व्हाटसऐप पर डाला भागवत का फर्जी फोटो, दो मुस्लिम युवक गिरफ्तार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दिए गए निर्णय के एक साल बाद ही मध्यप्रदेश में दो युवकों को सिर्फ इसलिए जेल भेज दिया गया क्योंकि उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की आपत्तिजनक तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मामले में खारगौन जिले के दो युवकों के खिलाफ हिंदू भावनाओं से छेड़छाड़ करने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद पुलिस ने भीखनगांव निवासी 22 साल के युनूस बंथिया और 21 साल के खरगौन निवासी वसीम शेख के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। दोनों युवकों पर आरोप था कि उन्होंने भागवत की एक तस्वीर को एक महिला के साथ जोड़ते हुए वाट्सएप पर शेयर किया था।
असल में यह तस्वीर आरएसएस के उस निर्णय के संदर्भ में जारी की गई थी जिसमें पिछले सप्ताह ही संगठन ने अपना ड्रेस कोड बदलने का निर्णय लिया था। पुलिस के अनुसर आरोपियों के खिलाफ इन्फोर्मेशन टेक्नालॉजी एक्ट के सेक्शन 67 की धारा 505(2) के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।
कोर्ट ने दोनों युवकों को 30 मार्च तक जेल भेजा
आरोप सिद्ध होने पर आरोपियों को तीन साल जेल की सजा हो सकती है। ग्रेजुएशन में प्रथम वर्ष के छात्र बंथिया ने भागवत की उक्त तस्वीर वाट्सएप पर शेयर की थी जबकि शेख ने उसे अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दिया।
बंथिया को गोगावा थाना पुलिस द्वारा रजनीश निंबालकर की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया। जबकि शेख को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया। दोनों को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से उन्हें 30 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वहीं मामले में पुलिस की कार्रवाई का विरोध भी शुरू हो गया है, स्थानीय कांग्रेस नेता पारसराम दांडीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूछा कि जब छात्रों ने उक्त तस्वीर खुद नहीं बनाई है तो फिर उन्हें गिरफ्तार करने का क्या तुक है। लोगों ने पुलिस के रवैये पर आपत्ति जताई।
