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Ujjain: घट स्थापना से नवरात्रि की शुरुआत, मंदिरों में उमड़ी भीड़, यहां हर दिन होंगे मां के अलग स्वरूप के दर्शन
Thu, 03 Oct 2024 12:30 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2024 12:30 PM IST
सार
शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर के पुजारी रामचंद्र गिरी ने बताया कि माता की आराधना का पर्व नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी।
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घट स्थापना से नवरात्रि की शुरुआत।
विस्तार
देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो चुका है। आज सुबह मंदिरों में माता की घटस्थापना के साथ पूजन-अर्चन कर महाआरती की गई। इसके बाद भक्तों ने माता के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आज सभी माता मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।
शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर के पुजारी रामचंद्र गिरी ने बताया कि माता की आराधना का पर्व नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। घटस्थापना के बाद माता का विशेष श्रृंगार कर दर्शन के लिए भक्त पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। पुजारी रामचंद्र गिरी ने बताया कि नवरात्र के नौ दिन गर्भगृह में दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद रहेगा। नौ दिन तक माता का नित्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर की परंपरा अनुसार नवरात्र के नौ दिन शयन आरती नहीं होगी। रात्रि में विशेष अभिषेक व पूजन किया जाएगा। सुबह 7 बजे और शाम को 7 बजे आरती होगी। नवरात्र में प्रतिदिन शाम को 7 बजे भक्तों के सहयोग से दीपमालिका प्रज्ज्वलित की जाएगी।
52 शक्तिपीठों में से एक है हरसिद्धि माता मंदिर
हरसिद्धि मंदिर में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। यह देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अग्निदाह किया था, तब शिव जी उनके शव को लेकर चले। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। उज्जैन में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, जिसके कारण यहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई और इसे हरसिद्धि मंदिर के नाम से जाना जाता है। माता हरसिद्धि श्रीयंत्र पर विराजमान हैं और भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें "हरसिद्धि" कहा जाता है।
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शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर के पुजारी रामचंद्र गिरी ने बताया कि माता की आराधना का पर्व नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। आज सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। घटस्थापना के बाद माता का विशेष श्रृंगार कर दर्शन के लिए भक्त पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। पुजारी रामचंद्र गिरी ने बताया कि नवरात्र के नौ दिन गर्भगृह में दर्शनार्थियों का प्रवेश बंद रहेगा। नौ दिन तक माता का नित्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर की परंपरा अनुसार नवरात्र के नौ दिन शयन आरती नहीं होगी। रात्रि में विशेष अभिषेक व पूजन किया जाएगा। सुबह 7 बजे और शाम को 7 बजे आरती होगी। नवरात्र में प्रतिदिन शाम को 7 बजे भक्तों के सहयोग से दीपमालिका प्रज्ज्वलित की जाएगी।
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52 शक्तिपीठों में से एक है हरसिद्धि माता मंदिर
हरसिद्धि मंदिर में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। यह देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अग्निदाह किया था, तब शिव जी उनके शव को लेकर चले। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। उज्जैन में माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, जिसके कारण यहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई और इसे हरसिद्धि मंदिर के नाम से जाना जाता है। माता हरसिद्धि श्रीयंत्र पर विराजमान हैं और भक्तों को हर प्रकार की सिद्धि प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें "हरसिद्धि" कहा जाता है।
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