थ बेतवा नदी के बीच में स्थित एक टापू है। इस टापू में शंकर जी का प्राचीन मंदिर देखने के लिए मिलता है। यहां पर दो मंदिर बने हुए हैं। दोनों ही मंदिर बहुत सुंदर है। खास बात यह है कि यहां भगवान राम के स्वरूप की पूजा नहीं होती है बल्कि उनके चरणों की पूजा की जाती है। मंदिर के पुजारी संजय पुरोहित महाराज बताते हैं इस जगह के बारे में कहा जाता है कि यहां पर श्री राम जी के चरण पड़े थे, इसलिए चरण तीर्थ के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है और इसका आकार शंकर जी की पिंडी के आकार के समान है। यहां आपको श्री राम जी की चरण पादुका स्वरूप की पूजा होती है।
विज्ञापन
Trending Videos
श्री राम जी की चरण पादुका स्वरूप की पूजा होती है।
- फोटो : सोशल मीडिया
सूबेदार को आया था स्वप्न, फिर बनवाया था मंदिर
पुरोहित जी बताते हैं कि यहां महाराष्ट्रीयन शैली के दो मंदिर हैं। इसी जगह को चरणतीर्थ कहा जाता है। चरणतीर्थ पर शिवजी के दो विशाल मंदिर भी बने हैं। इनमें से एक मंदिर मराठों के सेनापति और भेलसा के सूबा खांडेराव अप्पाजी ने 1775 में बनवाया था। दूसरा मंदिर उनकी बहन ने बनवाया था। दोनों मंदिरों में शिवलिंग स्थापित किए गए थे। कहा जाता है कि उन्हें स्वप्न में भगवान ने कहा था कि इस स्थान के पास देवालय का निर्माण करवाओ, तब उन्होंने यहां चरण तीर्थ पर शिव मंदिर का निर्माण कराया।
पुरोहित जी बताते हैं कि यहां महाराष्ट्रीयन शैली के दो मंदिर हैं। इसी जगह को चरणतीर्थ कहा जाता है। चरणतीर्थ पर शिवजी के दो विशाल मंदिर भी बने हैं। इनमें से एक मंदिर मराठों के सेनापति और भेलसा के सूबा खांडेराव अप्पाजी ने 1775 में बनवाया था। दूसरा मंदिर उनकी बहन ने बनवाया था। दोनों मंदिरों में शिवलिंग स्थापित किए गए थे। कहा जाता है कि उन्हें स्वप्न में भगवान ने कहा था कि इस स्थान के पास देवालय का निर्माण करवाओ, तब उन्होंने यहां चरण तीर्थ पर शिव मंदिर का निर्माण कराया।
