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MP News: पिता और भाई काट रहे जिसकी हत्या की सजा, वह जिंदा मिली, पुलिस और चिकित्सक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Thu, 30 Mar 2023 02:43 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 30 Mar 2023 02:43 PM IST
सार
छिंदवाड़ा जिले की सिंगोड़ी चौकी अंतर्गत ग्राम जोपनला में पुलिस द्वारा 2014 में मृत बताई गई एक युवती मंगलवार को अचानक ही घर वापस आ गई। पुलिस ने दो साल पहले युवती के कंकाल की बरामदगी दिखाकर हत्या के आरोप में युवती के पिता और भाई को जेल भेज दिया था।
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सिंगोड़ी चौकी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छिंदवाड़ा में एक बेहद आश्चर्यजनक मामला सामने आया है। इस मामले ने लोगों को दांतों तले उंगलिया दबाने पर मजबूर तो कर ही दिया साथ ही प्रशासनिक तंत्र पर भी सवालिया निशान लगा दिया। दरअसल मामला एक युवती की मौत से जुड़ा हुआ है। जिस युवती की हत्या के आरोप में पुलिस ने पिता और भाई को जेल भेज दिया था, वह लड़की जिंदा मिली है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस और अधिकारियों की कार्रवाई और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला छिंदवाड़ा जिले की सिंगोड़ी चौकी अंतर्गत ग्राम जोपनला का है। यहां पुलिस द्वारा 2014 में मृत बताई गई एक युवती मंगलवार को अचानक ही घर वापस आ गई। पुलिस ने दो साल पहले युवती के कंकाल की बरामदगी दिखाकर हत्या के आरोप में युवती के पिता और भाई को जेल भेज दिया था।
पुलिस के अनुसार 13 जून 2014 को युवती के भाई सोनू ने अपने पिता के साथ लाठी से हमला कर बहन की हत्या कर दी थी और शव को घर के पास खेत में दफना दिया था। उसकी बरामदगी भी 2021 में पुलिस ने तमाम गवाहों के सामने दर्शा दी और पंचनामा भी बना दिया। युवती के भाई और पिता से अपराध कबूल भी करवा लिया। मेडिकल रिपोर्ट और तमाम शिनाख्ती दस्तावेज भी बना लिए। तहसीलदार और चिकित्सकों की पुष्टि भी हासिल कर ली। फिर इन सबूतों के आधार पर लड़की के भाई और पिता को जेल भेज कर सारी औपचारिकताएं पूरी करके न्यायालय में चालान पेशकर वहां भी वाहवाही हासिल कर ली। लेकिन अब कुछ ऐसा होता है जो पुलिस ने सोचा भी नहीं था। लड़की अचानक कल अपने घर वापस आई। उसे देखकर गांव वाले और घर वाले अचंभित रह गए। पूरे इलाके में ये मामला चर्चा में आ गया। पुलिस आनन-फानन में मामले को दबाने में लग गई, लेकिन पुलिस की ये कोशिश सफल नहीं हुई।
जिस युवती को पुलिस ने मृत घोषित करवा दिया था उसने बताया कि वो अपनी मर्जी से घर से गई थी। इतने समय तक वो उज्जैन के पास रही और उसने शादी भी कर ली है। युवती का कहना है कि उसके पिता और भाई निर्दोष हैं, उन्हें पुलिस ने जबरन फंसाया है। बता दें कि युवती का भाई दो साल से जेल में है। पिता को एक साल जेल में रहने के बाद उम्र के आधार पर जमानत मिली है। लड़की का कहना है कि उसके निर्दोष भाई और पिता के साथ इंसाफ किया जाए।
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पुलिस ने दिखाई थी 210 हड्डियों की बरामदगी
मामले का एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि पुलिस ने जमीन खोदकर कंकाल की 210 हड्डियों की बरामदगी दिखाई थी, जबकि मानव शरीर मे कुल 206 हड्डियां ही होती हैं। साथ ही सात साल बाद सारी हड्डियों की बरामदगी होना भी आश्चर्यजनक है। ताज्जुब है कि डॉक्टर और तमाम अधिकारियों को भी ये तथ्य दिखाई नहीं दिया। पुलिस द्वारा अपना केस मजबूत बनाने के लिए ऐसे अनेकों मनगढ़ंत साक्ष्य पेश किए, जिनका जबाब देना भी अब पुलिस के लिए भारी पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने की थी जांच
घटना के समय युवती की उम्र 14 साल थी, इसलिए इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा दो वर्ष पूर्व ऐसे प्रकरणों का निपटारा करके वाहवाही हासिल की गई थी, जो कि कई साल से अनसुलझे पड़े हुए हैं और उसी अभियान में अपनी पीठ थपथपाने के लिए इस तरह के झूठे प्रकरण बनाकर उनका निपटारा किया गया था। ऐसा ही एक मामला सौंसर में भी सामने आ चुका है।
सिंगोड़ी चौकी पहुंची युवती
बहरहाल लड़की ने सिंगोड़ी चौकी में पहुंचकर पुलिस के सामने अपनी आमद दे दी है और पुलिस सारे मामले की जांच कर रही है। वर्तमान चौकी प्रभारी का कहना है कि इस घटना के समय वह यहां पदस्थ नहीं थे, इसलिए उन्हें जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच करने के बाद ही वे कुछ कह पाएंगे। नाबालिग का मामला होने के कारण दो वर्ष पहले इस मामले की जांच एसडीओपी अमरवाड़ा द्वारा की गई थी। उनका भी तबादला हो चुका है, इसलिए वर्तमान अधिकारी भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।
इस वाक्ये के बाद अब कई सवालों ने जन्म ले लिया है। यदि उक्त युवती जिंदा है तो पुलिस ने जो कंकाल बरामद किया था वह किसका था? क्या पुलिस ने डीएनए सहित अन्य जरूरी टेस्ट करवाए थे, जिनसे कंकाल की पहचान युवती के रूप में हुई थी, यदि करवाए थे और उक्त कंकाल गुम युवती का था तो फिर अब ये युवती जो पुलिस के सामने आकर खड़ी हो गई है ये कौन है? पुलिस ने उक्त कंकाल की 210 हड्डियों की बरामदगी दिखाई थी, मानव शरीर में 206 हड्डियां होती हैं, शेष 4 हड्डियां किसकी हैं? बहरहाल मामले की पूरी सच्चाई अब जांच के बाद ही सामने आएगी।
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पुलिस के अनुसार 13 जून 2014 को युवती के भाई सोनू ने अपने पिता के साथ लाठी से हमला कर बहन की हत्या कर दी थी और शव को घर के पास खेत में दफना दिया था। उसकी बरामदगी भी 2021 में पुलिस ने तमाम गवाहों के सामने दर्शा दी और पंचनामा भी बना दिया। युवती के भाई और पिता से अपराध कबूल भी करवा लिया। मेडिकल रिपोर्ट और तमाम शिनाख्ती दस्तावेज भी बना लिए। तहसीलदार और चिकित्सकों की पुष्टि भी हासिल कर ली। फिर इन सबूतों के आधार पर लड़की के भाई और पिता को जेल भेज कर सारी औपचारिकताएं पूरी करके न्यायालय में चालान पेशकर वहां भी वाहवाही हासिल कर ली। लेकिन अब कुछ ऐसा होता है जो पुलिस ने सोचा भी नहीं था। लड़की अचानक कल अपने घर वापस आई। उसे देखकर गांव वाले और घर वाले अचंभित रह गए। पूरे इलाके में ये मामला चर्चा में आ गया। पुलिस आनन-फानन में मामले को दबाने में लग गई, लेकिन पुलिस की ये कोशिश सफल नहीं हुई।
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जिस युवती को पुलिस ने मृत घोषित करवा दिया था उसने बताया कि वो अपनी मर्जी से घर से गई थी। इतने समय तक वो उज्जैन के पास रही और उसने शादी भी कर ली है। युवती का कहना है कि उसके पिता और भाई निर्दोष हैं, उन्हें पुलिस ने जबरन फंसाया है। बता दें कि युवती का भाई दो साल से जेल में है। पिता को एक साल जेल में रहने के बाद उम्र के आधार पर जमानत मिली है। लड़की का कहना है कि उसके निर्दोष भाई और पिता के साथ इंसाफ किया जाए।
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पुलिस ने दिखाई थी 210 हड्डियों की बरामदगी
मामले का एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि पुलिस ने जमीन खोदकर कंकाल की 210 हड्डियों की बरामदगी दिखाई थी, जबकि मानव शरीर मे कुल 206 हड्डियां ही होती हैं। साथ ही सात साल बाद सारी हड्डियों की बरामदगी होना भी आश्चर्यजनक है। ताज्जुब है कि डॉक्टर और तमाम अधिकारियों को भी ये तथ्य दिखाई नहीं दिया। पुलिस द्वारा अपना केस मजबूत बनाने के लिए ऐसे अनेकों मनगढ़ंत साक्ष्य पेश किए, जिनका जबाब देना भी अब पुलिस के लिए भारी पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने की थी जांच
घटना के समय युवती की उम्र 14 साल थी, इसलिए इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस द्वारा दो वर्ष पूर्व ऐसे प्रकरणों का निपटारा करके वाहवाही हासिल की गई थी, जो कि कई साल से अनसुलझे पड़े हुए हैं और उसी अभियान में अपनी पीठ थपथपाने के लिए इस तरह के झूठे प्रकरण बनाकर उनका निपटारा किया गया था। ऐसा ही एक मामला सौंसर में भी सामने आ चुका है।
सिंगोड़ी चौकी पहुंची युवती
बहरहाल लड़की ने सिंगोड़ी चौकी में पहुंचकर पुलिस के सामने अपनी आमद दे दी है और पुलिस सारे मामले की जांच कर रही है। वर्तमान चौकी प्रभारी का कहना है कि इस घटना के समय वह यहां पदस्थ नहीं थे, इसलिए उन्हें जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच करने के बाद ही वे कुछ कह पाएंगे। नाबालिग का मामला होने के कारण दो वर्ष पहले इस मामले की जांच एसडीओपी अमरवाड़ा द्वारा की गई थी। उनका भी तबादला हो चुका है, इसलिए वर्तमान अधिकारी भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।
इस वाक्ये के बाद अब कई सवालों ने जन्म ले लिया है। यदि उक्त युवती जिंदा है तो पुलिस ने जो कंकाल बरामद किया था वह किसका था? क्या पुलिस ने डीएनए सहित अन्य जरूरी टेस्ट करवाए थे, जिनसे कंकाल की पहचान युवती के रूप में हुई थी, यदि करवाए थे और उक्त कंकाल गुम युवती का था तो फिर अब ये युवती जो पुलिस के सामने आकर खड़ी हो गई है ये कौन है? पुलिस ने उक्त कंकाल की 210 हड्डियों की बरामदगी दिखाई थी, मानव शरीर में 206 हड्डियां होती हैं, शेष 4 हड्डियां किसकी हैं? बहरहाल मामले की पूरी सच्चाई अब जांच के बाद ही सामने आएगी।
