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MP News: सात साल बाद फिर शुरू हो सकते हैं छात्रसंघ के चुनाव, मोहन यादव के सीएम बनने से बनी उम्मीद
Wed, 17 Jan 2024 04:02 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 17 Jan 2024 04:02 PM IST
सार
बीते सात सालों से बंद पड़े छात्रसंघ चुनाव इस बार से फिर शुरू हो सकते हैं। इस बार चुनाव की संभावना इसलिए है, क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए प्रस्ताव तैयार कराया था और मुख्यमंत्री को भेजा था। इस बार वे खुद मुख्यमंत्री हैं।
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Student Union Election
विस्तार
मध्यप्रदेश में सात साल के बाद इसबार छात्र संघ के चुनाव हो सकते हैं। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2024-25 की गाइडलाइन तैयार करना शुरू कर दिया है। इस बार चुनाव की संभावना इसलिए है, क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए प्रस्ताव तैयार कराया था और मुख्यमंत्री को भेजा था। इस बार वे खुद मुख्यमंत्री हैं, इसिलिए लोकसभा चुनाव के बाद छात्रसंघ के चुनाव होने की पूरी संभावनाएं दिख रही हैं।
सोर्स के मुताबिक उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चुनाव के लिए 15 दिन का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। पिछली बार उच्च शिक्षा विभाग ने निजी और सरकारी कॉलेज में अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए थे इसको ना तो छात्र संगठन ने माना था और न ही तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री स्वयं मोहन यादव ने इसका समर्थन किया था। उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने को लेकर सरकार को पत्र भी लिखा था। इस संबंध में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा भी कर चुके थे, लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में कॉलेज का कोई भी छात्र छात्रसंघ का चुनाव लड़ सकता है।
इस चुनाव में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, सचिव एवं अन्य पदों के चुनाव होते हैं तथा विश्वविद्यालय का एक प्रतिनिधि बनता है और यह विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को चुनते हैं। छात्रसंघ चुनाव में मारपीट और उपद्रव अधिक होता है इसलिए कई सालों से प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ के चुनाव बंद पड़े हैं और इससे राजनीतिक संगठनों के युवा नेता तैयार नहीं हो पा रहे हैं। इन्हीं सभी बातों को देखकर इस बार प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की योजना राज्य सरकार बना रही है।
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सोर्स के मुताबिक उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चुनाव के लिए 15 दिन का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। पिछली बार उच्च शिक्षा विभाग ने निजी और सरकारी कॉलेज में अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए थे इसको ना तो छात्र संगठन ने माना था और न ही तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री स्वयं मोहन यादव ने इसका समर्थन किया था। उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने को लेकर सरकार को पत्र भी लिखा था। इस संबंध में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा भी कर चुके थे, लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया। प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में कॉलेज का कोई भी छात्र छात्रसंघ का चुनाव लड़ सकता है।
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इस चुनाव में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, सचिव एवं अन्य पदों के चुनाव होते हैं तथा विश्वविद्यालय का एक प्रतिनिधि बनता है और यह विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को चुनते हैं। छात्रसंघ चुनाव में मारपीट और उपद्रव अधिक होता है इसलिए कई सालों से प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ के चुनाव बंद पड़े हैं और इससे राजनीतिक संगठनों के युवा नेता तैयार नहीं हो पा रहे हैं। इन्हीं सभी बातों को देखकर इस बार प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की योजना राज्य सरकार बना रही है।
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