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उमरिया: बाघों के कॉरिडोर के करीब कोयला खदान को मंजूरी, जीतू पटवारी ने मोहन सरकार को घेरा
Wed, 23 Sep 2026 11:30 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 11:30 PM IST
सार
वेस्ट ऑफ शहडोल साउथ अंडरग्राउंड कोल माइन को पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश हुई है। जुलाई के बाद यह कॉरिडोर के पास चौथी परियोजना बताई गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उमरिया में बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर के आसपास कोयला खनन परियोजनाओं को मिली मंजूरियों पर सवाल उठाए हैं।
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जीतू पटवारी
विस्तार
बांधवगढ़ से अचानकमार तक फैले बाघों के महत्वपूर्ण प्राकृतिक गलियारे के आसपास लगातार कोयला खनन परियोजनाओं को मिल रही मंजूरियों को लेकर मध्यप्रदेश में सियासत गरमा गई है। उमरिया जिले में प्रस्तावित वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से कई तीखे सवाल पूछे हैं।
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पटवारी ने अपने पोस्ट में बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर को बाघों की आवाजाही और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना बाघों की दीर्घकालिक आबादी और आनुवंशिक विविधता के लिए जरूरी है। उनका सवाल है कि जब यह क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है, तो इसके आसपास खनन परियोजनाओं को लगातार मंजूरियां कैसे मिल रही हैं।
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चार महीने में चार खदानों का मुद्दा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले चार महीनों में कॉरिडोर के आसपास चार कोयला खनन परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जुलाई 2026 के बाद इस क्षेत्र के आसपास चार परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी की दिशा में महत्वपूर्ण स्वीकृति मिली है। इनमें पाथोरा ईस्ट करीब 1.5 किलोमीटर, मरवाटोला VII महज 53 मीटर, अर्जुनी वेस्ट करीब 3.9 किलोमीटर और अब वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) करीब 6 किलोमीटर दूरी पर बताई गई है। इन दूरियों को लेकर पटवारी ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर बाघों के कॉरिडोर से लगातार कम होती दूरी को लेकर सरकार की नीति क्या है।
1400 हेक्टेयर से ज्यादा का खनन पट्टा
वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन परियोजना को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार इसका खनन पट्टा क्षेत्र 1400 हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 960 हेक्टेयर से ज्यादा वनभूमि शामिल बताई गई है। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 8 और 9 सितंबर की बैठकों में परियोजना को आवश्यक शर्तों और दस्तावेजों की पूर्ति के आधार पर पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की गई।
पटवारी ने पूछा, एनटीसीए की चेतावनी का क्या हुआ?
पटवारी ने अपने X पोस्ट में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए का हवाला देते हुए सरकार से पूछा कि यदि बाघों के कॉरिडोर की कनेक्टिविटी को खतरे के रूप में देखा गया है, तो उसके आसपास खनन की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से एनटीसीए से जुड़ी चेतावनियों और संबंधित रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार को विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
वहीं उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि बांधवगढ़-अचानकमार कॉरिडोर दो महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्यों को जोड़ने वाला क्षेत्र है और ऐसे गलियारे बाघों की आवाजाही तथा आबादी के बीच आनुवंशिक संपर्क बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।
अब सवाल सिर्फ एक नई कोयला खदान का नहीं, बल्कि उमरिया के जंगलों, बाघों की आवाजाही और खनन गतिविधियों के बीच बढ़ते टकराव का है। कांग्रेस के इस हमले के बाद निगाहें सरकार और संबंधित पर्यावरणीय एजेंसियों के जवाब पर टिक गई हैं। खासकर यह सवाल चर्चा में है कि कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर तय मानकों के बीच इन परियोजनाओं को मंजूरी देने का आधार क्या रहा और वन्यजीव संरक्षण के लिए जमीन पर कौन-कौन से ठोस उपाय किए जाएंगे।
