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Ujjain: चुटीले व्यंग्य भरे 'नाक' नाटक का हुआ मंचन, बताया गया एक बार नाक कटने के बाद फिर कैसे मिलता है सम्मान

Tue, 09 Jan 2024 09:41 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 09 Jan 2024 09:41 PM IST
सार

चुटीले व्यंग्य से भरे नाटक नाक का मंचन हुआ। नाटक में बताया गया कि एक बार नाक कटने के बाद फिर कैसे सम्मान मिलता है।

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Ujjain A satirical play named Naak was staged in Pandit Suryanarayan Vyas Sankul
नाक नामक नाटक का हुआ मंचन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उज्जैन में कालिदास संस्कृत अकादमी के पंडित सूर्यनारायण व्यास संकुल में परिष्कृति सामाजिक सांस्कृतिक संस्था और बाल मंच के संयुक्त तत्वावधान में नट रंग भूमि सोसाइटी मुंबई द्वारा विश्व प्रसिद्ध लेखक निकोलोई गोगोल की कहानी दनोज पर आधारित नाटक नाक की प्रस्तुति हुई। इसमें चुटीले व्यंग्य के माध्यम से नाटक नाक का मंचन हुआ। नाटक का रूपांतरण मनोज मिश्रा लखनऊ बीएनए का रहा और निर्देशक मनीष राजाशिर्के थे।

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बाबा योगेंद्र के 100वें जन्मदिन के अवसर मुख्य वक्ता संस्कार भारती की अखिल भारतीय नाट्य विधा के सह संयोजक श्रीपाद जोशी ने कर्मयोगी बाबा योगेंद्र की समर्पित कला साथना के बारे बताया। कालिदास संस्कृत अकादमी के निर्देशक डॉ गोविंद गंधे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बाबा के साथ बीते प्रसंग को साझा किया। संस्कार भारती मालवा प्रांत महामंत्री संजय शर्मा ने बाबा के संस्कार भारती को दिए अवदान की चर्चा की। इसके बाद नाक नाटक की प्रस्तुति हुई, जिसमें आत्म-मुग्ध नौकरशाह नागेश नागवेकर एक दिन सुबह उठे तो उन्हें पता चला कि उनकी नाक उनके चेहरे से हट गई है।
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भयभीत होकर, वह नाक की तलाश करता है और पाता है कि वह एक उच्च पदस्थ नौकरशाह के कपड़े पहनकर शहर में घूम रही है। शर्मिंदगी की एक श्रृंखला और पुलिस और एक अखबार से मदद पाने के असफल प्रयासों के बाद, नागेश नागवेकर घर लौट आए। उसे नागेश नागवेकर के घर ले आता है, लेकिन वह उसे दोबारा नहीं जोड़ पाता।
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अंतत: एक दिन, नाक चमत्कारिक ढंग से उसके चेहरे पर फिर से जुड़ जाती है और नागेश नागवेकर अपना पिछला व्यर्थ जीवन नए सिरे से जारी रखता है। बिल्लू (डॉ. निखिल राजेशिर्के) और पिल्लू (गौरव सविता) के सशक्त अभिनय पूरा माहोल बांध कर रखा। संगीत और रोशनी (मनीषशिर्के) के साथ कैसे हुए निर्देशन ने नाटक अंतरंग व्यंग्य को बेहतरीन तरीके से उभारा। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश सूर्यवंशी ने किया और परिष्कृति के सचिव शुभम सत्यप्रेमी ने सभी का आभार माना।

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