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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Uma accepts Pt. Mishra's challenge: climbing Raisen Fort will perform Jalabhishek in closed Shiva temple, letter sent to collector

उमा ने स्वीकारी पं. मिश्रा की चुनौती: रायसेन किले पर चढ़कर बंद शिव मंदिर में करेंगी जलाभिषेक, कलेक्टर को भेजा पत्र

Thu, 07 Apr 2022 01:59 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 07 Apr 2022 01:59 PM IST
सार

रायसेन के दशहरा मैदान पर 3 अप्रैल से श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया गया है। इसी कथा से चर्चा में आए शिव मंदिर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ट्वीट किए हैं। उमा भारती 11 अप्रैल को इसी मंदिर में जलाभिषेक करेंगी। इसकी सूचना कलेक्टर तक पहुंचा दी गई है।
 

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Uma accepts Pt. Mishra's challenge: climbing Raisen Fort will perform Jalabhishek in closed Shiva temple, letter sent to collector
उमा भारती 11 अप्रैल को रायसेन के शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रायसेन किले में बंद शिव मंदिर मामले में उमा भारती की एंट्री हो गई है। पं. प्रदीप मिश्रा की मंदिर खोलने की अपील के बाद उमा सक्रिय हुई हैं। उमा भारती 11 अप्रैल को इसी मंदिर में जलाभिषेक करेंगी। इसकी सूचना कलेक्टर तक पहुंचा दी गई है।
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बता दें कि मध्य प्रदेश के रायसेन में 12वीं सदी में बना सोमेश्वर महादेव मंदिर है। यह सिर्फ महाशिवरात्रि पर खुलता है। अन्य दिनों में इस पर ताला लटका रहता है। इस वजह से सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा ने रायसेन में कहा था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य में 'शिव' कैद में है। ऐसे में कैसे कोई सुखी हो सकता है? देवों के देव महोदव देश की आजादी के बाद से कैद में है। धिक्कार है रायसेनवासियों, जो आज तक उन्हें बाहर नहीं ला सके। शिव मंदिर पर ताला डला है और आप लोग दीवाली मना रहे हो। यह सबके लिए शर्म की बात है। देश आजाद हो गया है, लेकिन आज तक मेरा शंकर आजाद नहीं हुआ।
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छलका उमा का दर्द
इसके बाद मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा है कि यह मान्यता है कि नवरात्रि के तुरंत बाद के पहले सोमवार को शिव जी का अभिषेक करना चाहिए। मैं शिव जी के किसी सिद्ध स्थान को तलाश ही रही थी कि नवरात्रि के बाद के 11 अप्रैल सोमवार को गंगोत्री से लाए हुए गंगाजल से अभिषेक करूं। मध्य प्रदेश के एक प्रतिष्ठित अखबार से रायसेन में कथा कर रहे पंडित प्रदीप मिश्रा जी के हवाले से यह जानकारी मिली कि रायसेन के किले में एक ऐसा सिद्ध शिवलिंग है।
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उमा भारती ने कहा कि रायसेन के किले के नाम से ही मेरे अंतः में हूक उठती है। विश्व प्रसिद्ध प्रामाणिक इतिहासकार  Abraham Eraly ने अपनी पुस्तक Emperors of the Peacock Throne में लिखा है कि किस तरह से रायसेन के राजा पूरणमल शेरशाह सूरी के विश्वासघात के शिकार हुए। किले के चारों तरफ घेरा डालकर शेरशाह सूरी ने राजा पूरणमल से संधि कर ली, फिर उनके परिवार एवं उनके सहायकों के टेंट को शेरशाह सूरी ने अपने अफगान सैनिकों के साथ घेर लिया तथा रात में राजा पूरणमल को घेर कर मार डाला। राजा पूरणमल बहुत बहादुरी से लड़े, मरने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी रानी रत्नावली के अनुरोध पर उनकी गर्दन काट दी ताकि वे वहशियों के शिकंजे में ना आ पाएं, किंतु उनके दो मासूम बेटे एवं अबोध कन्या टेंट में एक कोने में दुबक गए, जहां से उनको इन वहशियों ने खींच कर निकाला। दोनों मासूम बेटे वहीं काट दिए गए एवं राजा पूरणमल की अबोध कन्या वैश्यालय को सौंप दी जहां वह दुर्दशा का शिकार होकर मर गई। जब भी मैं रायसेन के किले के आस पास से गुजरी यह प्रसंग मुझे याद आता था एवं बहुत दुःखी एवं शर्मिंदा होती थी।



कहा- पहले नहीं थी शिवलिंग होने की जानकारी
पूर्व सीएम ने कहा कि जब डॉ. प्रभुराम चौधरी के चुनाव प्रचार में मैंने एवं शिवराज जी ने रायसेन में एक साथ सभा की थी तब मैंने रायसेन के किले की ओर देखते हुए यह बात कही थी कि इस किले को देखकर मुझे बहुत कष्ट होता है और आज जब हमारा भाजपा का झंडा इसके सामने फहरा रहा है तो कुछ शांति होती है। राजा पूरणमल के साथ हुई घटना नीचता, विश्वासघात एवं वहशीपन की याद दिलाती है। मुझे अपनी इस अज्ञानता पर शर्मिंदगी है कि मुझे उस प्राचीन किले में सिद्ध शिवलिंग होने की जानकारी नहीं थी।

 
सोमवार को पहुंचेंगी
उमा भारती ने कहा कि मैंने अपने कार्यालय से कल कहा था कि रायसेन जिला प्रशासन को 11 अप्रैल, सोमवार को मेरे वहां जल चढ़ाने की सूचना दें। जब मैं 11 अप्रैल को उस सिद्ध शिवलिंग पर गंगोत्री से लाया हुआ गंगाजल चढ़ाऊंगी। तब राजा पूरणमल, उनकी पत्नी रत्नावली, उनके मार डाले गए दोनों मासूम बेटे एवं वहशी दुर्दशा की शिकार होकर मर गई अबोध कन्या एवं उन सबके साथ मारे गए राजा पूरणमल के सैनिकों का मैं तर्पण करूंगी एवं अपनी अज्ञानता के लिए क्षमा मांगूंगी।
 

क्यों ताले में बंद हैं महादेव?
सोमेश्वर महादेव मंदिर और मस्जिद को लेकर विवाद है। पुरातत्व विभाग ने मंदिर पर ताले डाल रखे हैं। 1974 तक तो मंदिर में प्रवेश तक बंद था। तब एक बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय के मुख्यमंत्री और दिवंगत कांग्रेस नेता प्रकाशचंद सेठी ने खुद किला पहाड़ी स्थित मंदिर के ताले खुलवाए थे। महाशिवरात्रि पर एक बड़ा मेला आयोजित हुआ। तब से साल में एक बार महाशिवरात्रि पर ताला खोलने की परंपरा शुरू हुई।
 
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