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सिंधिया के रास्ते में नहीं आएंगी प्रियंका, वे भी नहीं लांघेंगे लक्ष्मण रेखा

Sat, 22 Feb 2020 06:49 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 22 Feb 2020 06:49 PM IST
सार

  • मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में आठ सीटें कांग्रेस की झोली में आने का अनुमान
  • सोनिया, राहुल, प्रियंका तीनों इसके पक्ष में नहीं
  • राजस्थान से प्रियंका को मिल सकती है राज्यसभा सीट

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Tussle in Between jyotiraditya scindia and Madhya Pradesh CM kamal nath on peak
Priyanka Gandhi- Rahul Gandhi- Jyotiradtya Scindia - फोटो : AmarUjala (सांकेतिक)

विस्तार

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों चाहते हैं कि मध्यप्रदेश के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा के लिए चुनकर संसद भवन पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इसके खिलाफ नहीं है।
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प्रियंका की टीम के एक सदस्य की मानें तो कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते में बिल्कुल नहीं आना चाहतीं। सूत्र बताते हैं कि ज्योतिरादित्य, प्रियंका और राहुल के बीच की केमिस्ट्री भी कुछ इसी तरह की है कि चाह कर भी ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघने के पक्ष में नहीं रहेंगे।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रियंका गांधी वाड्रा को राजस्थान से राज्यसभा में लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी यही चाहते हैं। सचिन पायलट और राजस्थान कांग्रेस संगठन भी इसके पक्ष में है।

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हालांकि प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश में ही कांग्रेस की जमीन तैयार करने में पूरा ताकत लगा देने के पक्ष में हैं। बताते हैं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान से कांग्रेस को राज्यसभा में आठ सीटें मिल सकती हैं। इसलिए कांग्रेस पार्टी भी संगठन के स्तर पर बड़ा भूचाल लाने के पक्ष में नहीं है।

क्या कहते हैं सिंधिया के करीबी

ज्योतिरादित्य के करीबी, उनके पिता माधवराव सिंधिया के जमाने से परिवार के शुभचिंतक का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से सिंधिया का अच्छा रिश्ता है। बताते हैं ग्वालियर-चंबल संभाग समेत मध्यप्रदेश के अनेक इलाकों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का खासा जनाधार है।

यदि वह कमलनाथ सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे, तो इसे संभाल पाना राज्य सरकार के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन सिंधिया फिलहाल लक्ष्मण रेखा लांघने से बचना चाहते हैं। इसकी वजह कांग्रेस के प्रति निष्ठा और राहुल प्रियंका के साथ दोस्ती के समीकरण हैं।

बताते हैं लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी प्रियंका गांधी अकसर ज्योतिरादित्य के आवास पर जाकर चुनाव अभियान को धार देती रही हैं। सूत्र का कहना है कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नेताओं के बीच में अपने राजनीतिक जमीन की लड़ाई है।

दो बड़े नेता अपने वारिसों के लिए राजनीति में षडयंत्र रच रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ के लिए तो दिग्विजय सिंह अपने बेटे के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। इसके चक्कर में सिंधिया के साथ केमिस्ट्री बिगड़ रही है।

कांग्रेस को अपनों से ही खतरा

ग्वालियर घराने से संपर्क रखने वाले एक अन्य सूत्र का कहना है कि वह चर्चा में नहीं आना चाहते। सच यह है कि कांग्रेस को अपने ही नेताओं से खतरा है। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर में सिंधिया को जिम्मेदारी देकर भेजा था, एक वादा भी किया था। कमलनाथ भी वहां जिम्मेदारी के साथ गए थे।

दिग्विजय सिंह ने भी राज्य में कांग्रेस सरकार बनवाने में कड़ी मेहनत की, लेकिन जब राज्य में सरकार बनने की स्थिति आई तो कमलनाथ का नाम आगे आया। सूत्र का कहना है कि तब ज्योतिरादित्य सिंधिया को खुद राहुल गांधी ने चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया था। चर्चा में प्रियंका गांधी शामिल हुई थीं।

राहुल गांधी की बात पर भरोसा करके ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री पद के दावे को छोड़ दिया था। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक वादा किया था, लेकिन अभी वह पूरा नहीं हो पाया।

आखिर कैसे युवा रहेंगे कांग्रेस के साथ

ज्योतिरादित्य पर कांग्रेस के अंदरखाने में चर्चा के दौरान बड़ा सवाल उभरकर आया कि आखिर युवा कांग्रेस पार्टी के साथ कैसे रहें? राजस्थान के एक बड़े नेता का कहना है कि कांग्रेस इस सवाल पर कोई काम नहीं कर रही है। पुराने नेताओं के षडयंत्र के आगे युवा नेता बेदम हो रहे हैं। सचिन पायलट नाराज थे, तो भंवर जितेन्द्र सिंह ने भी उन्हें मनाने में भूमिका निभाई थी।

राहुल गांधी के कुछ अन्य करीबी भी सचिन को मनाने आगे आए थे। लेकिन सचिन पायलट अब खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की एक फायर ब्रांड महिला नेता का कहना है कि आप अपने उत्तर प्रदेश को देख लीजिए। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजय कुमार उर्फ लल्लू बनाए गए हैं। लल्लू वहां लल्लू की तरह काम कर रहे हैं।



लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी हैं। वह रह-रहकर अधीरता खो देते हैं। चिंता की बात यह है कि सही लोग आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इतना ही नहीं पार्टी में सही निर्णय भी बहुत देर से हो रहा है। युवा का स्वभाव पार्टी के इस मिजाज के खिलाफ होता है।

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