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हिंदू भाई को राखी बांधने पाकिस्तान से आई एक बहन

Thu, 22 Aug 2013 03:14 PM IST
इंटरनेट डेस्क
इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 22 Aug 2013 03:14 PM IST
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sister came india to celebrate rakhi

कुछ लोगों के लिए रिश्तों के मायने, धर्म-सरहदों और दूरियों से ज्यादा बड़े होते हैं। और रिश्तों के लिए ऐसे लोग कुछ भी करने को राजी रहते हैं। और फिर बात राखी की हो तो एक बहन ने मिसाल पेश करते हुए कराची से मध्यप्रदेश के हरदा आकर अपने हिंदू भाई को पांच साल बाद राखी बांधी।  

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सरहद भले ही मुल्कों का बंटवारा दे, लेकिन रिश्ते कभी नहीं बंट सकते। भाई-बहन का प्यार भी रिश्ते की उस डोर से बंधा होता जो रक्षाबंधन के मौके पर सात समंदर पार से करीब ले आती है। ऐसे में साइदा भला कैसे अपने भाई से दूर रह सकती थीं।
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सालों पुरानों रिश्ते
दिलीप खान व उनके चाचा का परिवार 50 के दशक में घंटाघर के पास रहता था। उस वक्त उनके पंकज बाफना के परिवार से भी पारिवारिक ताल्लुकात थे।

श्री खान के चाचा सन 47 में बंटवारे के वक्त बच्चों को लेकर पाकिस्तान चले गए। पाकिस्तान जाने के बाद भी वे रक्षाबंधन पर बाफना का हाल चाल जानकर त्योहार की शुभकामनाएं देते रहे।
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पाकिस्तान के कराची में रहने वाली साइदा खलील भारत आने के लिए बीते 5 साल से वीजा हासिल करने की कवायद में लगी थीं। यह संयोग था कि रक्षाबंधन के ठीक पहले वीजा मिल गया। बीते 5 दिनों से वे हरदा में अपने चचेरे भाई दिलीप खान के यहां आई हुई हैं।


मेरी सालों से दिली ख्वाहिश थी कि रक्षाबंधन पर हरदा आकर भाई की कलाई पर राखी बांधू। खुदा ने सालों बाद ही सही मेरी मन्नत मंजूर की। मुझे ठीक राखी से पहले वीजा मिला और मैं पंकज भैया को राखी बांध सकी।
- साइदा खलील

मुझे इस बात की खुशी है कि दशकों पुराने संबंध आज भी जीवित हैं। बुधवार को साइदा बहन से राखी बंधवाकर बेहद खुशी का अनुभव कर रहा हूं।- -पंकज बाफना

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