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MP Election 2023: बड़नगर विधानसभा में हुए सबसे ज्यादा मतदान ने सभी को चौंकाया, जानिए क्या रही खास वजह
Mon, 20 Nov 2023 11:19 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 20 Nov 2023 11:19 AM IST
सार
MP Election 2023: उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। यहां 87.98 फीसदी वोटिंग हुई, जो कि सात विधानसभा में सबसे ज्यादा है।
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बड़नगर विधानसभा में हुई सबसे ज्यादा वोटिंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उज्जैन जिले की सात विधानसभा में सबसे अधिक वोटिंग बड़नगर विधानसभा में हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस विधानसभा क्षेत्र में जिस समाज और वर्ग का वोट बैंक है, उन सभी समाजों के प्रत्याशी मैदान में थे, इसलिए हर वर्ग ने अपना पूरा प्रयास किया इसी के चलते यहां सात विधानसभा में सबसे अधिक वोटिंग हुई।
बड़नगर विधानसभा में कल 83.98 प्रतिशत वोटिंग हुई जो 7 विधानसभा में सबसे अधिक है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां चुनाव में इस विधानसभा के बड़े वोट बैंक माने जाने वाले सभी समाजों के प्रत्याशी मैदान में थे। इसी के चलते सभी समाज ने यहां अधिक से अधिक वोटिंग का प्रयास किया। इसी के चलते इस बार यहां अब तक की सबसे अधिक वोटिंग हुई है, यहां की बात की जाए तो यहां पर सबसे अधिक राजपूत समाज के वोट हैं कांग्रेस ने राजपूत समाज के राजेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट दिया था, लेकिन वर्तमान विधायक मुरली मोरवाल के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और मुरली मोरवाल को टिकट दिया गया। मुरली मोरवाल प्रजापत समाज से आते हैं और यह समाज पिछड़ा वर्ग में आता है।
राजपूत समाज के राजेन्द्र सिंह सोलंकी की टिकट काटी गई तो वहां के स्थानीय नेताओं पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह सिसोदिया एवं पहले विधायक का चुनाव लड़ चुके पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेश पटेल ने उनका समर्थन किया और उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने में मदद की। इसी प्रकार दूसरा बड़ा समाज इस विधानसभा में ब्राह्मण समाज है। भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण समाज के जितेंद्र सिंह पंड्या को चुनाव लड़ाया वहीं, एक और बड़ा वोट बैंक माली समाज का है। माली समाज के भी एक उम्मीदवार प्रकाश सिंह गोड निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में है। बड़नगर विधानसभा में राजपूत, ब्राह्मण, माली और पिछड़े वर्ग का वोट बैंक है। सभी वर्ग के प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण बड़े पैमाने पर हुआ है। अब जिसके साथ दलित वोट आया होगा वह प्रत्याशी चुनाव जीत जाएगा। हालांकि अधिक मतदान होना सत्ता के पक्ष में जाता है लेकिन परिणाम क्या होगा यह तो 3 दिसंबर को ही पता चल पाएगा।
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बड़नगर विधानसभा में कल 83.98 प्रतिशत वोटिंग हुई जो 7 विधानसभा में सबसे अधिक है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां चुनाव में इस विधानसभा के बड़े वोट बैंक माने जाने वाले सभी समाजों के प्रत्याशी मैदान में थे। इसी के चलते सभी समाज ने यहां अधिक से अधिक वोटिंग का प्रयास किया। इसी के चलते इस बार यहां अब तक की सबसे अधिक वोटिंग हुई है, यहां की बात की जाए तो यहां पर सबसे अधिक राजपूत समाज के वोट हैं कांग्रेस ने राजपूत समाज के राजेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट दिया था, लेकिन वर्तमान विधायक मुरली मोरवाल के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और मुरली मोरवाल को टिकट दिया गया। मुरली मोरवाल प्रजापत समाज से आते हैं और यह समाज पिछड़ा वर्ग में आता है।
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राजपूत समाज के राजेन्द्र सिंह सोलंकी की टिकट काटी गई तो वहां के स्थानीय नेताओं पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह सिसोदिया एवं पहले विधायक का चुनाव लड़ चुके पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेश पटेल ने उनका समर्थन किया और उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ने में मदद की। इसी प्रकार दूसरा बड़ा समाज इस विधानसभा में ब्राह्मण समाज है। भारतीय जनता पार्टी ने ब्राह्मण समाज के जितेंद्र सिंह पंड्या को चुनाव लड़ाया वहीं, एक और बड़ा वोट बैंक माली समाज का है। माली समाज के भी एक उम्मीदवार प्रकाश सिंह गोड निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में है। बड़नगर विधानसभा में राजपूत, ब्राह्मण, माली और पिछड़े वर्ग का वोट बैंक है। सभी वर्ग के प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में वोटों का ध्रुवीकरण बड़े पैमाने पर हुआ है। अब जिसके साथ दलित वोट आया होगा वह प्रत्याशी चुनाव जीत जाएगा। हालांकि अधिक मतदान होना सत्ता के पक्ष में जाता है लेकिन परिणाम क्या होगा यह तो 3 दिसंबर को ही पता चल पाएगा।
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