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MP News: सरस्वती राजामणि 16 साल की वो महिला जासूस जिसे देश ने भुलाया, जुड़वां बहनों ने लिखी उनकी दास्तां

Sat, 13 Aug 2022 01:59 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sat, 13 Aug 2022 01:59 PM IST
सार

आजादी की ‘गुमनाम नायिका’ सरस्वती राजामणि पर 10 साल की बेटियों ने लिखी किताब, लॉकडान में देश की आजादी में महिला की भूमिका पर जेहन में सवाल कौंधा और दोनों बहनों ने रिसर्च शुरू किया था। 

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twin sisters written a book contribution of detective Saraswati Rajamani in the country independence
दो जुड़वां बहनों द्वारा लिखित किताब का विमोचन करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। - फोटो : amar ujala

विस्तार

देश स्वतंत्रता दिवस के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है। यह आजादी वर्षों के संघर्ष, तपस्या, शौर्य और बलिदान की बदौलत मिली है। इसमें कई ऐसे क्रांतिकारियों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कुर्बानी शामिल है, जिनके बारे में कम जानकारी है या फिर हम बिल्कुल अनजान हैं। देश के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाली ऐसी ही एक शख्सियत पर दो जुड़वां बहनें देवयानी और शिवरंजनी ने किताब लिखी है। 
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 वर्ष की इन बेटियों की लिखी किताब ‘सरस्वती राजामणि- एक भूली-बिसरी जासूस’ का विमोचन किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दोनों के उज्ज्वल भविष्य की कामनाएं करते हुए करते हुए आशीर्वाद दिया है। ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ में देवयानी और शिवरंजनी अपनी किताब के जरिए भारत की सबसे कम उम्र की महिला जासूस सरस्वती राजामणि से परिचय करा रही हैं। किताब के विमोचन के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चियों के साथ पौधारोपण भी किया। 
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देवयानी और शिवरंजनी जुड़वां बहनें हैं और इन्होंने महज 10 साल की उम्र में आजाद हिंद फौज की जासूस सरस्वती राजामणि पर सचित्र किताब लिखी है। इस पुस्तक के सभी चित्र दोनों बच्चियों ने मिलकर बनाए हैं। दोनों बहनों का कहना है कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, उन लोगों को भी याद करना चाहिए, जिनके बारे में ज्यादा लिखा-पढ़ा नहीं गया है, जो हमारे गुमनाम नायक/ नायिका हैं। स्वतंत्रता दिलाने में जिनका महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन हमें जानकारी नहीं है।’ साल 2021 में इन बच्चियों की पहली पुस्तक ‘सूर्य नमस्कार’ प्रकाशित हो चुकी है, जिसे देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा था।
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लॉकडाउन के दौरान आजादी में महिलाओं के योगदान पर किया था रिसर्च शुरू
दोनों जुड़वां बहनें एक निजी स्कूल में कक्षा पांचवीं की छात्रा हैं। दोनों को किताबें पढ़ने का शौक है। देवयानी कहती हैं कि लॉकडाउन में स्कूल बंद होने पर मां से पेंटिंग करनी सीखी थी। करीब एक साल पहले उन्हें ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के बारे में पता चलने पर स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान को लेकर सवाल उठा और उसपर रिसर्च करना शुरू कर दिया। उन्हें ‘अदृश्य’ नाम की किताब में युवा जासूस सरस्वती राजामणि के बारे में जानकारी मिली। सरस्वती राजामणि के जीवन, उनके कार्यों, बलिदान और सिद्धातों ने दोनों को प्रभावित किया। 

16 साल की उम्र में आजाद हिन्द फौज का हिस्सा बनी थीं सरस्वती राजामणि
सरस्वती राजामणि आजाद हिंद फौज की जासूस और बेहद कम उम्र की गुमनाम क्रांतिकारी थीं। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को बहुत प्रभावित किया था और अंग्रेजों के लिए काल से कम नहीं थीं। सरस्वती राजामणि का जन्म बर्मा के एक संपन्न और देशभक्त परिवार में हुआ था। वे जब 16 साल की थीं, तब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भाषण से इतनी प्रभावित हुईं कि अपने सारे गहने आजाद हिन्द फौज को दान कर दिए थे। नेताजी को इस बात का विश्वास नहीं हुआ और वो सरस्वती राजामणि से मिलने पहुंच गए। राजामणि का हौसला और जज्बा देखकर नेताजी ने उन्हें फौज का हिस्सा बना लिया। राजामणि ने अपनी दोस्त दुर्गा के साथ मिलकर ब्रिटिश कैंप की जासूसी की और कई महत्वपूर्ण जानकारियां आजाद हिन्द फौज को दीं। 
 
किताब के चित्र भी देवयानी और शिवरंजनी ने बनाए
देवयानी और शिवरंजनी को किताब लिखने में एक साल लगाए। 6 महीने रिसर्च और 6 महीने लिखने और चित्र बनाने में लगे। कवर पेज पर भूत, वर्तमान के हिंदूस्तान के साथ ही भविष्य के भारत की कल्पना है। अंदर के पृष्ठों पर सरस्वती राजामणि के जीवन और उनकी गतिविधियों से जुड़े चित्र हैं। 

मां ही प्रेरणा, मां को ही दिया श्रेय
दोनों बहनें ने पुस्तक का श्रेय अपनी माता स्मिता भारद्वाज, परिवार और दोस्तों को दिया है। देवयानी और शिवरंजनी कहती हैं कि उनकी मां ही उनकी प्रेरणा स्त्रोत हैं। वे बताती हैं कि मां ने मदद के साथ मार्गदर्शन किया और अपना सारा समय उन्हें दिया है। शिवरंजनी कहती हैं कि मां की मदद के बिना कोई भी काम आसान नहीं होता है। मां स्मिता भारद्वाज का कहना है कि हर बच्चे में प्रतिभा होती है, उसे समय से निखारने की जरूरत होती है।

‘स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में जरूर पढ़ें बच्चे’
देवयानी और शिवरंजनी ने महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई समेत अन्य फ्रीडम फाइटर्स और क्रांतिकारियों के बारे में भी पढ़ा है। देश के हर नागरिक को स्वतंत्रता के संघर्ष के बारे में पढ़ना और जानना चाहिए। 


कई पुरस्कार जीत चुकी हैं शिवरंजनी और देवयानी
देवयानी और शिवरंजनी को हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, मराठी और फ्रेंज का ज्ञान है। वाराणसी एयरपोर्ट पर दोनों की अवाज में उद्घोषणा हो चुकी है। देवायनी को कुकिंग, पेंटिंग और नृत्य का शौक है तो शिवरंजनी को भी खाना बनाना, सिंगिंग करना, बैडमिंटन खेलना और पढ़ाना अच्छा लगता है। शिवरंजनी को कविताएं लिखने का शौक है। उनके पसंदीदा कवि उनके परनाना विट्ठल बारटके हैं। शिवरंजनी और देवयानी को क्विज, चित्रकारी और स्पेलबी कॉम्पिटीशन में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
 
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