Ujjain News: जानिए उज्जैन की यह भी परंपरा, रात को गोपाल मंदिर तो सुबह भस्म आरती में होता है हरि का हर से मिलन
वैकुंठ चतुर्दशी पर बाबा महाकाल गोपाल मंदिर जाकर भगवान श्री हरि से सृष्टि का भार सौंपते हैं। भस्म आरती के दौरान भगवान विष्णु की प्रतिमा का पूजन-अर्चन कर तुलसी और बेल पत्र का आदान-प्रदान किया जाता है। इसके बाद भगवान श्री हरि को उनके मंदिर लौटने का निवेदन किया जाता है।
विस्तार
वैकुंठ चतुर्दशी पर बाबा महाकाल भगवान श्री हरि से मिलने गोपाल मंदिर पहुंचते हैं और सृष्टि का भार उन्हें सौंपते हैं। हरिहर मिलन की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे गुरुवार रात पारंपरिक धूमधाम के साथ नगर में संपन्न किया गया। इसके बाद सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल और भगवान श्री हरि का एक बार फिर मिलन होता है। इस आरती में भगवान श्री हरि को उनके मंदिर लौटने का निवेदन भी किया जाता है।
महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित अर्पित शर्मा ने बताया कि वैकुंठ चतुर्दशी पर बाबा महाकाल की सवारी पूर्ण वैभव और राजसी ठाट-बाट के साथ गोपाल मंदिर पहुंचती है। वहां पूजन-अर्चन के बाद देर रात बाबा महाकाल अपने मंदिर लौटते हैं। मान्यता है कि पालकी में भगवान श्री हरि की परछाई भी बाबा महाकाल के साथ मंदिर आती है।
भस्म आरती के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के आभूषण कक्ष से भगवान श्री हरि की प्रतिमा को ढोल-नगाड़ों के साथ गर्भगृह तक लाया जाता है। शिवलिंग के समक्ष भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर पारंपरिक रूप से पूजन-अर्चन और भोग लगाया जाता है। इस दौरान बेल पत्र और तुलसी पत्र का आदान-प्रदान भी होता है।
पूजन के उपरांत भगवान श्री हरि से विनती की जाती है कि वे परछाई स्वरूप में अपने मंदिर लौट जाएं। यह आयोजन महाकाल मंदिर की अद्वितीय परंपराओं और धार्मिक धरोहर का प्रतीक है।

जानिए उज्जैन की यह भी परंपरा... रात को गोपाल मंदिर तो सुबह भस्म आरती मे भी होता है हरि का हर से

जानिए उज्जैन की यह भी परंपरा... रात को गोपाल मंदिर तो सुबह भस्म आरती मे भी होता है हरि का हर से
