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शहादत को नमन: नीम के पेड़ पर छह माह के बच्चे सहित 27 को दी गई थी फांसी, दमोह के फसिया नाले का अनूठा है इतिहास

Thu, 26 Jan 2023 03:23 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 26 Jan 2023 03:23 PM IST
सार

दमोह जिले के नरसिंहगढ़ में फसिया 'फांसी नाला' नाला प्रसिद्ध है। यहां कई क्रांतिकारियों को फांसी के फंदे पर लटका चढ़ा दिया गया था। फसिया नाला में नीम के पेड़ के नीचे एक साथ 27 लोगों को अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था। इनमें 18 लोग दमोह जिले के और नौ सागर जिले के रहने वाले थे।

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Tribute to martyrdom: Damoh Fasia Nala has a unique history in freedom movement
दमोह जिले के नरसिंहगढ़ में फसिया 'फांसी नाला' प्रसिद्ध है। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मध्यप्रदेश के दमोह जिले के फसिया नाले का अनूठा इतिहास देश के स्वतंत्रता आंदोलन के तारीखों में दर्ज है। यहां अंग्रेजों ने एक नीम के पेड़ से छह माह के बच्चे समेत 27 लोगों को फांसी पर लटका दिया था। 26 जनवरी के मौके पर इन क्रांतिकारियों को याद करना व उन्हें नमन करना लाजमी है। 

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दमोह जिले के नरसिंहगढ़ में फसिया (फांसी नाला) प्रसिद्ध है। यहां कई क्रांतिकारियों को फांसी के फंदे पर लटका चढ़ा दिया गया था। फसिया नाला में नीम के पेड़ के नीचे एक साथ 27 लोगों को अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था। इनमें 18 लोग दमोह जिले के और नौ सागर जिले के रहने वाले थे। इनमें छह माह का दूधमुंहा बच्चा भी शामिल था।
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मेजर किनकिनी ने किया था यह कारनामा
दरअसल आजादी की लड़ाई के दौरान 17 सितंबर 1857 को जबलपुर से मद्रास रेजीमेंट के मेजर किनकिनी अंग्रेज सेना की टुकड़ी को लेकर दमोह से होते हुए नरसिंहगढ़ पहुंचे थे। उन्होंने मराठा सूबेदार रघुनाथ राव करमाकर के किले पर हमला कर उन्हें व उनके फडणवीस रामचंद्र राव को पकड़ लिया था। शाहगढ़ के राजा बखत बली के विद्रोही सैनिकों को अपने किले में शरण देने के कारण किले पर ही फांसी के फंदे पर लटका दिया व उनके दीवान पंडित अजब दास तिवारी सहित उनके 18 परिजन जिनमें 6 माह का बच्चा भी था, को पकड़कर 18 सितंबर की सुबह नाले के किनारे लगे नीम के पेड़ से फांसी दे दी थी। तभी से इस नाले का नाम फसिया नाला पड़ गया। 
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जेल पर हमला कर क्रांतिकारियों को छुड़ा लिया था
इसी दौरान दमोह शहर की गजानन टेकरी के पीछे बालाकोट के जमींदार सोने सिंह व स्वरूप सिंह ने मराठा सूबेदार गोविंद राव का राजतिलक किया। उन्होंने तीन दिन दमोह पर शासन किया था जिन्हें बाद में अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, हिंडोरिया के किशोर सिंह ने दमोह की जेल पर हमला कर दिया व क्रांतिकारियों को छुड़ाकर खजाना लूट लिया था। इन पर व करीजोग खेजरा के ठाकुर पंचम सिंह पर एक-एक हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।

बुंदेला विद्रोह के वक्त राजा हृदय शाह ने भी की थी क्रांति
बुंदेला विद्रोह के नाम से इतिहास में दर्ज क्रांति के पूर्व तेजगढ़ के राजा हृदय शाह ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की शुरुआत की थी। वे क्रांति के शुरूआती नायक थे। इस जानकारी से अवगत कराते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने नरसिंहगढ़ प्रवास के दौरान बताया था कि राजा हृदय शाह की गिरफ्तारी के बाद जब बुंदेलाओं को लगा कि अंग्रेजी सरकार द्वारा धोखा किया गया है, तब वे क्रांति में शामिल हुए और 1942 की क्रांति को बुंदेला विद्रोह का नाम मिला। इसकी शुरुआत राजा हृदय शाह ने की थी । आज भी नरसिंहपुर जिले के हीरापुर में इनके वंशज रहते हैं। क्रांति के इतिहास के स्मरण के लिए तेजगढ़ में एक नाटक का आयोजन किया गया था जिनमें राजा हृदय शाह के वंशज भी आए थे। 


केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल हर साले जाते हैं फसिया नाला
वर्ष 2015 में नरसिंहगढ़ के युवा शैलेंद्र श्रीवास्तव ने एक संगठन बनाया जिसका नाम भारतीय युवा संगठन रखा गया और संगठन के सदस्यों ने सबसे पहले शहीद स्थल पर पहुंचकर श्रद्धांजलि देने की शुरुआत की थी। गत सात वर्षों से लगातार युवा संगठन के सदस्य शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को नमन करते हैं। नरसिंहगढ़ में शहीद स्थल को एक अलग पहचान मिली है। दमोह के सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त के मौके पर फसिया नाला पहुंचते हैं। उन्होंने लोकसभा में भी फसिया नाले के इतिहास का जिक्र किया था।

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