फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain News ›   Ujjain Mahakal: Deep Utsav started in the court of Baba Mahakal, Dhanteras worship was done

Ujjain Mahakal: बाबा महाकाल के दरबार में हुई दीप उत्सव की शुरुआत, सुख-समृद्धि की कामना को लेकर हुआ धनतेरस पूजन

Fri, 10 Nov 2023 08:11 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 10 Nov 2023 08:11 AM IST
सार

Ujjain Mahakal: 10 नवम्बर को मंदिर में धनतेरस मनाया गया। इस दिन मंदिर के पुरोहित परिवार द्वारा सुबह भगवान का अभिषेक पूजन किया गया। इस दिन पुरोहित समिति द्वारा देश में सुख, समृद्धि व अरोग्याता की कामना से भगवान महाकाल का अभिषेक-पूजन किया गया।

विज्ञापन
Ujjain Mahakal: Deep Utsav started in the court of Baba Mahakal, Dhanteras worship was done
महाकाल मंदिर में दीप उत्सव की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाकाल मंदिर में रमा एकादशी पर पारंपरिक दीपोत्सव का  गर्भगृह और नंदीहाल में दीप जलाकर आगाज किया गया, जिसके बाद आज (शुक्रवार) सुबह श्री महाकाल मंदिर में धनतेरस का पर्व मनाया गया। परंपरानुसार धनतेरस पर सुबह सभी पुजारी-पुरोहित समिति द्वारा भगवान का अभिषेक व पूजन अर्चन किया गया। इस दौरान पूजन में मंदिर समिति के अध्यक्ष व कलेक्टर मंदिर समिति के प्रशासक व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। दीपावली उत्सव के तहत सुबह धनतेरस पर्व पर श्री महाकालेश्वर मंदिर पुरोहित समिति के तत्वावधान में सुबह भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अभिषेक किया गया। रविवार 12 नवंबर को सुबह रूप चौदस पर भगवान महाकाल को अभ्यंग स्नान करवाया जाएगा, इस दौरान बाबा को हल्दी, चंदन, इत्र, सुगंधित द्रव्य से स्नान होगा। पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को उबटन लगाएंगी। इसके साथ ही बाबा को गर्म जल से स्नान प्रारंभ होगा।
विज्ञापन


बाबा महाकाल के आंगन में सबसे पहले मनाया जाता है पर्व
उज्जैन शहर की परंपरा है कि यहां पर दीपावली की शुरुआत भगवान महाकाल के मंदिर से होती है। सबसे पहले यहां आयोजन होते हैं, उसके बाद शहर में दीपावली महोत्सव प्रारंभ होता है। पं. महेश पुजारी ने बताया कि रमा एकादशी से शाम से महाकाल मंदिर में दीप प्रज्जवलन का सिलसिला शुरू हो गया, जो दीपावली तक चलेगा। दीप प्रज्जवलन गर्भगृह और नंदीहाल से प्रारंभ हुआ। इसके बाद मंदिर परिसर में स्थित अन्य मंदिरों में भी दीपों का प्रज्जवलन किया गया।
विज्ञापन


धनतेरस के पूजन में आज यह हुआ
10 नवम्बर को मंदिर में धनतेरस मनाया गया। इस दिन मंदिर के पुरोहित परिवार द्वारा सुबह भगवान का अभिषेक पूजन किया गया। इस दिन पुरोहित समिति द्वारा देश में सुख, समृद्धि व आरोग्यता की कामना से भगवान महाकाल का अभिषेक-पूजन किया गया। पं. महेश गुरु ने बताया कि भगवान को सुख-समृद्धि के लिए चांदी का सिक्का अर्पित कर पूजा-अर्चना की गई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गर्म जल से शुरू होगा बाबा महाकाल का स्नान
रूप चतुर्दशी पर पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को केसर चंदन का उबटन लगाएंगी। पुजारी भगवान को गर्म जल से स्नान कराएंगे। कर्पूर से आरती होगी। साल में एक दिन रूप चतुर्दशी पर पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान का रूप निखारने के लिए उबटन लगाकर कर्पूर आरती करती हैं। स्नान के बाद महाकाल को नए वस्त्र, सोने चांदी के आभूषण धारण कराकर आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद अन्नकूट भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की जाएगी। भस्म आरती में पुजारी केसर, चंदन का उबटन लगाकर भगवान को गर्म जल से स्नान कराएंगे। सोने चांदी के आभूषण से आकर्षक श्रृंगार कर नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे। इसके बाद अन्नकूट का महाभोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की जाएगी। शाम को दीपोत्सव अंतर्गत समृद्धि के दीप जलाए जाएंगे।

12 नवंबर को दीपावली, गोवर्धन पूजन 14 को
12 नवंबर को सुबह रूप चौदस और शाम को दीपावली पर्व मनेगा। भस्मारती से रात 10:30 बजे शयन आरती तक नियमित पांच आरतियों में फुलझड़ी चलाई जाएगी। भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। अगले दिन 13 नवंबर को सोमवती अमावस्या रहेगी। 14 नवंबर को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर मंदिर के मुख्य द्वार पर पुजारी परिवार की महिलाएं गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा-अर्चना करेगी। इसके बाद चिंतामन स्थित मंदिर की गोशाला में गोवंश की पूजा-अर्चना की जाएगी।


माँ गजलक्ष्मी का हुआ दुग्धाभिषेक
नईपेठ स्थित माता गजलक्ष्मी मंदिर में धनतेरस से दीपावली उत्सव प्रारंभ हो गया है। मंदिर के पुजारी पं.राजेश शर्मा ने बताया धनतेरस से दीपावली तक तीन दिन सुबह 8 बजे से माता गजलक्ष्मी का दुग्धाभिषेक होगा। दीपावली के दिन 2100 लीटर दूध से अभिषेक किया जाएगा। दिन में माता का विशेष श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद हवन होगा। शाम को छप्पन पकवानों का भोग लगाकर महाआरती की जाएगी। सुबह से रात 2 बजे तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहेगा। महिलाओं को सौभाग्य कुमकुम व प्रसादी बांटी जाएगी। मान्यता है कि प्राचीन गजलक्ष्मी माता की आराधना करने से धन धान्य की प्राप्ती होती है। माँ गजलक्ष्मी राजा विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी के रूप में यहां विराजित है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed