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मध्य प्रदेश: एनसीएल की ब्लास्टिंग से मंदिर की सीलिंग गिरी; खदान के आसपास आबादी की सुरक्षा पर सवाल
Fri, 09 Oct 2026 10:51 PM IST
सिंगरौली ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली
Published by: सिंगरौली ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 10:51 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के मोरवा में एनसीएल की ब्लास्टिंग के बाद वार्ड क्रमांक 4 अंबेडकर नगर स्थित राम-जानकी मंदिर की सीलिंग गिर गई। स्थानीय लोगों ने इससे पहले भी मकान क्षतिग्रस्त होने और तीन लोगों के घायल होने की घटनाओं का हवाला देते हुए खदान के आसपास सुरक्षा जांच की मांग की है। हालांकि, ब्लास्टिंग और नुकसान के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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ब्लास्टिंग से राम जानकी मंदिर की सीलिंग गिरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोयला उत्पादन की रफ्तार के बीच खदान के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का सवाल लगातार गंभीर होता जा रहा है। मोरवा में एनसीएल की ब्लास्टिंग के बाद मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाओं के बीच शुक्रवार को वार्ड क्रमांक 4 अंबेडकर नगर स्थित राम-जानकी मंदिर की सीलिंग टूटकर नीचे गिर गई। मंदिर परिसर में छत के बड़े-बड़े टुकड़े और मलबा बिखर गया।
ब्लास्टिंग के बाद मंदिर की सीलिंग गिरी
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 1:20 बजे एनसीएल की ब्लास्टिंग हुई। ब्लास्टिंग की तीव्रता इतनी अधिक महसूस हुई कि लोग भूकंप जैसी स्थिति समझकर सहम गए। इसके बाद मंदिर की सीलिंग टूटकर नीचे गिरने की घटना सामने आई। मंदिर परिसर में मलबा बिखरने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई।
मकानों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर चिंता
मंदिर में हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि खदान में लगातार हो रही भारी ब्लास्टिंग के बीच आसपास के मकानों, विद्यालयों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
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पहले भी मकानों को पहुंच चुका है नुकसान
सप्ताहभर पहले भी वार्ड क्रमांक 10 में खदान के करीब एक मकान पर ब्लास्टिंग का मलबा गिरा था। इससे मकान को नुकसान पहुंचा था, वहीं तीन लोग घायल हुए थे। एक माह पहले झूमरिया टोला में नवीन कुमार गुप्ता के करीब 4,000 वर्गफीट में बने दो मंजिला मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था।
मकान मालिक ने आरोप लगाया था कि एनसीएल की ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन के कारण दीवारों में दरारें आई थीं और मकान कमजोर हो गया था। उन्होंने पहले भी इस संबंध में एनसीएल को लिखित शिकायत देने की बात कही थी।
लगातार घटनाओं के बाद जांच की मांग
इन घटनाओं के बाद अब मंदिर की सीलिंग गिरने का मामला सामने आने से ब्लास्टिंग के प्रभाव और सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता, तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था।
ब्लास्टिंग के प्रभाव की जांच कराने की मांग
मंदिर की सीलिंग गिरने की घटना के बाद एनसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार घटनाएं सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं ले रहे हैं।
रहवासियों की मांग है कि खदान के आसपास के प्रभावित मकानों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न कंपन का रिकॉर्ड जांचा जाए तथा भवनों की संरचनात्मक स्थिति का विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में ब्लास्टिंग के कारण नुकसान की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
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ब्लास्टिंग के बाद मंदिर की सीलिंग गिरी
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 1:20 बजे एनसीएल की ब्लास्टिंग हुई। ब्लास्टिंग की तीव्रता इतनी अधिक महसूस हुई कि लोग भूकंप जैसी स्थिति समझकर सहम गए। इसके बाद मंदिर की सीलिंग टूटकर नीचे गिरने की घटना सामने आई। मंदिर परिसर में मलबा बिखरने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई।
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मकानों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर चिंता
मंदिर में हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि खदान में लगातार हो रही भारी ब्लास्टिंग के बीच आसपास के मकानों, विद्यालयों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
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पहले भी मकानों को पहुंच चुका है नुकसान
सप्ताहभर पहले भी वार्ड क्रमांक 10 में खदान के करीब एक मकान पर ब्लास्टिंग का मलबा गिरा था। इससे मकान को नुकसान पहुंचा था, वहीं तीन लोग घायल हुए थे। एक माह पहले झूमरिया टोला में नवीन कुमार गुप्ता के करीब 4,000 वर्गफीट में बने दो मंजिला मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गिर गया था।
मकान मालिक ने आरोप लगाया था कि एनसीएल की ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन के कारण दीवारों में दरारें आई थीं और मकान कमजोर हो गया था। उन्होंने पहले भी इस संबंध में एनसीएल को लिखित शिकायत देने की बात कही थी।
लगातार घटनाओं के बाद जांच की मांग
इन घटनाओं के बाद अब मंदिर की सीलिंग गिरने का मामला सामने आने से ब्लास्टिंग के प्रभाव और सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता, तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था।
ब्लास्टिंग के प्रभाव की जांच कराने की मांग
मंदिर की सीलिंग गिरने की घटना के बाद एनसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार घटनाएं सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं ले रहे हैं।
रहवासियों की मांग है कि खदान के आसपास के प्रभावित मकानों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न कंपन का रिकॉर्ड जांचा जाए तथा भवनों की संरचनात्मक स्थिति का विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में ब्लास्टिंग के कारण नुकसान की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
