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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव: मनोज मुंतशिर बोले- हम मांग लेते हैं तो हिंसक और छोड़ दें तो सज्जन... ऐसा क्यों?
Sun, 08 Dec 2024 11:05 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 08 Dec 2024 11:05 PM IST
सार
कालिदास संस्कृत अकादमी में रविवार से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियाँ शुरू हुईं। पहले दिन गीतकार मनोज मुंतशिर शुक्ला ने गीता संवाद किया और इसके बाद श्रीकृष्ण-गुरु सांदीपनि के आख्यान पर आधारित महानाट्य "गुरु दक्षिणा" का मंचन हुआ।
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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में बोले मनोज मुंतशिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में रविवार से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की सांस्कृतिक गतिविधियां प्रारंभ हुईं, जिसमें महोत्सव के पहले दिन ख्यात गीतकार मनोज मुंतशिर शुक्ला का गीता संवाद हुआ। इसके बाद सुमन साहा (कोलकाता) निर्देशित गुरु दक्षिणा जो श्रीकृष्ण-गुरु सांदीपनि के आख्यान आधारित महानाट्य का मंचन हुआ।
इसमें ख्यात गीतकार मनोज मुंतशिर शुक्ला ने कहा कि हमारे देश में शकुनि की कोई कमी नहीं है। दिल्ली के शहजादे, आलू सोना मशीन, कभी संसद में सोते हुए पाए जाते हैं, कभी आंख मारते हुए भारत जोड़ो भारत जोड़ने की फर्जी यात्रा करते हैं पूरे देश में और असली यात्रा के लिए ब्रिटेन जाते हैं, जहां जॉर्ज सोरोस के साथ मिलकर भारत तोड़ने की प्लानिंग करते हैं। आए दिन हमारे सामने खबरें आ रही हैं कि इन्होंने भारत को तोड़ने का फॉर्मूला ढूंढ लिया है। जानते हैं क्या है हिंदुत्व को तोड़ो तो भारत अपने आप टूट जाएगा।
मुंतशिर का कहना है कि मेरी पीड़ा है, यह मेरी वेदना है। इसमें कहीं कोई राजनीति नहीं है। कहीं कोई कूटनीति नहीं है। यह वह है जिसने मुझे बहुत तकलीफ दी है। मुझे रातों में जगाया है। मैंने एक बार नेता प्रतिपक्ष को संसद में बोलते हुए सुना कि हिन्दू हिंसक हो गए हैं, हिन्दू हिंसक हो गए? हिन्दू और हिंसा ये दो शब्द एक साथ में बोलने से पहले शरम नहीं आई। हिन्दू फोबिया फैला हुआ है। हिन्दू फोबिया यानी हिंदुत्व का डर, हिंदुओं से डरना चाहिए। डरते हैं तो हम किसी के बाप से नहीं। हमने राम लला का मंदिर मांग लिया। जहां हमारे राम में थे और हम हिंसक हो गए। हमने कृष्ण जन्मभूमि मांग ली, हम हिंसक हो गए। हम छोड़ देते तो सज्जन हो जाते, बार बार कहते हैं।
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12 दिसंबर तक होंगे यह आयोजन
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि दूसरे दिन संजीव मालवीय निर्देशित महानाट्य कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। 10 दिसंबर को प्रातः 10 बजे गीता आधारित प्रतियोगिताएं होगी। इसी क्रम में 11 बजे से श्रीमद्भगवद् गीता आधारित संगोष्ठी का आयोजन होगा। इसमें देश-विदेश के विषय विशेषज्ञ अपना वक्तव्य देंगे। सांस्कृति संध्या में देवास की रहने वाली प्रसिद्ध भजन गायिका कलापिनी कोमकली श्रीकृष्ण पर केन्द्रित भजन प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद श्री कुमार शर्मा एवं दल द्वारा श्रीकृष्णः अनेक नाम-अनेक धाम नृत्य नाटिका को प्रस्तुत करेंगे। गीता जयंती 11 दिसंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसमें प्रवचन, 5108 आचार्यों द्वारा गीता पाठ, मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिन्द्रा की मोटिवेशनल स्पीच, श्रीमद्भगद्गीता एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण, सुदर्शन चक्र की संगीतमय यात्रा- श्रीकृष्ण गाथा नृत्य नाट्य प्रस्तुति होगी। 12 दिसंबर को सुबह 8.00 बजे से सम्पूर्ण गीता पाठ एवं यज्ञ किया जाएगा।
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इसमें ख्यात गीतकार मनोज मुंतशिर शुक्ला ने कहा कि हमारे देश में शकुनि की कोई कमी नहीं है। दिल्ली के शहजादे, आलू सोना मशीन, कभी संसद में सोते हुए पाए जाते हैं, कभी आंख मारते हुए भारत जोड़ो भारत जोड़ने की फर्जी यात्रा करते हैं पूरे देश में और असली यात्रा के लिए ब्रिटेन जाते हैं, जहां जॉर्ज सोरोस के साथ मिलकर भारत तोड़ने की प्लानिंग करते हैं। आए दिन हमारे सामने खबरें आ रही हैं कि इन्होंने भारत को तोड़ने का फॉर्मूला ढूंढ लिया है। जानते हैं क्या है हिंदुत्व को तोड़ो तो भारत अपने आप टूट जाएगा।
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मुंतशिर का कहना है कि मेरी पीड़ा है, यह मेरी वेदना है। इसमें कहीं कोई राजनीति नहीं है। कहीं कोई कूटनीति नहीं है। यह वह है जिसने मुझे बहुत तकलीफ दी है। मुझे रातों में जगाया है। मैंने एक बार नेता प्रतिपक्ष को संसद में बोलते हुए सुना कि हिन्दू हिंसक हो गए हैं, हिन्दू हिंसक हो गए? हिन्दू और हिंसा ये दो शब्द एक साथ में बोलने से पहले शरम नहीं आई। हिन्दू फोबिया फैला हुआ है। हिन्दू फोबिया यानी हिंदुत्व का डर, हिंदुओं से डरना चाहिए। डरते हैं तो हम किसी के बाप से नहीं। हमने राम लला का मंदिर मांग लिया। जहां हमारे राम में थे और हम हिंसक हो गए। हमने कृष्ण जन्मभूमि मांग ली, हम हिंसक हो गए। हम छोड़ देते तो सज्जन हो जाते, बार बार कहते हैं।
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12 दिसंबर तक होंगे यह आयोजन
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि दूसरे दिन संजीव मालवीय निर्देशित महानाट्य कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। 10 दिसंबर को प्रातः 10 बजे गीता आधारित प्रतियोगिताएं होगी। इसी क्रम में 11 बजे से श्रीमद्भगवद् गीता आधारित संगोष्ठी का आयोजन होगा। इसमें देश-विदेश के विषय विशेषज्ञ अपना वक्तव्य देंगे। सांस्कृति संध्या में देवास की रहने वाली प्रसिद्ध भजन गायिका कलापिनी कोमकली श्रीकृष्ण पर केन्द्रित भजन प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद श्री कुमार शर्मा एवं दल द्वारा श्रीकृष्णः अनेक नाम-अनेक धाम नृत्य नाटिका को प्रस्तुत करेंगे। गीता जयंती 11 दिसंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसमें प्रवचन, 5108 आचार्यों द्वारा गीता पाठ, मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिन्द्रा की मोटिवेशनल स्पीच, श्रीमद्भगद्गीता एवं मूल्य आधारित शिक्षा प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण, सुदर्शन चक्र की संगीतमय यात्रा- श्रीकृष्ण गाथा नृत्य नाट्य प्रस्तुति होगी। 12 दिसंबर को सुबह 8.00 बजे से सम्पूर्ण गीता पाठ एवं यज्ञ किया जाएगा।
