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उज्जैन: मंत्री के आश्वासन के बाद स्थगित हुआ संतों का धरना, समझाई शिप्रा शुद्धिकरण की योजना

Tue, 14 Dec 2021 07:10 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Tue, 14 Dec 2021 07:10 PM IST
सार

शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे संतों ने धरना स्थगित कर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री और अधिकारियों ने संतों को मनाया। संतों को शुद्धिकरण की योजना समझाई।  इसके बाद संत मान गए और कुछ दिन के लिए धरना स्थगित कर दिया।

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Ujjain: After the assurance of the minister and the officials, the dharna of the saints was postponed, explained the plan of shipra purification...
नारियल पानी पिलाकर तुड़वाया अनशन। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर धरने पर बैठे संतों ने धरना स्थगित कर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री और अधिकारियों ने संतों को मनाया। संतों को शुद्धिकरण की योजना समझाई। आश्वासन दिया कि जल्द ही शिप्रा को प्रदूषणमुक्त बनाया जाएगा। इसके बाद संत मान गए और कुछ दिन के लिए धरना स्थगित कर दिया।
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गौरतलब है कि शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर शिप्रा किनारे संत समाज के प्रतिनिधि धरने पर बैठ गए थे। करीब छह दिनों से धरना चल रहा था। संतों की मांग थी कि शिप्रा नदी को शुद्ध किया जाए। शिप्रा का जल आचमन तो क्या स्नान के योग्य भी नहीं है। इसके चलते संत समाज लगातार धरने पर बैठे थे और सरकार को चेतावनी भी दी थी कि यदि शिप्रा को शुद्ध नहीं किया गया तो परिणाम भुगतना होंगे।
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इसके बाद उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव सहित उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह, एडीएम संतोष टैगोर, एसडीएम संजय साहू संतों से मिलने पहुंचे। उन्हें बताया कि जल्द ही शिप्रा को शुद्ध किया जाएगा। इसके लिए योजना बनाई जा रही है। संतों ने मंत्री और कलेक्टर को शिप्रा नदी का पानी दिखाया और कहा कि किस तरह शिप्रा प्रदूषित हो रही है। इस पर मंत्री यादव ने संतों को आश्वस्त किया कि चार दिन में योजना बनाई जाएगी। इंदौर और उज्जैन जिलों के अधिकारियों को प्लान बनाने का कहा है। इस बात पर संत समाज ने सहमति दी और धरना स्थगित कर दिया।
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संत रामेश्वर दास ने कहा कि मंत्री और अधिकारियों ने प्लान बताया है। सीएम से मिलने की बात भी कही है। जल्द ही नाले और कान्ह नदी के गंदे पानी को मिलने से रोकने का आश्वासन हमें दिया है। जिसके बाद हमने धरना स्थगित कर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर-देवास से आ रहा गंदा पानी और उज्जैन के नाले शिप्रा नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। इसके कारण पानी साफ नहीं हो पा रहा है। सीएम और मंत्री तुलसी सिलावट से बात हुई है। कान्ह नदी का पानी शुद्ध करके खेतों में देंगे, जिससे पानी शिप्रा तक नहीं पहुंचेगा। कान्ह नदी के लिए दो जिले के अधिकारी प्लान बनाएंगे। 


आश्वासन के बाद तोड़ा अनशन
इधर मंगलनाथ रोड पर भगवान अंगारेश्वर मंदिर के पास दादू आश्रम के संत ज्ञानदास भी शिप्रा नदी के शुद्धिकरण को लेकर अनशन पर थे। उन्होंने 16 नवंबर से अन्न त्याग रखा था। मंत्री और अधिकारियों के आश्वासन पर ज्ञानदास महाराज ने अनशन खत्म किया। हालांकि उन्होंने कहा वे योजना पूरी होने तक फलाहार पर ही रहेंगे। अन्न अभी भी ग्रहण नहीं करेंगे। संत ज्ञानदास को कलेक्टर आशीष सिंह ने नारियल पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया।
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