{"_id":"6711dd753ce1a457e5056b06","slug":"aaroh-srivastava-the-pioneer-of-vedic-watch-said-now-it-will-be-launched-in-the-form-of-wrist-watch-and-wall-clock-also-vikramaditya-vedic-clock-ujjain-news-c-1-1-noi1228-2227051-2024-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: घर की दीवार और रिस्ट वॉच के रूप में लांच होगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, फोन में भी देख सकेंगे समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: घर की दीवार और रिस्ट वॉच के रूप में लांच होगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, फोन में भी देख सकेंगे समय
Fri, 18 Oct 2024 04:31 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Fri, 18 Oct 2024 04:31 PM IST
सार
उज्जैन में स्थापित देश की पहली वैदिक घड़ी अब कलाई घड़ी और दीवार घड़ी के रूप में विकसित की जाएगी, साथ ही इसका उपयोग मोबाइल ऐप के जरिए भी किया जा सकेगा। यह घड़ी सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 30 घंटे और 30 मुहूर्तों का समय दर्शाएगी, जो वैदिक गणना और भारतीय समय प्रणाली पर आधारित है।
विज्ञापन
देश की पहली वैदिक घड़ी अब घर-घर होगी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहर मे लगी देश की पहली वैदिक घड़ी की तर्ज पर अब इसे कलाई घड़ी और दीवार घड़ी के तौर पर भी विकसित किया जाएगा। जल्द ही इस घड़ी का उपयोग मोबाइल एप के जरिए लोग अपने फोन में भी कर सकते हैं। यह जानकारी वैदिक घड़ी के प्रणेता लखनऊ निवासी आरोह श्रीवास्तव ने दी।
उज्जैन में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इस घड़ी में ग्राफिक्स का भी इस्तेमाल किया गया है। हर घंटे में अलग-अलग तस्वीरें इस घड़ी में दिखाई देगी। साथ ही देश और दुनिया भर में सूर्यास्त और सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को भी इसमें दर्ज किया जाएगा। इस घड़ी का उपयोग मोबाइल ऐप के जरिए लोग अपने फोन में भी कर सकते हैं। साथ ही अगर घड़ी में किसी तरह का बदलाव होता है तो वो आपके मोबाइल ऐप पर भी देखने को मिलेगा।
समय के साथ 30 मुहूर्त भी बताती है ये घड़ी
वैदिक घड़ी एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय के बीच 30 घंटे का समय दिखाएगी। साथ ही इसमें भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के आधार पर 60 मिनट नहीं बल्कि 48 मिनट का एक घंटा तय किया गया है। साथ ही वैदिक समय के आधार पर ही यह घड़ी अलग-अलग मुहूर्त भी दिखाएगी। यह घड़ी पुराने समय में जैसे काल और समय की गणना होती थी, उसी आधार पर गणना करेगी। वैदिक घड़ी वैदिक गणित के आधार पर काम करती है और घड़ी से मुहूर्त भी देख सकेंगे। वैदिक घड़ी प्राचीन भारतीय समय निर्धारण प्रणाली के आधार पर 30 मुहूर्त दशार्ती है। 30 मुहूर्त को 30 कला और 30 काष्ठ में विभाजित किया गया है। 30 मुहूर्त लगातार 2 सूर्योदयों के बीच का समय अंतराल (1 दिन और रात) 1 मुहूर्त बराबर 30 कला (वर्तमान समय प्रणाली में लगभग 48 मिनट) 1 कला बराबर 30 काष्ठ (लगभग 96 सेकंड) 1 काष्ठ बराबर लगभग 3200 मिली सेकंड। लगातार 2 सूर्योदयों के मध्य की समयावधि परिवर्तनशील होती है, जिसके कारण वैदिक घड़ी वर्तमान 24 घंटों में 30 मुहूर्त 30 काल 30 काष्ठ रूपांतरण होता है। 24 घंटों में वैदिक समय प्रणाली अनुमानित है।
विज्ञापन
पंचांग और मुहूर्त देखने की सुविधा
उज्जैन की इस घड़ी का विक्रमादित्य वैदिक घड़ी नाम दिया गया है। वैदिक घड़ी दुनिया की पहली ऐसी घड़ी है जो डिजिटल होगी, जिसमें भारतीय कालगणना वैदिक समय, इंडियन स्टैंडर्ड टाइम और ग्रीनवीच मीन टाइम के साथ भारतीय कालगणना वाले विक्रम संवत पंचांग, 30 मुहूर्त, योग,भद्रा, चंद्रमा की स्थिति, नक्षत्र, चौघड़िया, सूर्य उदय, सूर्यास्त, सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण इत्यादि की जानकारी ली जा सकेगी। सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर यह घड़ी समय बताएगी। बोलचाल की भाषा में अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल कहा जाता है। इस घड़ी में 24 घंटों को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है। हर मुहूर्त का एक धार्मिक नाम होता है।
अलग-अलग ग्राफिक्स दिखाएगी घड़ी
वैदिक घड़ी की एक नहीं बल्कि कई खासियतें हैं। इस घड़ी में ग्राफिक्स का भी इस्तेमाल किया गया है। हर घंटे में अलग-अलग तस्वीरें इस घड़ी में दिखाई देगी। साथ ही देश व दुनिया भर में सूर्यास्त और सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण को भी इसमें दर्ज किया जाएगा और लोगों तक उसकी जानकारी पहुंचेगी। इस घड़ी का उपयोग मोबाइल ऐप के जरिए लोग अपने फोन में भी कर सकते हैं। साथ ही अगर घड़ी में किसी तरह का बदलाव होता है तो वो आपके मोबाइल ऐप पर भी देखने को मिलेगा। वर्तमान में प्रचलित घड़ी मेकेनिकल होने से दिन व रात को बराबर 12-12 घण्टों में बांटती है, परन्तु वास्तव में सम्पूर्ण विश्व में दिन व रात एक जैसे नहीं होते हैं। सूर्य उदय के समयानुसार हर शहर का दिन-रात का समय अलग-अलग होता है यह वैदिक घड़ी सूर्य सिध्दान्त पर कार्य करती है। सूर्योदय से समय की गणना करती है दिन भर के 15 मुहूर्त और रात्रि के 15 मुहूर्त दशार्ती है। पत्रकार वार्ता में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद के वैज्ञानिक राजेश शर्मा भोपाल, आचार्य वराहमिहिर वेधशाला डोंगला प्रकल्प प्रमुख घनश्याम रतनानी व विक्रम विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह मंचासीन थे।
यह है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की विशेषता
भारतीय कालगणना विश्व की प्राचीनतम, सूक्ष्म, शुद्ध, त्रुटिरहित, प्रामाणिक एवं विश्वसनीय पद्धति है। काल/परिमाण की इस सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति का पुनरस्थापन विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के रूप में उज्जैन में किया गया है। मुहूर्त, घटी, पल, कास्ता, प्रहर, दिन-रात, पक्ष, अयन, सम्वत्सर, दिव्यवर्ष, मन्वन्तर, युग, कल्प, ब्रम्हा वैदिक घड़ी के मुख्य आधार है। इस घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है। इसमें भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत् मास, ग्रह स्थिति, योग, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति, पर्व, शुभाशुभ मुहूर्त, घटी, नक्षत्र, जयंती, व्रत, त्यौहार, चौघडिया, सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण, आकाशस्थ, ग्रह, नक्षत्र, ग्रहों का परिभ्रमण समाहित है।
विज्ञापन
उज्जैन में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इस घड़ी में ग्राफिक्स का भी इस्तेमाल किया गया है। हर घंटे में अलग-अलग तस्वीरें इस घड़ी में दिखाई देगी। साथ ही देश और दुनिया भर में सूर्यास्त और सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को भी इसमें दर्ज किया जाएगा। इस घड़ी का उपयोग मोबाइल ऐप के जरिए लोग अपने फोन में भी कर सकते हैं। साथ ही अगर घड़ी में किसी तरह का बदलाव होता है तो वो आपके मोबाइल ऐप पर भी देखने को मिलेगा।
विज्ञापन
समय के साथ 30 मुहूर्त भी बताती है ये घड़ी
वैदिक घड़ी एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय के बीच 30 घंटे का समय दिखाएगी। साथ ही इसमें भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के आधार पर 60 मिनट नहीं बल्कि 48 मिनट का एक घंटा तय किया गया है। साथ ही वैदिक समय के आधार पर ही यह घड़ी अलग-अलग मुहूर्त भी दिखाएगी। यह घड़ी पुराने समय में जैसे काल और समय की गणना होती थी, उसी आधार पर गणना करेगी। वैदिक घड़ी वैदिक गणित के आधार पर काम करती है और घड़ी से मुहूर्त भी देख सकेंगे। वैदिक घड़ी प्राचीन भारतीय समय निर्धारण प्रणाली के आधार पर 30 मुहूर्त दशार्ती है। 30 मुहूर्त को 30 कला और 30 काष्ठ में विभाजित किया गया है। 30 मुहूर्त लगातार 2 सूर्योदयों के बीच का समय अंतराल (1 दिन और रात) 1 मुहूर्त बराबर 30 कला (वर्तमान समय प्रणाली में लगभग 48 मिनट) 1 कला बराबर 30 काष्ठ (लगभग 96 सेकंड) 1 काष्ठ बराबर लगभग 3200 मिली सेकंड। लगातार 2 सूर्योदयों के मध्य की समयावधि परिवर्तनशील होती है, जिसके कारण वैदिक घड़ी वर्तमान 24 घंटों में 30 मुहूर्त 30 काल 30 काष्ठ रूपांतरण होता है। 24 घंटों में वैदिक समय प्रणाली अनुमानित है।
विज्ञापन
पंचांग और मुहूर्त देखने की सुविधा
उज्जैन की इस घड़ी का विक्रमादित्य वैदिक घड़ी नाम दिया गया है। वैदिक घड़ी दुनिया की पहली ऐसी घड़ी है जो डिजिटल होगी, जिसमें भारतीय कालगणना वैदिक समय, इंडियन स्टैंडर्ड टाइम और ग्रीनवीच मीन टाइम के साथ भारतीय कालगणना वाले विक्रम संवत पंचांग, 30 मुहूर्त, योग,भद्रा, चंद्रमा की स्थिति, नक्षत्र, चौघड़िया, सूर्य उदय, सूर्यास्त, सूर्य ग्रहण, चंद्रग्रहण इत्यादि की जानकारी ली जा सकेगी। सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर यह घड़ी समय बताएगी। बोलचाल की भाषा में अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल कहा जाता है। इस घड़ी में 24 घंटों को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है। हर मुहूर्त का एक धार्मिक नाम होता है।
अलग-अलग ग्राफिक्स दिखाएगी घड़ी
वैदिक घड़ी की एक नहीं बल्कि कई खासियतें हैं। इस घड़ी में ग्राफिक्स का भी इस्तेमाल किया गया है। हर घंटे में अलग-अलग तस्वीरें इस घड़ी में दिखाई देगी। साथ ही देश व दुनिया भर में सूर्यास्त और सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण को भी इसमें दर्ज किया जाएगा और लोगों तक उसकी जानकारी पहुंचेगी। इस घड़ी का उपयोग मोबाइल ऐप के जरिए लोग अपने फोन में भी कर सकते हैं। साथ ही अगर घड़ी में किसी तरह का बदलाव होता है तो वो आपके मोबाइल ऐप पर भी देखने को मिलेगा। वर्तमान में प्रचलित घड़ी मेकेनिकल होने से दिन व रात को बराबर 12-12 घण्टों में बांटती है, परन्तु वास्तव में सम्पूर्ण विश्व में दिन व रात एक जैसे नहीं होते हैं। सूर्य उदय के समयानुसार हर शहर का दिन-रात का समय अलग-अलग होता है यह वैदिक घड़ी सूर्य सिध्दान्त पर कार्य करती है। सूर्योदय से समय की गणना करती है दिन भर के 15 मुहूर्त और रात्रि के 15 मुहूर्त दशार्ती है। पत्रकार वार्ता में म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिक परिषद के वैज्ञानिक राजेश शर्मा भोपाल, आचार्य वराहमिहिर वेधशाला डोंगला प्रकल्प प्रमुख घनश्याम रतनानी व विक्रम विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य राजेश सिंह कुशवाह मंचासीन थे।
यह है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की विशेषता
भारतीय कालगणना विश्व की प्राचीनतम, सूक्ष्म, शुद्ध, त्रुटिरहित, प्रामाणिक एवं विश्वसनीय पद्धति है। काल/परिमाण की इस सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति का पुनरस्थापन विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के रूप में उज्जैन में किया गया है। मुहूर्त, घटी, पल, कास्ता, प्रहर, दिन-रात, पक्ष, अयन, सम्वत्सर, दिव्यवर्ष, मन्वन्तर, युग, कल्प, ब्रम्हा वैदिक घड़ी के मुख्य आधार है। इस घड़ी को वैदिक काल गणना के समस्त घटकों को समवेत कर बनाया गया है। इसमें भारतीय पंचांग, विक्रम सम्वत् मास, ग्रह स्थिति, योग, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति, पर्व, शुभाशुभ मुहूर्त, घटी, नक्षत्र, जयंती, व्रत, त्यौहार, चौघडिया, सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण, आकाशस्थ, ग्रह, नक्षत्र, ग्रहों का परिभ्रमण समाहित है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
