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यह हौसलों की उड़ान है: जबलपुर की जान्हवी ने गंभीर बीमारी को मात देकर हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज करवाया नाम
Wed, 29 Dec 2021 08:11 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 29 Dec 2021 08:11 PM IST
सार
जबलपुर की एक युवती ने आपदा को अवसर में बदलते हुए हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया है। इनका नाम जान्हवी रामटेकर है। इसके पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाकर अपना लोहा मनवाया है।
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Jabalpur: जान्हवी का नाम हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर की एक युवती ने आपदा को अवसर में बदलते हुए हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया है। इनका नाम जान्हवी रामटेकर है। इसके पहले इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाकर अपना लोहा मनवाया है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स में अध्ययनरत 20 वर्षीय छात्रा जान्हवी रामटेकर ने बताया कि साल 2017 में कक्षा दसवीं की परीक्षा से ठीक एक सप्ताह पहले वे कार्पेल टनल सिंड्रोम बीमारी से ग्रस्त हो गई थीं। जिसके कारण उनका राइट हैंड सुन्न हो जाता था और वह उसका उपयोग नहीं कर सकती थीं। परीक्षा की तिथि निकट होने के कारण उन्हें राइटर उपलब्ध नहीं हो सका। परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्होंने लिखने के लिए उलटे हाथ का उपयोग किया। परिवार के लोगों ने हौसला बढ़ाया तो वह उल्टे हाथ से लिखने लगीं। इस दौरान उपचार से उनकी बीमारी में भी लाभ मिलने लगा। कक्षा 12वीं की परीक्षा तक जान्हवी दोनों हाथ से लिखना सीख गई थीं।
इसी हुनर के कारण उनका नाम साल 2020 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उन्होंने एक मिनट में प्रत्येक हाथ से 18-18 कुल 36 सिग्नेचर कर कीर्तिमान स्थापित किया और 13 नवंबर को हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया। उन्होंने बताया कि बीमारी से ग्रस्त के कारण वे यह कीर्तिमान स्थापित कर पाईं। इसके लिए उनके पिता व मां ने अभिभावक के साथ-साथ एक शिक्षक की भी अहम भूमिका अदा की।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स में अध्ययनरत 20 वर्षीय छात्रा जान्हवी रामटेकर ने बताया कि साल 2017 में कक्षा दसवीं की परीक्षा से ठीक एक सप्ताह पहले वे कार्पेल टनल सिंड्रोम बीमारी से ग्रस्त हो गई थीं। जिसके कारण उनका राइट हैंड सुन्न हो जाता था और वह उसका उपयोग नहीं कर सकती थीं। परीक्षा की तिथि निकट होने के कारण उन्हें राइटर उपलब्ध नहीं हो सका। परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्होंने लिखने के लिए उलटे हाथ का उपयोग किया। परिवार के लोगों ने हौसला बढ़ाया तो वह उल्टे हाथ से लिखने लगीं। इस दौरान उपचार से उनकी बीमारी में भी लाभ मिलने लगा। कक्षा 12वीं की परीक्षा तक जान्हवी दोनों हाथ से लिखना सीख गई थीं।
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इसी हुनर के कारण उनका नाम साल 2020 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। उन्होंने एक मिनट में प्रत्येक हाथ से 18-18 कुल 36 सिग्नेचर कर कीर्तिमान स्थापित किया और 13 नवंबर को हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया। उन्होंने बताया कि बीमारी से ग्रस्त के कारण वे यह कीर्तिमान स्थापित कर पाईं। इसके लिए उनके पिता व मां ने अभिभावक के साथ-साथ एक शिक्षक की भी अहम भूमिका अदा की।
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