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उज्जैन: एंबुलेंस नहीं पहुंची तो सड़क पर दिया बच्ची को जन्म, गोद में उठाकर दौड़ा पिता, लोडिंग वाहन से पहुंचाया अस्पताल
Fri, 03 Dec 2021 07:39 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Fri, 03 Dec 2021 07:39 PM IST
सार
उज्जैन जिले के एक गांव में महिला की डिलीवरी सड़क पर हुई। एंबुलेंस घर नहीं पहुंची तो महिला का पिता उसे गोद में लिया। लोडिंग वाहन में बिठाया। तब तक महिला ने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दे दिया।
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बेटी को गोद में उठाकर ले जाता पिता।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आये दिन सवाल उठते हैं। कभी एंबुलेंस न मिल पाने पर हाथ ठेले पर प्रसूता को ले जाना पड़ता है तो कभी गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है। आज भी कुछ गांव ऐसे हैं जहां आबादी तो है लेकिन सुविधा नहीं और इसी के चलते इन गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
ताजा मामला उज्जैन जिले का है जहां एक महिला की डिलीवरी सड़क पर हुई। एंबुलेंस घर नहीं पहुंची तो महिला का पिता उसे गोद में लेकर गया। रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी तरफ खड़े लोडिंग वाहन में बिठाया। तब तक महिला ने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दे दिया था। जच्चा-बच्चा को बाद में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
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ताजा मामला उज्जैन जिले का है जहां एक महिला की डिलीवरी सड़क पर हुई। एंबुलेंस घर नहीं पहुंची तो महिला का पिता उसे गोद में लेकर गया। रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी तरफ खड़े लोडिंग वाहन में बिठाया। तब तक महिला ने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दे दिया था। जच्चा-बच्चा को बाद में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
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पलंग का इंतजाम कर लोडिंग वाहन में ले गए महिला को।
पलंग का इंतजाम कर लोडिंग वाहन में ले गए महिला को।
- फोटो : सोशल मीडिया
जानकारी के मुताबिक घटना उज्जैन जिले में पीर झलार गांव है। गांव में राजस्थान के राकेश, सावित्री ठाकुर और बेटी पूजा मजदूरी के लिए आए हैं। पूजा का पति अनिल भी खेतों में मजदूरी करता है। पूजा गर्भवती थी। शुक्रवार सुबह अचानक पेट में दर्द हुआ। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस ने यह कहकर मना किया कि गांव तक नहीं पहुंच सकेंगे क्योंकि कीचड़ है। इसके बाद पुलिस की डायल 100 पर संपर्क किया तो वहां से भी यही जवाब मिला। इसके बाद पूजा को उसके पिता राकेश और पति अनिल गांव के लोगों की मदद से लेकर जाने लगे। कोशिश थी कि रेलवे क्रॉसिंग के दूसरी तरफ जल्दी से ले जाएं ताकि वहां से वाहन मिल सके। इसी बीच पूजा का दर्द बढ़ा और उसने सड़क पर ही बच्ची को जन्म दे दिया। इस दौरान एक लोडिंग वाहन वहां से गुजरा। पलंग का इंतजाम कर पूजा को लोडिंग वाहन में बैठाया और बड़नगर के सरकारी अस्पताल में ले गए। यहां डॉक्टरों ने कहा कि नवजात की स्थिति गंभीर है। उसे उज्जैन के चरक अस्पताल में रैफर किया।
देवास में ठेले पर गए थे प्रसूता को
स्वास्थ्य सेवाओं की लाचारी और एंबुलेंस के न पहुंच पाने की यह कहानी सिर्फ उज्जैन की नहीं है। कुछ दिन पहले देवास में भी ऐसा हुआ था जब प्रसूता का ठेले पर लेटाकर ले जाना पड़ा था। कॉलोनी में कीचड़ था और एंबुलेंस जा नहीं सकती थी। देवास जिले में ही पिता अपनी बेटी को बाइक पर खटिया बांधकर अस्पताल ले गया था क्योंकि एंबुलेंस गांव में नहीं आ रही थी। निजी वाहन का खर्च वहन करने की क्षमता नहीं थी।
देवास में ठेले पर गए थे प्रसूता को
स्वास्थ्य सेवाओं की लाचारी और एंबुलेंस के न पहुंच पाने की यह कहानी सिर्फ उज्जैन की नहीं है। कुछ दिन पहले देवास में भी ऐसा हुआ था जब प्रसूता का ठेले पर लेटाकर ले जाना पड़ा था। कॉलोनी में कीचड़ था और एंबुलेंस जा नहीं सकती थी। देवास जिले में ही पिता अपनी बेटी को बाइक पर खटिया बांधकर अस्पताल ले गया था क्योंकि एंबुलेंस गांव में नहीं आ रही थी। निजी वाहन का खर्च वहन करने की क्षमता नहीं थी।
