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उज्जैन में महाअष्टमी पर आस्था का अनोखा रंग: संतों की अगुवाई में आज हुई पूजा, माता को मदिरा का भोग भी लगा

Thu, 26 Mar 2026 04:00 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Thu, 26 Mar 2026 04:00 PM IST
सार

उज्जैन में चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर पारंपरिक नगर पूजा आज समाप्त हुई। 28 किलोमीटर यात्रा में 40 मंदिरों में पूजन, मदिरा भोग और ध्वजा अर्पण किया गया। संतों की मौजूदगी में 12 घंटे चलने वाली पूजा का समापन भैरव मंदिर पर हुआ। 

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निरंजनी अखाड़ा करेगा नगर पूजा का आयोजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में सदियों पुरानी परंपराएं आज भी पूरे विधि-विधान से निभाई जा रही हैं। होली पर सिंहपुरी क्षेत्र की कंडों की होली हो या नवरात्रि के दौरान होने वाली नगर पूजा हर परंपरा का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर होने वाली नगर पूजा की तैयारियां पूरी हो चुकी। आज सुबह 8 बजे का इंतजार था, जब संत-समाज और प्रशासन की मौजूदगी में विशेष पूजन किया गया। 

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नगरवासियों की सुख-समृद्धि की कामना के साथ हर वर्ष की तरह इस बार भी श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी द्वारा नगर पूजा का आयोजन किया गया। जिसके बाद  चौबीस खंभा स्थित माता महामाया और महालया माता को मदिरा का भोग लगाया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी महाराज सहित कई संत, महंत और महामंडलेश्वर उपस्थित रहें।

सुबह 8 बजे चौबीस खंभा माता मंदिर से नगर पूजा की शुरुआत हुई। लगभग 28 किलोमीटर लंबी यात्रा में एक हांडी में मदिरा लेकर कोटवार चलते हैं और मार्ग में आने वाले प्रमुख देवी एवं भैरव मंदिरों में ध्वज, चोला और मदिरा अर्पित की जाती है। बैंड-बाजों और जयकारों के बीच यह यात्रा रात 8 बजे अंकपत मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर समाप्त होगी।

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करीब 12 घंटे तक चलने वाली इस नगर पूजा में 40 से अधिक मंदिरों में पूजन किया जाता है। देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा का भोग लगाया जाता है, जबकि हनुमान मंदिरों में ध्वजा अर्पित की जाती है। पूजा में सिंदूर, कुंकुम, अबीर, मेहंदी, चूड़ी, नारियल, चना, सिंघाड़ा, पूरी-भजिए, दूध, दही, इत्र सहित लगभग 40 प्रकार की सामग्रियों का उपयोग होता है।

पूजन के पश्चात बड़नगर रोड स्थित अखाड़े में भव्य कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संत-महंतों, जनप्रतिनिधियों और आम श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी होगी।

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